इन दिनों भारतीय राजनीति में जवाहरलाल नेहरू लगातार चर्चा में हैं। लेकिन इतिहास के रूप में नहीं, आरोपों के रूप…
कभी-कभी कोई जगह हमें खींचकर अपने अतीत में ले जाती है! इतिहास की किताबें नहीं, बल्कि हवा, सड़कें और दीवारें…
इस बार राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा आयोजित विश्व पुस्तक मेला पुस्तक प्रेमियों की बढ़ती भागीदारी, बाज़ार और बिक्री के विस्तार,…
अशोक तिवारी की कविताओं के संग्रह हलफ़नामा से गुज़रना, दरअसल अपने और अपने जैसे असंख्य लोगों से मुलाक़ात करने जैसा…
सात फेरों के सातों वचन प्यारी दुल्हनियां भूल न जाना.... ’घर द्वार’ फिल्म का यह गाना बड़ा उलझा देता था।…
साल 1956 में एक फ़िल्म आई— बसंत बहार, जिसका यह गीत है। शैलेन्द्र का लिखा, शंकर–जयकिशन का बनाया, पर जिसमें…
रचनाकार का स्वप्न क्या होता है और उसे कैसा होना चाहिए? हमारे एक पुरोधा लेखक मम्मट ने काव्य यानी साहित्य…
जैसे ही आप तमिलनाडु के चेट्टीनाड इलाके में कदम रखते हैं, विशेष रूप से कराईकुडी और आसपास के गांवों जैसे…
‘पहल’ की साहित्यिक पत्रकारिता के महत्व और उसमें ज्ञानरंजन की भूमिका की चर्चा बहुत होती है, कहानीकार ज्ञानरंजन की कम।…
थोड़ी देर लगता रहा जैसे कोशिश करके, खींचकर भी उतनी लंबी साँस ली ही नहीं जा रही,जितनी चाहिए। छोटी छोटी…