नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (7 अप्रैल) को बताया कि देशभर के सभी पुलिस स्टेशनों में दो हफ्ते के अंदर सीसीटीवी कैमरे लग जाएंगे।
इस मामले में जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ सुनवाई कर रही थी। इस दौरान अटॉर्नी जनरल (एजी) आर वेंकटरामानी ने पीठ को आश्वासन दिया कि देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनके संचालन से संबंधित सभी लंबित और अनसुलझे मुद्दों का समाधान पखवाड़े भर के भीतर कर लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने क्या कहा?
केंद्रीय गृह सचिव सोमवार (6 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उसके समक्ष उपस्थित हुए। अदालत ने उन्हें मंगलवार को भी उपस्थित रहने के लिए कहा था ताकि देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना के कार्यान्वयन के संबंध में उनसे उचित सहायता प्राप्त की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर और उचित समन्वय के साथ काम करना चाहिए। इससे हिरासत में यातना को रोकने के लिए सभी पुलिस स्टेशनों में कैमरे लगाने के अपने 2020 के फैसले का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट के 2020 के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, पुलिस स्टेशनों के प्रवेश और निकास बिंदुओं, लॉक-अप, गलियारों और स्वागत क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए। कैमरों में नाइट विजन, ऑडियो रिकॉर्डिंग और कम से कम 1 वर्ष का डेटा होना अनिवार्य है।
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नियमों का पालन न होने की सूचना मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जवाबदेही, पारदर्शिता बढ़ाने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के उद्देश्य से यह फैसला सुनाया।
अदालत ने लिया था स्वतः संज्ञान
4 सितंबर, 2025 को अदालत ने विभिन्न राज्यों के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कार्यशील स्थिति न होने के संबंध में जनहित में स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। इस दौरान अदालत ने एक राष्ट्रीय दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया। इसमें बताया गया था कि उस वर्ष के अंतिम सात से आठ महीनों में पुलिस हिरासत में लगभग 11 लोगों की मौत हुई थी।
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इससे पहले दिसंबर 2020 में शीर्ष अदालत ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि उनके अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।

