दिलजीत दोसांझ अभिनीत ‘पंजाब ’95’ (Punjab ‘95′) अपने रिलीज की पिछले दो साल से राह देख रही है। मानवाधिकार की आवाज बुलंद करने वाले सिख नेता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी यह फिल्म एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला संसद तक पहुंच गया है।
लोकसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद गुरमीत सिंह मीट हेयर ने फिल्म की रिलीज में हो रही देरी और सेंसर बोर्ड के रवैये को लेकर शुक्रवार सवाल उठाया। इसका वीडियो खुद दिलजीत दोसांझ ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद इसकी रिलीज की आस फिर से जागती दिख रही है।
लोकसभा में मीट हेयर ने आरोप लगाया कि सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है। वीडियो में गुरमीत सिंह मीट हेयर कहते हैं कि एक तरफ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा पर बनी फिल्म को रिलीज नहीं होने दिया जा रहा है और दूसरी तरफ प्रोपेगेंडा फैलाने वाली और 26/11 जैसे हमलों को दिखाने वाली फिल्मों को खुले दौर पर रिलीज की आजादी दे दी गई है।
निर्देशक हनी त्रेहान इस बात से काफी आहत हैं कि उनकी फिल्म में ऐसा क्या है जिसको लेकर आपत्ति जताई जा रही है और पिछले 2-3 सलों से बैन है। वह कहते हैं कि यह पूरी फिल्म दस्तावेजों पर बनी है। एक भी सीन बिना दस्तावेज के बिना नहीं बनी है। सेशन कोर्ट, सीबीआई स्पेशल कोर्ट, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट औऱ सुप्रीम कोर्ट के फैसले हैं। फिल्म के लिए लीगल रिसर्च की गई है। मुझे नहीं पता कि इतना विवाद क्यों हो रहा। किसे इससे दिक्कत है। जसवंत सिंह खालड़ा के नाम को हटाने के लिए कहते हैं, यह तो अपराध है।
हनी त्रेहान ने द न्यूज मिनट को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि कश्मीर पर फिल्म बनती है और रिलीज भी होती है, यहां तक कि संसद में उसे स्टैंडिंग ओवेशन मिलता है। गुजरात पर साबरमती जैसी फिल्म आती है, जिसकी संसद में स्क्रीनिंग होती है। केरल, दिल्ली और इमरजेंसी जैसे विषयों पर भी फिल्में बनती और दिखाई जाती हैं।
उन्होंने साफ किया कि उन्हें इन फिल्मों के निर्माताओं से कोई आपत्ति नहीं है। ये सभी फिल्में अलग-अलग राज्यों और मुद्दों पर आधारित हैं, और वहां कानून-व्यवस्था भी नियंत्रण में रहती है। लेकिन जब बात पंजाब पर बनी एक फिल्म की आती है, तो यह कहा जाता है कि इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
दो साल से अधर में Punjab ‘95′, पूरा विवाद क्या है
दरअसल, फिल्म ‘पंजाब ’95’ पिछले काफी समय से सेंसर बोर्ड (CBFC) के साथ विवादों में फंसी हुई है। 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद विरोधी अभियान के दौरान हुए कथित फर्जी एनकाउंटर, अवैध दाह संस्कार और लापता लोगों की जांच जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाने वाली इस फिल्म पर बोर्ड ने कई आपत्तियां जताई हैं। यही वजह रही कि सुझाए गए बदलावों की संख्या बढ़ते-बढ़ते करीब 127 कट्स तक पहुंच गई।
इन कट्स को लेकर निर्देशक हनी त्रेहान ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि इतने व्यापक बदलावों के बाद फिल्म अपनी मूल आत्मा ही खो देगी। उन्होंने कहा कि अगर फिल्म को इन्हीं शर्तों के साथ रिलीज करना पड़ा, तो वे और अभिनेता दिलजीत दोसांझ दोनों अपना नाम इससे हटाने पर विचार कर सकते हैं। त्रेहान के मुताबिक, बोर्ड ने फिल्म से ‘पंजाब’ शब्द हटाने, ‘पंजाब पुलिस’ की जगह सिर्फ ‘पुलिस’ लिखने, इंदिरा गांधी से जुड़े संदर्भ हटाने और यहां तक कि जसवंत सिंह खालड़ा के नाम के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई।
त्रेहान का कहना है कि सेंसर बोर्ड की एग्जामिनिंग कमेटी ने फिल्म में दिखाए गए घटनाक्रमों के सबूत मांगे थे, जिन्हें उनकी टीम ने दस्तावेजों के साथ जमा कराया। इसके बावजूद समय-समय पर नए कट्स की मांग सामने आती रही। मामला अदालत तक भी पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान जज ने फिल्म देखने के बाद इसे गंभीर और बेचैन करने वाली बताया, साथ ही बिना ठोस कारणों के इसे रोके जाने पर सवाल भी उठाए।
फिल्म को लेकर मानवाधिकार संगठनों और खालड़ा परिवार ने भी खुलकर समर्थन किया है। जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने सेंसर बोर्ड के सुझाए बदलावों का विरोध करते हुए कहा कि फिल्म में दिखाए गए तथ्य पहले से ही सार्वजनिक रिकॉर्ड और अदालतों में दर्ज हैं, ऐसे में इनमें बदलाव की कोई जरूरत नहीं है।
गौर करने वाली बात यह है कि फिल्म पहले ‘घल्लूघारा’ नाम से बनाई गई थी, जिसे बाद में बदलकर ‘पंजाब ’95’ कर दिया गया। 2023 में इसके टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में प्रीमियर की चर्चा रही, लेकिन बाद में यह योजना टल गई। त्रेहान के मुताबिक उनके प्रोड्यूसर को फिल्म का नाम वापस लेने के लिए कहा गया। यह भी कहा गया कि आप इसको लेकर हाईकोर्ट नहीं जा सकते।
बता दें कि जनवरी 2025 में दिलजीत दोसांझ ने फिल्म को उसी साल फरवरी में रिलीज करने की घोषणा की थी, मगर बाद में “नियंत्रण से बाहर हालात” का हवाला देते हुए रिलीज टाल दी गई। कुछ समय बाद फिल्म का टीजर भी यूट्यूब से हटा लिया गया। फिल्म कब रिलीज होगी, इसको लेकर अबतक कोई अपडेट सामने नहीं आया है।
कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा?
जसवंत सिंह खालड़ा शिरोमणि अकाली दल की मानवाधिकार शाखा के महासचिव और प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उनका वास्तविक नाम जसवंत सिंह संधू था। “खालड़ा” उनका उपनाम नहीं, बल्कि उनके पैतृक गांव का नाम है। वे पंजाब के तरनतारन जिले के खालड़ा गांव से थे, और इसी वजह से लोग उन्हें जसवंत सिंह खालड़ा के नाम से जानने लगे।
जसवंत सिंह खालड़ा ने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद और पुलिस कार्रवाई के दौरान लापता लोगों की फाइलों को उजागर किया। उन्होंने जून 1984 से दिसंबर 1994 तक अमृतसर, मजीठा और तरनतारन के श्मशान घाटों में किए गए दाह संस्कारों की जांच की थी। उन्होंने सबूत पेश किए कि हजारों अज्ञात शव पुलिस द्वारा अवैध कार्रवाइयों में मारे गए लोगों के थे।
सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, खालड़ा की इन खुलासों से स्थानीय पुलिस नाराज थी। 6 सितंबर 1995 को उन्हें अमृतसर के कबीर पार्क स्थित घर से उठा लिया गया। रिपोर्ट बताती है कि खालड़ा को अवैध हिरासत में रखने के बाद मार दिया गया और उनका शव हरिके क्षेत्र की एक नहर में फेंक दिया गया।
पंजाब ‘95 का निर्देशन हनी त्रेहन ने किया है और इसे रॉनी स्क्रूवाला ने प्रोड्यूस किया है। इसमें दिलजीत दोसांझ जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि अर्जुन रामपाल और सुविंदर विक्की भी अहम किरदारों में हैं। ट्रेलर में 1984 के दंगों, ऑपरेशन ब्लू स्टार और पंजाब के उथल-पुथल भरे दौर के सवाल उठते नजर आते हैं।

