लेबनानी-अमेरिकी लेखक और कवि की आज पुण्यतिथि (10 अप्रैल, 1931) है। प्रेम और दोस्ती पर तो उन्होंने इतना कुछ और…
10वां 'आशीर्वाद राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव बेगूसराय', की चर्चा दिनकर कला केंद्र और उसके सामने की चाय की दुकान के बिना…
टीले वैसे भी स्वाभाविक रूप से एक ऊँचाई प्रदान करते हैं, जिससे सांसारिक मोह से अलगाव पैदा होता है, जो…
सुपरिचित कथाकार आशुतोष की कहानी ‘फिर पंचलाइट’ फणीश्वरनाथ रेणु की कालजयी कहानी ‘पंचलाइट’ की पुनर्रचना है। मूल कहानी से रिश्ता…
'यायावरी-आवारगी' शृंखला के तहत 'आजादी: मेरा ब्रांड' के बाद 'लोग जो मुझमें रह गये' अनुराधा बेनीवाल की दूसरी पुस्तक है।…
तेनजिंग नोर्गे ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दार्जिलिंग में बिताया। दार्जिलिंग उनके लिए न केवल एक घर था,…
अपनी प्रचलित और लोकप्रिय छवि के विपरीत निर्मल वर्मा यहां अपने 'घर' को लौटते हुए मुसाफ़िर की तरह दिखाई देते…
एक बच्ची के कहीं फेंके जाने की घटना से यह फ़िल्म शुरू होती है और उसके बाद धीरे-धीरे निर्देशक और…
साहित्यकार कमल किशोर गोयनका का मंगलवार सुबह निधन हो गया। 87 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। मुंशी…
अपने अतीत और वर्तमान के साथ सामंजस्य बिठाती 'कालका-शिमला रेलवे' आज भी उतना ही नई लगती है, जितनी पुरानी है।…