वॉशिंगटन: क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनल ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बार-बार दी जा रही धमकियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप के बयानों की आलोचना करते हुए मिगेल डियाज ने कहा कि गंभीर ईंधन और आर्थिक संकट का सामना कर रहा क्यूबा किसी भी बाहरी आक्रमण का डटकर मुकाबला करेगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मिगेल डियाज-कैनल ने कहा, ‘सबसे खराब स्थिति का सामना करने पर भी क्यूबा के पास एक गारंटी है, कोई भी बाहरी हमलावर कड़े प्रतिरोध का सामना करेगा।’
क्यूबा के राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ट्रंप की ओर से लगातार दी जा रही धमकियों के बीच आई है। एक दिन पहले ही ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था कि वह ‘किसी न किसी रूप में क्यूबा को अपने नियंत्रण में ले सकते हैं’। उन्होंने यह भी दावा किया था कि वह उस देश के साथ ‘कुछ भी कर सकते हैं।’ ट्रंप ने पत्रकारों से ये भी कहा, ‘मुझे लगता है कि क्यूबा को अपने नियंत्रण में लेने का सम्मान मुझे मिलेगा।’
एक पत्रकार के सवाल पर ट्रंप ने कहा, ‘हाँ, किसी न किसी रूप में क्यूबा को लेना है। क्यूबा को लेना…मेरा मतलब है कि चाहे मैं उसे आजाद कराऊं या अपने नियंत्रण में लूं…सच कहूँ तो मैं उसके साथ जो चाहूँ कर सकता हूँ।’
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पहले से ही क्यूबा के बारे में सोच रहा है। ट्रंप ने ईरान से जुड़े चल रहे अभियानों के बाद क्यूबा को लेकर संभावित कार्रवाई का संकेत भी दिया।
दरअसल, ट्रंप के ये बयान अमेरिका-क्यूबा संबंधों के संदर्भ में बेहद असामान्य माने जा रहे हैं। 1959 में अमेरिकी समर्थित सरकार के हटने और फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में समाजवादी शासन आने के बाद से अब तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल के दशकों में सार्वजनिक रूप से क्यूबा पर नियंत्रण लेने की बात नहीं कही थी।
क्यूबा पर बढ़ता अमेरिकी दबाव
बहरहाल, हाल के महीनों में अमेरिका ने आर्थिक उपायों के जरिए क्यूबा पर दबाव बढ़ाया है। जनवरी से वॉशिंगटन ने अन्य देशों को क्यूबा में ईंधन आपूर्ति को लेकर चेतावनी देते तेल खेपों को प्रभावी रूप से रोक दिया है। अमेरिकी कोस्ट गार्ड के एक जहाज ने क्यूबा के लिए कच्चा तेल ले जा रहे एक टैंकर को भी रोक लिया था।
अमेरिकी रुख का गंभीर असर क्यूबा पर पड़ा है। जनवरी की शुरुआत से देश को कोई बड़ी ईंधन आपूर्ति नहीं मिली है। इसके कारण क्यूबा में ब्लैक मार्केट में ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं और बार-बार बिजली कटौती हो रही है। हाल ही में देशभर में 29 घंटे का ब्लैकआउट भी देखा गया। यहां तक की राजधानी हवाना के बड़े हिस्से में भी कई घंटे तक बिजली नहीं थी।
इस संकट का असर क्यूबा में आम जीवन पर भी पड़ रहा है। अस्पतालों में सर्जरी टाली जा रही हैं, दवाइयों की कमी हो रही है और पूरे द्वीप में खाद्य संकट बढ़ता जा रहा है।
बढ़ते दबाव के बीच क्यूबा सरकार ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू की है और संभावित आर्थिक बदलावों के संकेत दिए हैं। सरकार ने विदेशों में रहने वाले क्यूबाई नागरिकों को देश में भी निवेश और व्यापार करने की अनुमति देने जैसे कदमों की घोषणा की है।
क्यूबा की सरकार बिगड़े हालात के लिए अमेरिका की उर्जा नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहरा रही है। दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि क्यूबा की अर्थव्यवस्था ठीक तरीके से काम नहीं कर रही और मौजूदा सरकार इसे ठीक नहीं कर सकती। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिका असल में क्यूबा में राजनीतिक बदलाव या नेतृत्व परिवर्तन चाहता है।
इस बीच रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने कहा है कि वह क्यूबा के संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर उसकी मदद कर सकता है।

