नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर अपने सहयोगियों से कहा है कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान ‘समाप्त करने को तैयार’ हैं, भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज काफी हद तक बंद रहे। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति के रुख को लेकर ये दावा किया है। इससे पहले हाल में ट्रंप ने कहा था कि अगर तेहरान हॉर्मूज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन की अनुमति नहीं देता है तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों को ‘नष्ट’ कर देगा।
बहरहाल, रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने कहा कि दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल की आपूर्ति करने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए अभियान को वे ‘बाद की तारीख’ के लिए टाल देंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने कथित तौर पर आकलन किया कि समुद्री मार्ग को खोलने का अभियान संघर्ष को और लंबा खींच देगा। ऐसे में पूरा संघर्ष ट्रंप द्वारा निर्धारित चार से छह सप्ताह की समय-सीमा से काफी आगे जा सकता है।
होर्मूज के लिए दूसरे देशों पर दबाव बनाएगा अमेरिका!
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ट्रंप ने फैसला किया था कि अमेरिका को ईरान की नौसेना और मिसाइल भंडार को कमजोर करने और मौजूदा शत्रुता को समाप्त करने के अपने लक्ष्यों को हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही तेहरान पर राजनयिक रूप से दबाव डालकर स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से व्यापार को पहले की तरह शुरू करने की कोशिश होनी चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि यह रणनीति विफल रहती है, तो वाशिंगटन इसे फिर से खोलने में यूरोप और खाड़ी के सहयोगी देशों पर नेतृत्व करने के लिए दबाव डालेगा।
फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला स्ट्रेट ऑफ होर्मूज समुद्री मार्ग विश्व के लगभग 25 प्रतिशत तेल के परिवहन का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह समुद्री रास्ता भारत के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की 80 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है। जंग शुरू होने के बाद से ईरान ने जहाजों के आवागमन को काफी हद तक अवरुद्ध किया है। विशेष रूप से अमेरिका और युद्ध का समर्थन करने वाले देशों के लिए जहाजों का आवागमन लगभग ठप हो गया है।
बता दें कि अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान में हवाई हमले किए, जिसके बाद युद्ध की शुरुआत हुई। अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम से ऑपरेशन शुरू किया। इन हमलों में ईरान के कई शहरों को निशाना बनाया गया और अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई शीर्ष नेता मारे गए। दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं। ईरान ने दुबई, कुवैत, अबू धाबी, कतर और बहरीन सहित खाड़ी क्षेत्रों में कई देशों को नुकसान पहुंचाया है। साथ ही इजराइल पर भी उसने कई हमले किए हैं।
युद्ध का खर्च भी मांगेगे ट्रंप?
दूसरी ओर सोमवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पत्रकारों से कहा कि ट्रंप अरब देशों से ईरान युद्ध की लागत का भुगतान करने का आह्वान करने में रुचि रखेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि ट्रंप इस मुद्दे पर और भी कुछ कहेंगे।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब लीविट से पूछा गया कि क्या अरब देश युद्ध का खर्च उठाने में मदद करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वह ट्रंप से पहले कोई राय नहीं देंगी, लेकिन यह ट्रंप का भी एक विचार था। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि राष्ट्रपति इसमें काफी दिलचस्पी लेंगे। मैं इस बारे में उनसे पहले कोई राय नहीं दूंगी, लेकिन निश्चित रूप से यह एक विचार है, जिसके बारे में आप उनसे और अधिक सुनेंगे।’
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