नई दिल्ली: देश की राजधानी में प्रदूषण से निपटने के उपायों के तहत दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति 2026-2030 का विस्तृत मसौदा जारी किया है। इसमें पेट्रोल वाहनों पर चरणबद्ध प्रतिबंध, सख्त वाहन नियंत्रण नियम, ईवी अपनाने के लिए प्रोत्साहन और चार्जिंग बुनियादी ढांचे के व्यापक विस्तार जैसी बातें कही गई हैं। इस ड्राफ्ट के तहत दिल्ली में पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों सहित ऑटो वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के लिए एक निश्चित समयसीमा निर्धारित की गई है।
साथ ही दिल्ली में रजिस्ट्रेशन कराने पर सभी ईवी को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100 प्रतिशत छूट देने की भी बात कही गई। ड्राफ्ट के अनुसार 30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों को पूरी छूट और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड को 50 प्रतिशत छूट मिलेगी, जबकि 30 लाख से ऊपर की कारों को कोई छूट नहीं मिलेगी।
इसका लक्ष्य देश की राजधानी को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से ले जाना है। ड्राफ्ट में इसे लेकर एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। परिवहन विभाग के ईवी सेल द्वारा जारी किए गए इस मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले 30 दिनों में हितधारकों (नागरिकों और विशेषज्ञों) की प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है। इस नीति का उद्देश्य वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है। इसे दिल्ली में वायु प्रदूषण संकट के प्रमुख कारणों में गिना जाता है। विशेष रूप से सर्दियों में होने वाले स्मॉग के दौरान समस्या काफी बढ़ जाती है।
2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया होंगे पंजीकृत
मसौदे में कहा गया है कि 1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक तीन पहिया ही रजिस्टर होंगे। वहीं, 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया ही रजिस्टर किए जाएंगे। स्कूल बसों में भी ईवी का हिस्सा बढ़ाना अनिवार्य होगा। पहले 2 साल में 10 प्रतिशत, तीसरे साल 20 प्रतिशत, और 2030 तक 30 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है।
सरकारी विभागों में नई खरीदी जाने वाली सभी गाड़ियां इलेक्ट्रिक होंगी। दिल्ली परिवहन निगम की नई बसें भी इलेक्ट्रिक होंगी। वहीं, डिलीवरी और फ्लीट कंपनियों को 2026 से पेट्रोल-डीजल वाहनों को शामिल करने से रोका जाएगा। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया जाएगा। ट्रांसपोर्ट विभाग इस नीति को लागू करेगा और एक विशेष ईवी सेल बनाया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि यह ड्राफ्ट अचानक प्रतिबंध लगाने के बजाय चरणबद्ध बदलाव के लिहाज से तैयार किया गया है, जिससे उद्योग और ग्राहकों को इसके हिसाब से ढलने का समय मिल सके।
ईवी गाड़ियों को अपनाने के लिए सरकार करेगी प्रोत्साहित
ड्राफ्ट में कहा गया है कि नीति का मुख्य उद्देश्य ईवी अपनाने को बढ़ावा देना, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना, बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित करना और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता कम करना हैं।
लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से सरकार ईवी खरीदने पर सीधे बैंक खाते में सब्सिडी (डीबीटी) देगी। दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले साल 10,000 रुपये प्रति किलोवाट (अधिकतम 30,000 रुपये), दूसरे साल 6,600 रुपये (अधिकतम 20,000 रुपये) और तीसरे साल 3,300 रुपये (अधिकतम 10,000 रुपये) की सब्सिडी दी जाएगी।
ऐसे ही ई-ऑटो (तीन पहिया) के लिए पहले साल 50,000 रुपये, दूसरे साल 40,000 रुपये और तीसरे साल 30,000 रुपये की मदद दी जाएगी। छोटे इलेक्ट्रिक ट्रक (एन1) पर पहले साल 1 लाख रुपए, दूसरे साल 75,000 और तीसरे साल 50,000 रुपये तक का लाभ मिलेगा।
पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप के लिए भी प्रोत्साहन राशि
सरकार की ओर से पुरानी बीएस-IV या उससे नीचे की गाड़ी स्क्रैप करने पर भी प्रोत्साहन राशि दिया जाएगा। दोपहिया पर 10,000 रुपये, तीन पहिया पर 25,000 रुपये, कार पर 1 लाख रुपये (30 लाख तक की कीमत वाली, पहले 1 लाख लोगों तक) और एन1 ट्रक पर 50,000 रुपये मिलेंगे।
इसके अलावा दिल्ली में रजिस्ट्रेशन कराने पर सभी ईवी को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। 30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों को पूरी छूट और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड को 50 प्रतिशत छूट मिलेगी, जबकि 30 लाख से ऊपर की कारों के लिए कोई छूट नहीं होगी।
चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क बनेंगे
चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। यह संस्था प्लानिंग, लोकेशन तय करने और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। साथ ही एक डिजिटल पोर्टल और सिंगल विंडो सिस्टम भी बनाया जाएगा ताकि चार्जिंग स्टेशन लगाना आसान हो सके।
वाहन निर्माता कंपनियों को हर डीलरशिप पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाना होगा। इसमें 2-3 व्हीलर और 4 व्हीलर के लिए अलग-अलग चार्जिंग पॉइंट होंगे। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति बैटरी कलेक्शन सेंटर बनाने और सुरक्षित निपटान के लिए नियम तय करेगा। बैटरी ट्रैकिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा ताकि रीसाइक्लिंग और दोबारा उपयोग सुरक्षित तरीके से हो सके।
बताते चलें कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली में सर्दियों के दौरान 23 प्रतिशत प्रदूषण के लिए वाहन जिम्मेदार हैं। दिल्ली में दोपहिया वाहन कुल वाहनों का करीब 67 प्रतिशत हैं, इसलिए इन्हें तेजी से इलेक्ट्रिक में बदलना बेहद जरूरी माना गया है। इसके अलावा तीन पहिया, कमर्शियल कार, और छोटे मालवाहक वाहन (एन1) भी ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)
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