कला-संस्कृति

रचनाकार का स्वप्नः डर से मुक्ति

सपने इंसान की जिंदगी का अहम हिस्सा होते हैं। सपने देखना और उन्हें मुकम्मल करने की कोशिश ही इंसान को…

12 months ago

विरासतनामा: ‘धरोहरों के पहरेदार- जो गायब भी हैं, हाजिर भी’

तमाम संरक्षक संस्थाओं ने दुनियाभर में फैले धरोहरों के बचाव, रख रखाव और प्रचार के लिए खूब काम किया है…

12 months ago

‘कोई जिंदगी बेमतलब’‌

वरिष्ठ लेखिका अलका सरावगी के दो कहानी संग्रह और आठ उपन्यास प्रकाशित हैं। अन्य बहुत सारे पुरस्कारों के अलावे उनके…

12 months ago

पुस्तक समीक्षा: छूटते हुए टूटते हुए लोगों की कहानी

सविता पाठक का पहला उपन्यास -'कौन से देस उतरने का' गांवों से शहर की ओर रोजी-रोटी रोजगार की तलाश में…

12 months ago

बोलते बंगले: उदासी देश के पहले ‘सेलिब्रेटी योग गुरु’ धीरेन्द्र ब्रह्मचारी के बंगले में

धीरेन्द्र ब्रहमचारी की पहुंच उस दौर में प्रधानमंत्री आवास 1 सफदरजंग रोड तक थी। यह सारा देश जानता था। वे…

12 months ago

दृश्यम: अदृश्य होते हैं पिता के आँसू

अडॉलेसॅन्स हर बढ़ते हुये बच्चे के मां-बाप के लिए एक जरूरी फिल्म है। यह फिल्म रिश्तों, संवेदनाओं, परिवार, किशोर वय…

12 months ago

विरासतनामा: धौलाधार के साए में छुपे धरोहर- परागपुर और गरली गाँव

यह भी शाश्वत सत्य है कि घर, मोहल्ले, स्कूल, चौक सिर्फ़ जगहें और चारदीवारी नहीं होते बल्कि अपने आप में…

12 months ago

पुस्तक समीक्षा: ‘अन्य कहानियाँ तथा झूठ’- फर्स्ट हैंड एक्सपीरियंस की कहानियाँ

सुपरिचित कथाकार और संपादक कुणाल सिंह के पास स्मृतियाँ हैं, किस्से हैं, सपने हैं, फंतासियाँ हैं और जबरदस्त पठनीयता भी।…

12 months ago

कालजयी: ‘परती-परिकथा’ की ताजमनी- राजेंद्र यादव

फणीश्वर नाथ रेणु की अमर कृति ‘परती परीकथा’ पर केन्द्रित राजेन्द्र यादव का यह आलेख, ‘कल्पना’, मार्च, 1959 में प्रकाशित…

12 months ago

बोलते बंगले: दिल्ली में 70 एकड़ में फैले विशाल आशियाने की कहानी जहां रहते थे पीआरएस ओबरॉय

पृथ्वीराज सिंह ओबरॉय को भारत के होटल और टुरिज्म सेक्टर के प्रथम पुरुष का दर्जा दिया जा सकता है। दिल्ली…

12 months ago