रविवार, मार्च 22, 2026
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डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम-होर्मुज स्ट्रेट खोलें वरना तबाह कर देंगे पावर प्लांट

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप की यह नई डेडलाइन ऐसे समय में आई है जब ईरान ने इजराइल के न्यूक्लियर सिटी डिमोना और अराद पर मिसाइल हमले किए जिसमें 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं और 11 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

वाशिंगटनः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोलता है तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को निशाना बनाकर तबाह कर देगा।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अगर ईरान 48 घंटों के भीतर बिना किसी धमकी केहोर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनके विभिन्न पावर प्लांट्स पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देगा, जिसकी शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप की यह नई डेडलाइन ऐसे समय में आई है जब ईरान ने इजराइल के न्यूक्लियर सिटी डिमोना और अराद पर मिसाइल हमले किए जिसमें 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं और 11 की हालत गंभीर बताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक शनिवार ईरान के नतांज परमाणु सुविधा पर भी हमले किए गए थे।

होर्मुज स्ट्रेट में जो हालात बने हुए हैं, उसकी वजह से अमेरिका को नाटो देशों से अपील करनी पड़ी थी स्ट्रेट को खुला रखने के लिए यूएस का साथ दें और वॉरशिप भेजें। हाल ही में ट्रंप ने उन देशों से अपील की थी जो इस रास्ते से तेल मंगाते हैं। उन्होंने कहा था कि इन देशों को इस समुद्री मार्ग को खुला रखने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए और अमेरिका उनकी मदद करेगा।

इजराइल के न्यूक्लियर सिटी डिमोना–अराद पर ईरान का मिसाइल हमला, 100 से ज्यादा घायल

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से क्या कहा था?

सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में ट्रंप ने कहा था कि जिन देशों पर इस समुद्री रास्ते में रुकावट पड़ने का असर हो सकता है, उन्हें अमेरिकी सेना के साथ मिलकर इसकी सुरक्षा करनी चाहिए। उन्होंने लिखा, “कई देश, खासकर वे देश जो ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की कोशिश से प्रभावित हो सकते हैं, अमेरिका के साथ मिलकर इस रास्ते को सुरक्षित और खुला रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे।”

ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में इस बात पर जोर देकर कहा था कि “हम होर्मुज स्ट्रेट का उपयोग नहीं करते, अमेरिका को इसकी आवश्यकता नहीं है। यूरोप, कोरिया, जापान, चीन को इसकी आवश्यकता है, इसलिए उन्हें इसमें शामिल होना होगा।”

यह यह बताना भी जरूरी है कि ट्रंप की ताजा चेतावनी ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की सीमित बिक्री के लिए अस्थायी छूट दी थी और संकेत दिया था कि वह मध्य पूर्व में अपनी सैन्य गतिविधियां कम करने पर विचार कर रहा है। हालांकि अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अपने बयान में कहा था कि ईरान को दी गई छूट केवल समुद्र में पहले से मौजूद तेल की बिक्री तक सीमित है। इसमें नए उत्पादन या खरीद की अनुमति नहीं है और ईरान के लिए इससे राजस्व हासिल करना भी आसान नहीं होगा।

होर्मुज स्ट्रेट की क्या है अहमियत, भारत इस रास्ते से कितना तेल मंगाता है?

दरअसल, 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही रोक दी थी, जिससे वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई और कीमतें तेजी से बढ़ गईं। यह मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई होती है।

यह जलमार्ग उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से घिरा हुआ है। इसकी चौड़ाई प्रवेश और निकास पर करीब 50 किलोमीटर (31 मील) और सबसे संकरे हिस्से में लगभग 33 किलोमीटर है। यह खाड़ी देशों को अरब सागर से जोड़ता है।

दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का परिवहन आम तौर पर इसी रास्ते से होता है। इसमें सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि कतर, इराक, कुवैत और यूएई जैसे अन्य खाड़ी देशों का तेल भी शामिल है।

आमतौर पर हर महीने करीब 3000 जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन हाल के दिनों में यह संख्या काफी घट गई है, क्योंकि ईरान ने टैंकरों और अन्य जहाजों पर हमले की धमकी दी है। समाचार एजेंसी एएफपी के 18 मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से कम से कम 21 जहाजों पर हमला हुआ है, उन्हें निशाना बनाया गया है या उन्होंने हमलों की सूचना दी है।

युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जो इस साल करीब 70 फीसदी और पिछले साल के मुकाबले लगभग 50 फीसदी ज्यादा है।

भारत के नजरिए से देखें तो देश अपनी जरूरत का करीब 85 से 89 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। पहले भारत के कुल आयात का करीब 55 फीसदी हिस्सा हॉर्मुज स्ट्रेट के बाहर के रास्तों से आता था, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 70 फीसदी हो गया है। इसके बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित बनी हुई है। देश की रोजाना खपत करीब 55 लाख बैरल है और भारत लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है।

भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत करीब 189 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है, जिसमें से 97.5 मिलियन घन मीटर घरेलू उत्पादन से आता है। मौजूदा हालात के चलते करीब 47.4 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

अगर रसोई गैस की बात करें तो भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60 फीसदी आयात करता है, जिसमें से लगभग 90 फीसदी हिस्सा हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है। मौजूदा तनाव के कारण इस आपूर्ति पर असर पड़ा है, हालांकि सरकारी उपायों के चलते घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।

कच्चे तेल के लिए रूस, इराक, सऊदी अरब और यूएई भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका से भी आयात बढ़ा है। भारत खाड़ी क्षेत्र के कुवैत, कतर, ओमान और मिस्र; अफ्रीका के नाइजीरिया, अंगोला, लीबिया और अल्जीरिया; अमेरिकी महाद्वीप के कनाडा, मेक्सिको और ब्राजील; और मध्य एशिया के कजाकिस्तान व अजरबैजान से भी तेल आयात करता है।

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एलएनजी के मामले में भारत करीब 47 से 50 फीसदी आयात कतर से करता है। इसके अलावा यूएई, ओमान, नाइजीरिया, अंगोला, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी एलएनजी मंगाई जाती है। खाना पकाने वाली गैस के लिए भारत मुख्य रूप से कतर, सऊदी अरब और यूएई पर निर्भर है, हालांकि अब अमेरिका भी इस सूची में शामिल हो गया है।

22 देशों ने हॉर्मुज में ईरान की नाकेबंदी और जहाजों पर हमलों की निंदा करते हुए समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए संयुक्त प्रयासों की तैयारी जताई है, हालांकि इस बयान में अमेरिका शामिल नहीं था।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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