नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में सख्त प्रदूषण से निपटने के लिए कई उपायों का ऐलान किया गया है। दिल्ली सरकार द्वारा अपनाए गए सख्त प्रदूषण विरोधी उपायों के तहत आज से BS-VI इंजन वाली गाड़ियों को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही फ्यूल स्टेशन पर बिना PUC सर्टिफिकेट वाली गाड़ियों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम भी अनिवार्य कर दिया गया है। आखिर क्या कुछ उपाय दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए किए गए हैं, 10 प्वाइंट में समझते हैं।
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने की कवायद, 10 बड़ी बातें
- दिल्ली में फिलहाल सिर्फ BS-VI इंजन वाली कारों को ही अनुमति दी जाएगी। इस कदम से गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद और नोएडा जैसे आस-पास के इलाकों से दिल्ली में आने वाले 12 लाख वाहनों पर असर पड़ने की उम्मीद है। नोएडा से 4 लाख से ज्यादा, गुड़गांव से 2 लाख और गाजियाबाद से 5.5 लाख वाहनों को राष्ट्रीय राजधानी में आने से रोक दिया जाएगा।
- गाड़ियों की चेकिंग के लिए 580 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, और 126 चेकपॉइंट पर 37 एनफोर्समेंट वैन तैनात रहेंगी। पेट्रोल पंपों पर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट, नगर निगम और खाद्य विभाग के कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा।
- दिल्ली में पहले ही पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे लगाए जा चुके हैं, जो बिना वैलिड PUC सर्टिफिकेट वाली गाड़ियों की पहचान करेंगे।
- दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने यह घोषणा की। ये उपाय तब तक लागू रहेंगे जब तक राष्ट्रीय राजधानी में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-4 लागू है।
- दिल्ली सरकार ने ये कड़े कदम तब उठाए हैं जब अध्ययन में पाया गया कि सर्दियों में PM 10 प्रदूषण का 19.7 प्रतिशत और PM 2.5 प्रदूषण का 25.1 प्रतिशत वाहनों की वजह से होता है।
- प्राइमरी स्कूल के लिए फिजिकल क्लास बंद कर दी गई हैं, जबकि सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी क्लास के स्टूडेंड को ऑनलाइन और फिजिकल क्लास में से चुनने का ऑप्शन दिया गया है। सरकारी और निजी कार्यालयों को सिर्फ 50 प्रतिशत स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम मुहैया करने के लिए कहा गया है।
- दिल्ली में कंस्ट्रक्शन मटीरियल ले जाने वाले ट्रकों पर बैन जारी रहेगा। दरअसल, ग्रैप के नियमों के तहत निर्माण कार्य पर रोक जारी है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। राजधानी में प्रदूषण से हालात काफी खराब हैं, जिसके चलते दिल्ली सरकार ने गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण, धूल, कचरा और ट्रैफिक जाम को टारगेट करते हुए इमरजेंसी और लॉन्ग-टर्म उपायों का एक बड़ा सेट घोषित किया है।
- पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को बताया कि सरकार कई मोर्चों पर काम कर रही है, क्योंकि लोग खतरनाक धुंध (स्मॉग) के संपर्क में हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिरसा ने पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (पीयूसीसी) सिस्टम में पूरी तरह बदलाव, थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग की शुरुआत, पूरे शहर के लिए कार-पूलिंग ऐप, इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सुधार और मशीनीकृत सड़क-सफाई उपकरणों की बड़े पैमाने पर तैनाती की घोषणा की।
- दिल्ली के पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट जारी करने के सिस्टम में बदलाव करने पर विचार कर रही है, क्योंकि मौजूदा सेंटर पुराने हो गए हैं और उनमें कई कमियां हैं। एक थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग सिस्टम लाया जाएगा।
- सिरसा ने दिल्ली के नागरिकों से भी सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि दिल्ली वालों से रिक्वेस्ट है कि वे पेट्रोल पंप या बॉर्डर और चेकपॉइंट पर अधिकारियों से बहस न करें। यह कदम आपकी सेहत और आपके बच्चों के भविष्य के लिए है। साथ ही, दिल्ली सरकार लाइव डेटा का इस्तेमाल करके ट्रैफिक जाम वाले हॉटस्पॉट की पहचान करने के लिए गूगल मैप्स और मैप इंडिया के साथ पार्टनरशिप पर भी विचार कर रही है।

