नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता आनंद शर्मा ने पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार की कूटनीति की तारीफ की है। शर्मा का यह स्टैंड लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दिए बयान से बिल्कुल अलग हैं। आनंद शर्मा ने एक्स पर एक के बाद एक किए कई पोस्ट में पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को लेकर अपनी राय रखी। पूर्व राज्य सभा सांसद आनंद शर्मा अभी कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के भी सदस्य हैं।
आनंद शर्मा ने कहा कि ये चुनौतीपूर्ण समय है और देश की परीक्षा ले रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने संकट से निपटने में परिपक्व और कुशल कूटनीतिक रणनीति अपनाई है, जिससे संभावित खतरों से बचा जा सका है। शर्मा ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस समय राष्ट्रीय स्तर पर संवाद को जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय हित द्वारा निर्देशित परिपक्व प्रतिक्रिया समय की आवश्यकता है।
‘बड़ी चुनौती का हम कर रहे सामना’
आनंद शर्मा ने अपने पोस्ट में कहा कि भारत सहित वे सभी देश जो कच्चा तेल, गैस और एलपीजी के लिए मध्य-पूर्व और खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उन्होंने लिखा, ‘खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई पर खतरा है। हम इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकटों में से एक का सामना कर रहे हैं। यह मुश्किल समय हमारी नीतियों और कूटनीति दोनों की परीक्षा ले रहा है। भारत के खाड़ी देशों के साथ पुराने संबंध हैं और ईरान के साथ सांस्कृतिक रिश्ते भी हैं।’
उन्होंने लिखा कि तेल और गैस के अलावा, लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार, 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और विदेश से आने वाली लगभग 60 प्रतिशत कमाई (रेमिटेंस) भी ध्यान में रखना जरूरी है। इस संकट में भारत की कूटनीति समझदारी और संतुलन से भरी रही है, जिससे बड़े खतरों से बचाव हुआ है।
‘एकजुटता और समझदारी भरा रवैया जरूरी’
आनंद शर्मा ने अपने पोस्ट में कहा कि भारत की प्रतिक्रिया राष्ट्रीय एकता और सहमति के साथ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाकर उन्हें स्थिति और फैसलों की जानकारी दी है। यह बातचीत जारी रहनी चाहिए। इस समय देशहित में एकजुट और समझदारी भरा रवैया बहुत जरूरी है।
उन्होंने आगे लिखा कि इस युद्ध ने ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक सुरक्षा की समस्याओं को और बढ़ा दिया है। सप्लाई चेन में रुकावट, बाजारों में गिरावट और रुपये की कमजोरी जैसी चुनौतियां सामने हैं, जिनका तुरंत और लंबे समय तक समाधान करना होगा। इस संकट की गंभीरता को समझना जरूरी है।
आनंद शर्मा ने आगे लिखा कि दुनिया चुप नहीं रह सकती जब वैश्विक व्यवस्था और नियम टूट रहे हों। भारत हमेशा शांति और नैतिकता के लिए जाना जाता है। आज बहुत कुछ दांव पर लगा है, खासकर युवाओं का भविष्य। भारत को कोशिश करनी चाहिए कि वह ग्लोबल साउथ और अपने साझेदार देशों को साथ लेकर शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए काम करे।
आनंद शर्मा ने क्यों ली कांग्रेस से अलग लाइन?
पश्चिम एशिया संकट पर आनंद शर्मा के कांग्रेस से अलग लाइन लेने को लेकर आने वाले दिनों में कई तरह के अटकलें सुनने को मिल सकती हैं। दरअसल, आनंद शर्मा पिछले महीने भी कांग्रेस नेतृत्व पर बरसे थे। वे हिमाचल प्रदेश की एक मात्र राज्य सभा सीट को लेकर उन्हें नजरअंदाज करने पर नाराज थे।
आनंद शर्मा ने तब पार्टी हाई कमान पर निशाना साधते हुए कहा था कि ‘राजनीति में सच बोलना अक्सर एक दंडनीय अपराध माना जाता है।’ आनंद शर्मा की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस द्वारा एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए अनुराग शर्मा को नामित करने के बाद आई थी। तब अनुराग की उम्मीदवारी कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक थी, जिनमें आनंद शर्मा भी शामिल थे, जो कांग्रेस के टिकट के लिए रेस में थे और प्रमुख दावेदारों में शामिल थे।
अनुराग शर्मा दरअसल हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बेहद करीबी माने जाते हैं। राज्य सभा चुनाव में वे पिछले महीने निर्विरोध चुने गए।
बहरहाल, अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाए के बाद जब आनंद शर्मा से पूछा गया था कि क्या वे निराश हैं, तो कांग्रेस नेता ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा था, ‘निर्णय लेने वालों के पास अधिकार है और केवल वही इसका स्पष्टीकरण दे सकते हैं…इंदिरा गांधी जी के युग को देखने और राजीव गांधी, सोनिया जी, डॉ मनमोहन सिंह के साथ बहुत करीब से काम करने के बाद मैं एक बात कह सकता हूं कि अब मुझे लगता है कि आत्मसम्मान महंगा होता है। इसकी कीमत चुकानी पड़ती है और सच बोलना एक दंडनीय राजनीतिक अपराध बन गया है।’
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)

