नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान में जारी जंग के बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद और तेज कर दी है। सामने आई जानकारी के अनुसार भारत के इस रूख के बाद चीन की ओर से जा रहे कई टैंकर अब भारत आ रहे हैं।
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से चला भारतीय झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर ‘जग लाडकी’ भी बुधवार को सुरक्षित भारत पहुंच गया। इसने गुजरात में अदाणी ग्रुप द्वारा संचालित मुंद्रा पोर्ट पर डॉक किया।
इस टैंकर में यूएई से प्राप्त लगभग 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल है। इसे फुजैराह बंदरगाह पर लोड किया गया था। फुजैराह बंदरगाह पश्चिम एशिया में मौजूद उन गिने चुने बंदरगाहों में से एक है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर है।
इससे पहले इसी हफ्ते शिवालिक और नंदा देवी दो जहाज भारत पहुंचे थे, जिनमें एलपीजी लदा हुआ था। दोनों होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचे थे। शिवालिक ने मुंद्रा पोर्ट पर डॉक किया था। जबकि नंदा देवी वडीनार पोर्ट पर डॉक किया था। दोनों में कुल 92,700 टन के करीब एलपीजी थे। इसमें शिवालिक में करीब 46000 और नंदा देवी में 47000 टन से ज्यादा एलपीजी थे।
चीन जा रहे टैंकर भारत की ओर मुड़े
दूसरी ओर अमेरिका के भारत द्वारा एक महीने तक रूसी तेल खरीदने पर आपत्ति नहीं जताने के वादे और बदले हालात के बीच नई दिल्ली ने कच्चा तेल की खरीद को बढ़ाने का फैसला किया है। यही वजह है कि रूस से चले कई टैंकर्स, जिनका निर्धारित गंतव्य स्थान चीन के पोर्ट्स थे, अब उन्होंने भारत का रुख किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल से लदा अफ्रामैक्स टैंकर एक्वा टाइटन इसी हफ्ते 21 मार्च को न्यू मैंगलोर पहुंचने वाला है। इसमें यूराल्स का कच्चा तेल है। जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से तेल लोड करने के बाद जहाज ने शुरू में चीन के रिझाओ को अपना गंतव्य निर्धारित किया था। हालांकि, मार्च के मध्य में अचानक अपना रास्ता बदलते हुए, जहाज दक्षिण चीन सागर में मुड़ गया और भारत की ओर बढ़ने लगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब अमेरिका दुनिया के सभी देश कों रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
एक हफ्ते में 3 करोड़ बैरल रूसी तेल की खरीद
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका से ग्रीन सिग्नल के बाद भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने अपनी कच्चे तेल की खरीद को बढ़ा दिया है और केवल एक हफ्ते में करीब 30 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल खरीद लिया है।
साथ ही रास्ता बदलने का मामला केवल एक टैंकर तक सीमित नहीं है। हाल के हफ्तों में रूसी तेल ले जाने वाले कम से कम सात जहाजों ने चीन से भारत की ओर अपना मार्ग बदल लिया है। एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सभी प्रमुख भारतीय रिफाइनर एक बार फिर रूसी कच्चे तेल खरीद रहे हैं, जिससे ऐसा लगता है कि भारत मॉस्को के लिए एक प्रमुख खरीदार के रूप में अपनी स्थिति फिर से हासिल कर रहा है। एक अन्य टैंकर, स्वेजमैक्स जूजू एन, भी भारत के सिक्का बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है और इसके 25 मार्च को पहुंचने की उम्मीद है।
यह जहाज कजाकिस्तान से सीपीसी ब्लेंड क्रूड तेल ले जा रहा है। इससे पहले यह रूस के काला सागर क्षेत्र में स्थित नोवोरोस्सियस्क से रवाना हुआ था। यह शुरुआत में रिझाओ जा रहा था, लेकिन मार्च की शुरुआत में इसने अपना रास्ता बदल लिया।
प्रतिबंधों में ढील को देखते हुए जापान और दक्षिण कोरिया समेत अन्य देशों ने भी रूसी तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी है। विश्लेषकों का कहना है कि कई खरीदारों की इस नई मांग से आने वाले हफ्तों में वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)

