कला-संस्कृति

दृश्यमः फिल्मों के आईने में ‘इच्छामृत्यु’ का प्रश्न

मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है, लेकिन कैसी मृत्यु? यह प्रश्न हमेशा से मनुष्य को परेशान करता रहा है। जब…

3 weeks ago

विरासतनामाः मोतियों और शिकार से आगे भी थी भारत की रियासतों की कहानी

भारत में जब भी किसी पुराने राजमहल में होलिका दहन, दशहरा, शस्त्र पूजन या दस्तारबंदी जैसी परंपराएँ निभाई जाती हैं,…

4 weeks ago

कहानीः गैंगरीन

मेरे दादा बताते थे कि उन के दादा को मगरमच्छ ने काट लिया था। ये तब की बात है जब…

4 weeks ago

इतिहास की पीड़ा और सिनेमा की संवेदना: ऋत्विक घटक का रचनात्मक संसार

भारतीय सिनेमा का इतिहास केवल मनोरंजन, चमक-दमक और लोकप्रियता की कथा नहीं है; वह भारतीय समाज के बदलते सांस्कृतिक परिदृश्य,…

4 weeks ago

दृश्यम: प्रेम के रूप अनेक

जिसे प्रेम, इश्क या मोहब्बत कहते हैं उसके कई रूप हैं। इसलिए अलग अलग वक्त में कवियों, शायरों, नाटककारों और…

1 month ago

कथा-अकथा: यह किसका लहू है, कौन मरा?

यदि इसे महागाथा की तरह देखें तो यह कुरुक्षेत्र का आधुनिक संस्करण है, जहाँ रथों की जगह ड्रोन हैं, और…

1 month ago

विरासतनामा: अतीत को मिटाने की नहीं, अपनाने की जरूरत

दिल्ली के दिल कहे जाने वाले लुटियंस ज़ोन में बसी सरकारी कोठियाँ, उसके बुलेवार्ड, उसकी सड़कें, ये सब सिर्फ प्रशासनिक…

1 month ago

कालजयीः न्याय, अनुताप और आत्म-परीक्षण

मैं नहीं जानता कि मैं तोल्स्तोय के इस उपन्यास पर ऐसा क्या कह सकूँगा जो आपकी निगाह में नया या…

1 month ago

पुस्तक समीक्षाः मिनी और अन्य कहानियां

आलोचक नामवर सिंह ने एक बार कहा था, कहानी का दुर्भाग्य है कि वह मनोरंजन के रूप में पढ़ी जाती…

1 month ago

थार की कहानियां: रावल मल्लीनाथ और मालाणी का इतिहास

मालाणी एक्सप्रेस, मालाणी नस्ल के घोड़े, मालाणी पट्टू, गुड़ामालाणी, मालाणी के परगने, मालाणी हिल्स, मालाणी क्षेत्र आदि...  आखिर यह मालाणी…

1 month ago