कला-संस्कृति

पुस्तक समीक्षा: ज़िंदगी की आग भी ज़िंदगी का राग भी

हिंदी के जाने-माने कवि और लेखक लीलाधर मंडलोई ने बहुत सख़्त जीवन जिया है। हालांकि एक तरह से देखें तो…

2 months ago

थार की कहानियां: पट्टूड़ा- मारवाड़ की ओढ़ी हुई विरासत

"कभी मैं हर घर की जरूरी चीज हुआ करता था। हर गुड़ाल और कोटड़ी मुझसे ही रंगीन होती थी। सर्दियों…

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दृश्यमः दिखावे का लोकतंत्र और पहचान का संकट- क्रेजी किया रे!

'क्रेजी किया रे!', नाटक यूनिवर्सिटी थिएटर के द्वारा 21 नवंबर 2025 को स्वराज विद्यापीठ, प्रयागराज में प्रस्तुत किया गया। यूनिवर्सिटी…

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स्मरण: संपादक, कथाकार, विद्रोही- कमलेश्वर का बहुस्तरीय लेखन

कमलेश्वर हिंदी साहित्य के उन विरले रचनाकारों में थे जिनके लिए लेखन किसी एक विधा की सीमाओं में बंधा कर्म…

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विरासतनामा: अंडमान-निकोबार: औपनिवेशिक सत्ता, समाज की निर्मिति और पुनर्वास का छलावा

अंडमान और निकोबार सिर्फ बंगाल की खाड़ी में स्थित सुंदर उष्णकटिबंधीय द्वीप नहीं हैं। ये दक्षिण एशिया के इतिहास का…

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स्मरणः निष्पक्षता की वह आवाज़- मार्क टली

अपनी किताब ‘नो फ़ुल स्टॉप्स इन इंडिया’ के पहले पन्ने पर मार्क टली ने लिखा— ‘पत्रकारों का सबसे बड़ा मोह यह होता…

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कथा प्रांतर-7: उपेक्षा का अपराध: आह लेकिन कौन जाने…

पिछले पच्चीस–तीस वर्षों के हिन्दी कथा-साहित्य पर गौर करें तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि कहानियाँ अपेक्षाकृत लंबी होती…

2 months ago

अनिकेतः जिसको हो दीनो-दिल अज़ीज़ उसकी गली में जाए क्यों!

कभी हम उस शख्स से अचानक मिल जाते  हैं जिससे मिलने की उम्मीद वर्षों से पाले हुए हों...कभी सोचो तो…

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पुस्तक समीक्षाः स्मृतियों के गोदने

“आदमी अपनी स्मृतियों का ग़ुलाम होता है। ख़ासकर जब वह स्मृति जब किसी सदमे का रूप लेकर आत्मा पर कभी…

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थार की कहानियां: शक्ति और भक्ति की अद्भुत मिसाल- संत जनरल हणुत सिंह

अप्रैल 2015 की बात है। अखबारों में खबर आई कि जनरल हणुत सिंह का देहांत हो गया है। मैंने भी…

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