कला-संस्कृति

थार की कहानियां: रैग्स टू रिचेस: बाड़मेर में तेल का खेल और सिस्टम की सच्चाई

पाल साहब सुबह 6 बजे मालाणी एक्सप्रेस से बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर उतरे। जय सिंह बाहर ही खड़े थे उनके…

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पुस्तक समीक्षा: ‘उसने बुलाया था’, रोमांच से भरी अपराध कथा जहां हर मोड़ पर खुलते हैं नए रहस्य

आम तौर पर यही माना जाता है कि कोई जिस विधा में पारंगत होता है, उसमें ही अपना हाथ आजमाता…

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दृश्यम: जिंदगी के दुस्वप्न और अंधेरे

कहानियों में एक अद्भुत ताकत होती है। वो किसी एक देश या समाज में जन्म लेती हैं और फिर कहीं…

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विरासतनामा: सरायों के साए में- दिल्ली के सफरनामे के निशान

दिल्ली सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि इतिहास की एक ऐसी किताब है जिसके हर पन्ने पर वक्त की गहरी छाप…

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चिठिया हो तो हर कोई बांचे…

अंतोन चेख़व का मैक्सिम गोर्की के नाम पत्र याल्टा, 3 जनवरी, 1899 प्रिय मैक्सिम,मैंने तुम्हारी कहानियाँ पढ़ी हैं। तुम्हमें प्रतिभा…

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पुस्तक समीक्षाः आधी पंक्ति उस वर्जित सत्य की कविता है जिसे सहेजना इस दौर में सबसे मुश्किल काम है

समकालीन हिंदी कविता के इस शोर-भरे कोलाहल में, जहाँ हर दूसरी आवाज अपनी मौजूदगी का विज्ञापन करने में जुटी है,…

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थार की कहानियां: राजस्थान का खजुराहो- किराडू मंदिरों की गाथा

जैसलमेर विश्व मानचित्र पर अपना अलग स्थान रखता है। यहां पर देसी ही नहीं विदेशों से हर वर्ष लाखों पर्यटक…

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दृश्यम: ये आधुनिक बुंदेली लोक है

लोक के बारे में आम धारणा है कि वो आधुनिक से अलग होता है। और आधुनिक के बारे में भी…

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कथा-अकथा: मनुष्य के भीतर का मौन भूकम्प- आत्महत्या

‘बचपन में एक गुब्बारा हाथ में थामे एक सड़क पर दौड़ता हुआ जा रहा था। मैं बहुत खुश और मगन…

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कहानीः अबे साले तुम लोग…

फर्ज करो कि तुमने कोई जुर्म नहीं किया हो लेकिन उसकी सजा तुम काट रही हो। और तुम सोचती रहो…

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