अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाया गया 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ सिर्फ व्यापार से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘निजी नाराजगी’ है। यह दावा अमेरिकी निवेश बैंक जेफरीज की एक रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने जब ट्रंप को भारत-पाकिस्तान संघर्ष में मध्यस्थता करने का मौका नहीं दिया, तो ट्रंप उनसे नाराज हो गए।
ये टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो गए हैं और अनुमान है कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था को 55–60 अरब डॉलर का झटका लगेगा। खासकर टेक्सटाइल, फुटवियर, ज्वेलरी और रत्न-आभूषण जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जिनमें लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है।।
‘ट्रंप को नोबेल चाहिए था लेकिन भारत ने…’
जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार यह टैरिफ मुख्य रूप से ट्रंप की ‘व्यक्तिगत नाराजगी’ का नतीजा है। वह भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने में भूमिका निभाकर नोबेल शांति पुरस्कार जीतना चाहते थे। लेकिन भारत ने हमेशा से ही पाकिस्तान के साथ अपने मामलों में किसी तीसरे पक्ष के दखल को खारिज किया है। इस बार भी वह अपनी इस ‘रेड लाइन’ से पीछे नहीं हटा।
ट्रंप लगातार कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने ही दोनों देशों पर दबाव डालकर युद्धविराम कराया और दक्षिण एशिया में परमाणु युद्ध को रोका। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह से गलत बताया। मंत्रालय ने साफ किया कि युद्धविराम भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियानों के महानिदेशकों (DGMOs) के बीच सीधी बातचीत से हुआ था।
अमेरिका की क्या है मांग, भारत किस बात पर अड़ा?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस टकराव की वजह से भारत-अमेरिका के बीच तय हो रहा एक बड़ा व्यापार समझौता टूट गया। इसके अलावा, अमेरिका चाहता है कि भारत अपने कृषि और डेयरी बाजार विदेशी आयात के लिए खोले, लेकिन भारत ने इसे हमेशा ठुकराया दिया है क्योंकि इससे 25 करोड़ किसानों और खेत मजदूरों की आजीविका पर संकट आ सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप की आर्थिक नीतियों से भारत-चीन रिश्ते और नजदीक आ सकते हैं। दोनों देशों के बीच सितंबर से पांच साल बाद फिर से सीधी उड़ानें शुरू होने वाली हैं और चीन से भारत का आयात पहले से ही 118 अरब डॉलर सालाना तक पहुँच चुका है जो हर साल 13% की दर से बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ये टैरिफ बने रहते हैं, तो भारत की जीडीपी ग्रोथ में 1 से 1.2% तक की कमी आ सकती है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भारी नुकसान होगा, भले ही भारत के सर्विस एक्सपोर्ट पर अभी कोई असर न पड़े। सरकार ने असर कम करने के लिए मध्यवर्ग के लिए टैक्स कटौती, जीएसी स्लैब घटाकर केवल 5% और 18% करने और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा ब्याज दरों में कटौती जैसे कदम उठाए हैं।
रिपोर्ट के अंत में कहा गया है कि यह फैसला ट्रंप की आहत ईगो का नतीजा है, न कि किसी ठोस आर्थिक रणनीति का। लेकिन अगर इसे जल्दी वापस नहीं लिया गया, तो इसका नुकसान सिर्फ भारत को ही नहीं, बल्कि अमेरिका की एशिया में दीर्घकालिक रणनीतिक भूमिका को भी होगा।
एससीओ बैठक में मिलेंगे शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी
मोदी सात साल बाद चीन की यात्रा पर जा रहे हैं। वे तियानजिन में होने वाले इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जिसमें रूस और ईरान जैसे देश भी सदस्य हैं। जापान से रवाना होने से पहले उन्होंने जापानी अखबार योमिउरी शिंबुन को लिखित जवाब में दोनों देशों को लेकर एक अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया की मौजूदा अस्थिर आर्थिक स्थिति में भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को मिलकर वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को स्थिर करने के लिए काम करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर मैं तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होऊंगा। पिछले साल कजान में उनसे हुई मुलाकात के बाद से भारत-चीन रिश्तों में स्थिर और सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और चीन जैसे दो पड़ोसी और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों के बीच स्थिर, भरोसेमंद और दोस्ताना संबंध पूरे क्षेत्र और विश्व की शांति व समृद्धि पर सकारात्मक असर डाल सकते हैं। भारत आपसी सम्मान, साझा हित और संवेदनशीलता के आधार पर दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टि से रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।