कला-संस्कृति

दृश्यम: आदमकद नेहरू- डर, प्रतिरोध और रंगमंच की राजनीति

इन दिनों भारतीय राजनीति में जवाहरलाल नेहरू लगातार चर्चा में हैं। लेकिन इतिहास के रूप में नहीं, आरोपों के रूप…

2 months ago

विरासतनामा: तमिल तट पर बिखरे डैनिश साम्राज्य के निशान- थरंगमबड़ी की अनूठी विरासत

कभी-कभी कोई जगह हमें खींचकर अपने अतीत में ले जाती है! इतिहास की किताबें नहीं, बल्कि हवा, सड़कें और दीवारें…

3 months ago

विश्व पुस्तक मेला 2026: पाठक, लेखक और रचनात्मकता का संगम

इस बार राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा आयोजित विश्व पुस्तक मेला पुस्तक प्रेमियों की बढ़ती भागीदारी, बाज़ार और बिक्री के विस्तार,…

3 months ago

पुस्तक समीक्षाः महिलाओं का सच हलफ़नामा में दर्ज

अशोक तिवारी की कविताओं के संग्रह हलफ़नामा से गुज़रना, दरअसल अपने और अपने जैसे असंख्य लोगों से मुलाक़ात करने जैसा…

3 months ago

थार की कहानियांः मारवाड़ में विवाह में होते है चार फेरे

सात फेरों के सातों वचन प्यारी दुल्हनियां भूल न जाना....  ’घर द्वार’ फिल्म का यह गाना बड़ा उलझा देता था।…

3 months ago

एक गीत: जब शास्त्र और सिनेमा दोनों ने एक साथ गाया-केतकी, गुलाब, जूही

साल 1956 में एक फ़िल्म आई— बसंत बहार, जिसका यह गीत है। शैलेन्द्र का लिखा, शंकर–जयकिशन का बनाया, पर जिसमें…

3 months ago

स्मृतियों से आलोचना तक- एक आलोचक का स्वप्न

रचनाकार का स्वप्न क्या होता है और उसे कैसा होना चाहिए? हमारे एक पुरोधा लेखक मम्मट ने काव्य यानी साहित्य…

3 months ago

विरासतनामा: चेट्टीनाड हवेलियाँ- चेट्टियार व्यापारियों के इतिहास का जीवंत दस्तावेज

जैसे ही आप तमिलनाडु के चेट्टीनाड इलाके में कदम रखते हैं, विशेष रूप से कराईकुडी और आसपास के गांवों जैसे…

3 months ago

स्मरण: ज्ञानरंजन की कहानियां- साठोत्तरी बेचैनी का संजीदा खिलंदड़ापन

‘पहल’ की साहित्यिक पत्रकारिता के महत्व और उसमें ज्ञानरंजन की भूमिका की चर्चा बहुत होती है, कहानीकार ज्ञानरंजन की कम।…

3 months ago

कहानीः झील सूख रही है

थोड़ी देर लगता रहा जैसे कोशिश करके, खींचकर भी उतनी लंबी साँस ली ही नहीं जा रही,जितनी चाहिए। छोटी छोटी…

3 months ago