नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (11 मार्च) को रिलायंस एंटरटेनमेंट स्टूडियोज प्राइवेट लिमिटेड और इसके अधिकारियों को टी-सीरीज के साथ वित्तीय मामले में अदालत के आदेश न मानने के लिए अवमानना का दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि यदि कंपनी 2 हफ्तों के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं करती तो अधिकारियों को 3 हफ्ते की सजा होगी।
जस्टिस मनमीन प्रीतम सिंह अरोड़ा ने फैसला सुनाया कि रिलाइंस एंटरटेनमेंट ने जानबूझकर अदालत के पूर्व के फैसलों का पालन नहीं किया है जिसमें उसे टी-सीरीज ब्रांड का संचालन करने वाली सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को बकाया भुगतान जमा करने के लिए कहा गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने रिलाइंस एंटरटेनमेंट को क्या आदेश दिया?
पीठ ने आदेश दिया कि कंपनी के तीनों प्रतिनिधियों को आदेश दिया कि यदि दो सप्ताह के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो उन्हें चार सप्ताह के साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
अदालत ने कहा कि ” उपरोक्त अवसर को सक्षम करने के लिए जेल की सजा 2 हफ्तों के लिए निलंबित रहेगी। हालांकि, प्रतिवादी संख्या 1 से 3 की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उन्हें 16.03.2026 को संयुक्त रजिस्ट्रार (न्यायालय) के समक्ष 1 लाख रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के लिए एक जमानती को प्रस्तुत करने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया जाता है। “
यह विवाद 2021 के एक ऋण समझौते से उपजा जिसमें टी-सीरीज ने रिलाइंस एंटरटेनमेंट को छह फिल्मों के आंशिक वित्तीय मदद के लिए 168 करोड़ रुपये उधार दिए थे। समझौते के तहत, टी-सीरीज को 12.5 प्रतिशत की दर से ब्याज और परियोजनाओं से होने वाले राजस्व में हिस्सेदारी का भी अधिकार था।
बाद में टी-सीरीज ने 60 करोड़ रुपये की वसूली के लिए रिलाइंस पर मुकदमा दायर किया। टी-सीरीज ने रिलाइंस पर भुगतान में चूक का आरोप लगाया। इस मामले में नवंबर और दिसंबर 2023 में हुई शुरुआती कार्यवाही के दौरान, हाई कोर्ट ने कंपनी की प्राप्तियों का खुलासा करने और स्वीकृत राशि जमा करने का निर्देश दिया था। इसमें जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड से अपेक्षित 7.42 करोड़ रुपये और आईबी-71 और भोला जैसी फिल्मों से राजस्व से जुड़े 2.32 करोड़ रुपये शामिल थे।
मामले पर विचार करने के बाद जस्टिस अरोड़ा ने कहा कि रिलायंस एंटरटेनमेंट दिसंबर 2023 में निर्धारित दो सप्ताह की समय सीमा के भीतर निर्देशों का पालन करने में विफल रही। हालांकि कंपनी ने मई 2025 में अंततः 2.33 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। अदालत ने माना कि देरी जानबूझकर निर्देशों का पालन न करने के बराबर है।
2 हफ्ते के भीतर बकाया राशि का करें भुगतान
अदालत ने यह भी कहा कि जी एंटरटेनमेंट की तरफ से किए गए भुगतानों के जरिए 7.42 करोड़ रुपयों से केवल 4.29 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई है। 3.13 करोड़ रुपये की राशि अभी भी बकाया है।
इसलिए अदालत ने आदेश दिया कि कंपनी और इसके अधिकारी दो हफ्तों के भीतर बकाया राशि ब्याज के साथ भुगतान करें। यदि भुगतान कर दिया जाता है तो जेल की सजा माफ कर दी जाएगी। नहीं तो तीनों अधिकारियों को चार हफ्तों की जेल की सजा होगी।
इस मामले में सुपर कैसेट्स की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल के साथ अन्य अधिवक्ता भी पेश हुए। इनमें हर्ष कौशिक, दर्पण सचेवा, सृष्टि मिश्रा, हर्ष प्रकाश, विनय त्रिपाठी और सक्षम ढींगरा शामिल थे।
वहीं, रिलाइंस एंटरटेनमेंट का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल, मालविका कपिला कालरा, तन्वांगी शुक्ला, जुनैद आमिर, हरबानी एस और अपूर्व जैन ने किया।

