कला-संस्कृति

कथा प्रांतर-9: पितृसत्ता की संरचना में दरार

“कहानी में एक यथार्थ जो जैसा देखा, वैसे ही रचा गया है। उस पर किसी इच्छित या वांछित यथार्थ का…

2 weeks ago

कहानीः दो घंटे का मुसलमान

पिछले दो सालों में यह दसवां शहर है, जहां मैं आशियाना तलाशने की कोशिश कर रहा हूं। एक सुरक्षित आशियाना।…

2 weeks ago

पुस्तक समीक्षाः स्त्रीसूक्त- एक रचनात्मक अंतर्दृष्टि

इन दिनों आधुनिक समीक्षा ने कई चीजों को लेकर लकीर खींची है। पहली बात तो यह देखे जाने का चलन…

2 weeks ago

थार की कहानियां: ‘जीरो जीव रो बैरी है…’, जीरे की खेती और चुनौतियां

"जय माताजी री सा, क्या हाल चाल है ?"कोटड़ी में प्रवेश करते हुए जबर सिंह ने कहा। "जय माता जी…

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दृश्यमः भारत रंग महोत्सव का दुखद अवसान

भारत रंग महोत्सव का सूर्य अब अस्ताचल की ओर है। यह एक ऐसा अवसान है जो किसी प्राकृतिक चक्र का…

3 weeks ago

विरासतनामा: भूली हुई रियासती विरासत- जब राजाओं ने गढ़े सर्वसमाज के लिए संस्थान

पिछले लेख में हमने भारत की रियासतों के इतिहास को उन सामान्य धारणाओं से आगे जाकर देखने की कोशिश की…

3 weeks ago

क्या ममता कालिया को ‘साहित्य अकादमी सम्मान’ पहले मिल जाना चाहिए था?

हम भोपाल में थे- संभवतः विश्व रंग के कार्यक्रम में। रात गपशप के बाद ऊपर से उतरते हुए अचानक ममता…

3 weeks ago

स्मरण: एक निर्वासित गंगापुत्र- राही मासूम रज़ा

आज यानी 15 मार्च को राही मासूम रज़ा की पुण्यतिथि है।15 मार्च 1992 को 64 वर्ष की आयु में बंबई…

3 weeks ago

पुस्तक समीक्षा: स्त्री जीवन का मायालोक और प्रतिकार की कविता

मैं स्त्रियों द्वारा लिखी कविताओं को, कविता पढ़ने की अपनी स्वाभाविक ललक के अलावा इस आतुरता से भी पढ़ता हूँ…

3 weeks ago

थार की कहानियां: ‘थार नहीं, यह तो मालाणी है’

बाड़मेर में थार महोत्सव शुरू हो गया है। जनता आदर्श स्टेडियम में विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आनंद लेने…

3 weeks ago