हिंदी के जाने-माने कवि और लेखक लीलाधर मंडलोई ने बहुत सख़्त जीवन जिया है। हालांकि एक तरह से देखें तो…
"कभी मैं हर घर की जरूरी चीज हुआ करता था। हर गुड़ाल और कोटड़ी मुझसे ही रंगीन होती थी। सर्दियों…
'क्रेजी किया रे!', नाटक यूनिवर्सिटी थिएटर के द्वारा 21 नवंबर 2025 को स्वराज विद्यापीठ, प्रयागराज में प्रस्तुत किया गया। यूनिवर्सिटी…
कमलेश्वर हिंदी साहित्य के उन विरले रचनाकारों में थे जिनके लिए लेखन किसी एक विधा की सीमाओं में बंधा कर्म…
अंडमान और निकोबार सिर्फ बंगाल की खाड़ी में स्थित सुंदर उष्णकटिबंधीय द्वीप नहीं हैं। ये दक्षिण एशिया के इतिहास का…
अपनी किताब ‘नो फ़ुल स्टॉप्स इन इंडिया’ के पहले पन्ने पर मार्क टली ने लिखा— ‘पत्रकारों का सबसे बड़ा मोह यह होता…
पिछले पच्चीस–तीस वर्षों के हिन्दी कथा-साहित्य पर गौर करें तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि कहानियाँ अपेक्षाकृत लंबी होती…
कभी हम उस शख्स से अचानक मिल जाते हैं जिससे मिलने की उम्मीद वर्षों से पाले हुए हों...कभी सोचो तो…
“आदमी अपनी स्मृतियों का ग़ुलाम होता है। ख़ासकर जब वह स्मृति जब किसी सदमे का रूप लेकर आत्मा पर कभी…
अप्रैल 2015 की बात है। अखबारों में खबर आई कि जनरल हणुत सिंह का देहांत हो गया है। मैंने भी…