विचार-विमर्श

राज की बातः जब बीजू पटनायक ने इंटरव्यू खत्म होते ही पत्रकार को बीच हाईवे पर उतार दिया

बीजू पटनायक पत्रकारों का सम्मान भी करते थे। एक बार सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वे नई उद्योग…

12 months ago

खबरों से आगे: तवी आरती- जम्मू की गिरती अर्थव्यवस्था में जान डालने की एक पहल

तवी आरती जम्मू की अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण तरीके से पुनर्जीवित करने की कोशिशों में एक बहुत छोटा कदम है। इसके…

12 months ago

राज की बातः जब डीएम और एसपी भी चुनाव में गोली बारी से भाग जाते थे

मुंगेर जिले के एक विधानसभा क्षेत्र में चुनाव हो रहा था। राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री भी वहीं से थे। उन्होंने…

12 months ago

कातते-बुनतेः ‘रूह-अफजा’ के शिल्‍प में विकृतों का नाच

रूह-अफ़ज़ा... सुनने में ही रस दे देता है। पीने की जरूरत ही नहीं। परवीन शाकिर याद आ गईं- ‘’उसने जलती…

12 months ago

खबरों से आगे: केजरीवाल जैसी उमर अब्दुल्ला की स्थिति! नेशनल कॉन्फ्रेंस नहीं स्वीकार कर पा रही सच्चाई

जम्मू-कश्मीर में एलजी मनोज सिन्हा और उमर अब्दुल्ला सरकार के बीच तनातनी बढ़ने लगी है। अब्दुल्ला जो 2014 के अंत…

12 months ago

राज की बातः भैरों सिंह शेखावत ने जब राज्यपाल को चेताया- ‘एक पांव कब्र में है, ऊपर जा कर क्या जवाब दोगे?’

मुख्यमंत्री रहते हुए शेखावत ने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। 16 फरवरी 1995 को जयपुर के सी-स्कीम इलाके से…

12 months ago

कातते-बुनते: मनोज कुमार के बहाने रचना-समय की दो विडंबनाएं

मनोज कुमार एक किस्‍म की पहचान के प्रतिनिधि हैं, जहां रचे हुए का कोई सामयिक मूल्‍य तो नहीं है फिर…

1 year ago

खबरों से आगे: कठुआ-हीरानगर सीमा क्षेत्र से क्यों लगातार जारी है आतंकियों की घुसपैठ?

कठुआ-हीरानगर सीमा क्षेत्र पाकिस्तान की ओर से आतंकवादियों की घुसपैठ के लिए कुख्यात है। दक्षिण का इलाका नरोवाल (पाकिस्तान) का…

1 year ago

राज की बातः बिहार जहां गांधी मैदान और पटना जंक्शन को गिरवी रख दिए गए लोन

पटना नागरिक बैंक की स्थापना 50 साल पहले की गई थी। बैंक प्रारंभ से ही विवादों में रहा। विधान सभा…

1 year ago

कातते-बुनतेः ‘आकांक्षी’ बेरोजगारों से एक सवाल, सुरेश चाहिए या कुणाल?

लोक अब बदल चुका है। पुराने वाले लोक में सांसारिक और नैतिक आकांक्षा को सार्वजनिक पेशे एक साथ आश्‍वस्‍त करते…

1 year ago