Friday, March 20, 2026
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अगर स्वच्छ हवा नहीं दे सकते तो एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करें, दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश देते हुए कहा है कि दिन में 21 हजार बार सांस लेते हैं, ऐसे में सोचिए कितना नुकसान कर रहे हैं।

नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार, 24 दिसंबर को दिल्ली में प्रदूषण संकट से निपटने में नाकाम रहे प्राधिकरणों को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है।

जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि यदि प्राधिकरण नागरिकों को स्वच्छ हवा मुहैया नहीं करा सकते तो कम से कम एयर प्यूरीफायर्स पर जीएसटी कम करना चाहिए। मौजूदा समय में एयर प्यूरीफायर्स पर 18 फीसदी जीएसटी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?

पीठ ने सुनवाई के दौरान सरकारी वकील से इस संबंध में निर्देश लेने और दोपहर ढाई बजे तक अदालत को रिपोर्ट देने को कहा है।

अदालत ने कहा “यह न्यूनतम कार्य है जो आप कर सकते हैं। हर नागरिक को स्वच्छ हवा की जरूरत है। यदि आप यह नहीं कर सकते तो कम से कम जीएसटी घटा सकते हैं। 15 दिनों के लिए अस्थायी छूट दें। इस स्थिति को आपातकाल की तरह लें। निर्देश लें और हमें अभी बताएं। हम इसे अवकाश के लिए रखेंगे लेकिन केवल अनुपालन के लिए। आप दिन में कितनी बार सांस लेते हैं? 21 हजार बार। आप अपने शरीर को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं जरा अनुमान लगाइए। हम ढाई बजे तक निर्देश चाहते हैं। हम इसे अवकाश के दौरान अनुपालन के लिए रखेंगे।”

अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें एयर प्यूरीफायर्स को ‘मेडिकल डिवाइस’ की श्रेणी में रखने की मांग की गई थी। इसके साथ ही इस पर जीएसटी 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने की बात की गई थी।

याचिका में क्या दलील दी गई?

इस मामले में अधिवक्ता कपिल मदान द्वारा याचिका दायर की गई थी। उन्होंने दलील दी थी कि दिल्ली में भीषण वायु प्रदूषण से उत्पन्न “अत्यंत गंभीर आपातकालीन स्थिति” को देखते हुए एयर प्यूरीफायर्स को लक्जरी की तरह नहीं लेना चाहिए।

याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा 2020 में जारी की गई अधिसूचना के तहत एयर प्यूरीफायर ‘मेडिकल डिवाइस’ की श्रेणी में आता है। इसलिए इस पर 18 फीसदी जीएसटी लगाना मनमाना, अनुचित और अनुपातहीन है।

गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली और आसपास के जिलों में वायु प्रदूषण के चलते गंभीर स्थिति बनी हुई है। बीते कई दिनों से दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के ऊपर बना हुआ है जो कि गंभीर स्थिति को दर्शाता है। दिल्ली में खराब स्थिति को देखते हुए ग्रैप-4 के तहत कुछ उपाय किए गए हैं।

हालांकि इन उपायों के बाद भी प्रदूषण गंभीर स्थिति में है जिससे लोगों को बेदह परेशानी हो रही है। लोग एयर प्यूरीफायर जैसे डिवाइस खरीदने को मजबूर हैं क्योंकि इतनी गंभीर श्रेणी की हवा में सांस लेना कई परेशानियों को दावत देने के समान है। ऐसे में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने के लिए क्या उपाय करती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

याचिका में एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी 128 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने की मांग की गई है। ऐसे में अगर यह लागू होता है तो उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।

अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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