राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण ने इस बार सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद समेत पूरे एनसीआर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में एक्यूआई 450 से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि कुछ जगहों पर यह 500 के करीब पहुंच गया। प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति के चलते पूरा एनसीआर मानो गैस चैंबर में तब्दील हो गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट की मानें तो दिल्ली में पिछले दो वर्षों का सबसे ऊंचा जनवरी एक्यूआई दर्ज किया गया है और रिकॉर्ड के अनुसार यह जनवरी के दूसरे हिस्से में अब तक का सबसे खराब स्तर भी है। मौसम की बात करें तो पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी शांत हवाएं और घना कोहरा प्रदूषण के हालात को और बिगाड़ने की बड़ी वजह बने हैं।
दिल्ली की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बनी हुई है। राजधानी के लगभग सभी मॉनिटरिंग स्टेशनों पर एक्यूआई ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया। आनंद विहार में एक्यूआई 461, अशोक विहार में 471, बवाना में 442, चांदनी चौक में 454, जहांगीरपुरी में 468, रोहिणी में 471, विवेक विहार में 472 और वजीरपुर में 473 रिकॉर्ड किया गया। आईटीओ क्षेत्र में एक्यूआई 430, आर.के. पुरम में 439, सोनिया विहार में 467 और मंदिर मार्ग में 371 रहा। आईजीआई एयरपोर्ट टी-3 इलाके में भी एक्यूआई 339 दर्ज किया गया, जो खराब से गंभीर श्रेणी में आता है।
दिल्ली से सटे नोएडा और गाजियाबाद के हालात भी चिंताजनक हैं। नोएडा के सेक्टर-62 में एक्यूआई 375, सेक्टर-1 में 439 और सेक्टर-116 में 422 दर्ज किया गया। वहीं गाजियाबाद के इंदिरापुरम में एक्यूआई 433, लोनी में 476, संजय नगर में 389 और वसुंधरा में 457 रिकॉर्ड किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि एनसीआर के लगभग सभी शहर खतरनाक प्रदूषण की चपेट में हैं।
स्तिथि बिगड़ने की क्या वजहें?
मौसम की बात करें तो पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी शांत हवाएं और घना कोहरा प्रदूषण के हालात को और बिगाड़ने की बड़ी वजह बने हैं। प्रदूषण में सबसे ज्यादा योगदान दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सेक्टर का रहा, जिसकी हिस्सेदारी 12.5 प्रतिशत बताई गई है। इसके बाद गौतम बुद्ध नगर का योगदान 12 प्रतिशत और गाजियाबाद का 9.4 प्रतिशत रहा, जैसा कि डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के आंकड़ों में सामने आया है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, घने कोहरे और स्मॉग की मोटी परत ने पूरे एनसीआर को अपनी चपेट में ले रखा है। 19 जनवरी की सुबह घना कोहरा दर्ज किया गया और आने वाले दिनों में भी मध्यम कोहरे की संभावना जताई गई है। अधिक नमी और हवा की रफ्तार कम होने के कारण प्रदूषक वातावरण में ही फंसे हुए हैं, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि अनुमान के मुताबिक सोमवार से एक्यूआई में कुछ सुधार हो सकता है और हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी तक आ सकती है, लेकिन फिलहाल हालात गंभीर बने हुए हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रैप का चरण-4 लागू कर दिया गया है। इसके तहत दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की सख्त जांच की जा रही है, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर रोक लगाई गई है और निर्माण कार्यों पर कड़ी पाबंदी लागू है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौसम में बदलाव नहीं हुआ और तेज हवाएं नहीं चलीं, तो आने वाले दिनों में प्रदूषण और खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें, मास्क का इस्तेमाल करें और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर
एक्यूआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के सबसे प्रदूषित प्रमुख शहरों की सूची में दिल्ली पहले स्थान पर है। दिल्ली का एक्यूआई512 दर्ज किया गया, जो ‘खतरनाक’ श्रेणी में आता है और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम को दर्शाता है। इसके बाद पाकिस्तान का लाहौर 206 एक्यूआई के साथ दूसरे स्थान पर है, जहां हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ मानी गई है। तीसरे नंबर पर चीन का चोंगकिंग है, जिसका एक्यूआई 201 दर्ज किया गया।
सूची में भारत का कोलकाता भी शामिल है, जो 198 एक्यूआई के साथ चौथे स्थान पर रहा। इसके बाद चीन का चेंगदू (197), बांग्लादेश की राजधानी ढाका (192) और चीन का वुहान (184) आते हैं। आठवें स्थान पर बोस्निया हर्जेगोविना की राजधानी सारायेवो है, जहां एक्यूआई 177 दर्ज किया गया। वहीं चीन के हांगझोउ (167) और ग्वांगझोउ (159) भी टॉप-10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। ये आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि एशिया के कई बड़े शहर गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं।

