दिल्ली में लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार बम धमाके में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को एक और आरोपी की गिरफ्तारी की। बुधवार को एजेंसी ने फरिदाबाद के धौज निवासी शोएब को गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 10 दिन की एनआईए कस्टडी में भेज दिया गया।
शोएब पर आरोप है कि उसने हमले से ठीक पहले आतंकवादी डॉक्टर उमर मोहम्मद उर्फ उमर उन नबी को पनाह दी थी और हमले के लिए जरूरी लॉजिस्टिक सपोर्ट भी उपलब्ध कराया था।
शोएब इस केस में गिरफ्तार होने वाला सातवां आरोपी है। उससे पहले एनआईए ने उमर के छह सहयोगियों को गिरफ्तार कर रखा है। एजेंसी ने बताया कि वह इस आत्मघाती हमले से जुड़े नेटवर्क को पकड़ने के लिए कई राज्यों में स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर लगातार तलाशी और पूछताछ कर रही है।
गौरतलब है कि दूसरे अहम आरोपी आमिर राशिद अली की भी कस्टडी सात दिन बढ़ा दी गई है। राशिद की बुधवार एनआईए कस्टडी खत्म हो रही थी। जांच एजेंसी ने बताया कि जांच तेज की जा रही है और केस नंबर RC-21/2025/NIA/DLI के तहत कई और सुरागों पर काम चल रहा है।
‘मोबाइल वर्कस्टेशन’ लेकर चलता था उमर, यूनिवर्सिटी में करता था केमिकल टेस्ट
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आतंकी उमर अपने साथ एक बड़ा सूटकेस रखता था, जिसे जांचकर्ताओं ने “मोबाइल वर्कस्टेशन” का नाम दिया है। इसमें बम बनाने के उपकरण, केमिकल कंपाउंड और कंटेनर मिले हैं। पूछताछ में सामने आया कि उमर जहां भी जाता, यही सूटकेस उसके साथ रहता।
उमर अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरिदाबाद में मेडिकल प्रोफेशनल के तौर पर जुड़ा हुआ था। गिरफ्तार आरोपी डॉ. मुजमिल शकील ने बताया कि उमर अपने रूम में केमिकल रिएक्शन टेस्ट करता था। यही पदार्थ बाद में आईईडी तैयार करने में इस्तेमाल हुए। इससे पहले एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि उमर ने विस्फोटक सामग्री को असेंबल करने से पहले छोटे पैमाने पर कई बार परीक्षण किया था। बाद में पुलिस ने उसके सूटकेस से बम बनाने वाला सामान बरामद किया।
हादसे से ठीक पहले कार में पूरी की थी विस्फोटक तैयारी
जांच में यह भी सामने आया है कि उमर ने आधा तैयार आईईडी उसी हुंडई i20 कार में रखा था, जिसमें धमाका हुआ। हमले से कुछ देर पहले उसने एसीटोन (जो नेल पॉलिश रिमूवर में होता है), यूरिया और पाउडर शुगर मिलाकर अंतिम विस्फोटक मिश्रण तैयार किया। पहले योजना थी कि हरियाणा से विस्फोटक सामग्री जम्मू-कश्मीर ले जाई जाए, जहां कुछ बड़ा हमला करने का इरादा था, लेकिन यह योजना विफल रही।
डॉ. मुजमिल शकील ने जांचकर्ताओं को बताया कि उमर खुद को इस आतंकी मॉड्यूल का ‘अमीर’ यानी प्रमुख कहता था। वह नौ भाषाएं जानता था और मॉड्यूल में सबसे शिक्षित और रणनीतिक सोच रखने वाला व्यक्ति माना जाता था। एनआईए का कहना है कि नेटवर्क के बाकी सदस्यों का पता लगाने के लिए जांच तेज गति से चल रही है और आने वाले दिनों में और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।

