नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार (13 जनवरी) को टिप्पणी की कि भले ही पीएम केयर फंड का संचालन या नियंत्रण सरकार द्वारा किया जाता हो, फिर भी सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई अधिनियम) के तहत निजता के अधिकार का हनन नहीं होगा।
दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 से प्राप्त निजता के अधिकार की बात नहीं कर रही है बल्कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के तहत तीसरे पक्ष को उपलब्ध अधिकार की बात कर रही है, जो व्यक्तिगत जानकारी के प्रकटीकरण पर रोक लगाता है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
दिल्ली हाई कोर्ट ने टिप्पणी की “भले ही वह राज्य हो, क्या केवल राज्य होने मात्र से ही वह निजता के अधिकार से वंचित हो जाता है? ऐसा कैसे कहा जा सकता है? केवल इसलिए कि वह कोई सार्वजनिक कार्य कर रही है, या सरकार द्वारा प्रबंधित, पर्यवेक्षित और नियंत्रित है, वह फिर भी एक कानूनी इकाई है। केवल इसलिए कि वह एक सार्वजनिक प्राधिकरण है, आप उसे प्रदत्त ऐसे अधिकार [निजता के अधिकार] से कैसे वंचित कर सकते हैं?”
मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत तीसरे पक्ष के बारे में जानकारी प्रदान करना प्रतिबंधित है और इस अधिनियम के अंतर्गत किसी सार्वजनिक या निजी ट्रस्ट के निजता अधिकारों में कोई अंतर नहीं हो सकता है।
पीएम केयर फंड द्वारा आयकर अधिनियम के तहत छूट प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत सूचनाओं और दस्तावेजों के खुलासे की मांग वाली अपील पर सुनवाई करते हुए पीठ ने ये टिप्पणियां कीं।
सूचना आयोग ने स्वीकार की याचिका
केंद्रीय सूचना आयोग ने याचिका स्वीकार कर ली और आयकर विभाग को मांगी गई जानकारी का खुलासा करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय के हालांकि एक एकल न्यायाधीश ने सीआईसी के निर्देश को रद्द कर दिया।
इससे पहले जनवरी 2024 में एकल न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि आयकर अधिनियम की धारा 138 के तहत दी गई जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अधिकार सीआईसी के पास नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आयकर अधिनियम की धारा 138 (2) सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई अधिनियम) की धारा 22 से ऊपर है।
आरटीआई आवेदक गिरीश मित्तल ने एकल न्यायाधीश के निर्देश के विरुद्ध खंडपीठ में अपील की। आज अधिवक्ता प्रणव सचदेवा ने मित्तल की ओर से मामले की पैरवी की। उन्होंने कहा कि पीएम केयर्स फंड आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के अंतर्गत दी गई छूट के दायरे में नहीं आता है और सरकार द्वारा स्थापित किसी सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट को इस कानून के तहत निजता का अधिकार नहीं हो सकता है।
सचदेवा ने आगे कहा कि आयकर अधिनियम की धारा 138 के तहत मिलने वाला संरक्षण पीएम केयर फंड पर लागू नहीं होगा, और यदि लागू भी होता है, तो उसे आरटीआई अधिनियम की धारा 22 द्वारा निरस्त कर दिया जाएगा।
उनकी दलील सुनने के बाद न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को तय की। जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन आयकर विभाग की ओर से दलीलें पेश करेंगे।

