Friday, March 20, 2026
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कनाडा में भारतीय मूल के कारोबारी की हत्या, लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए क्या दावा किया है?

माना जा रहा है कि यह एक टारगेटेड शूटिंग (सुनियोजित हमला) थी। जांच में सामने आया कि सहसी की कार में बैठते ही एक व्यक्ति ने उन पर फायरिंग की और फिर मौके से भाग निकला।

कनाडा में भारतीय मूल के 68 वर्षीय व्यवसायी दर्शन सिंह साहसी की सोमवार सुबह उनके घर के बाहर कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई। दर्शन सिंह सहसी पंजाब के लुधियाना के रहने वाले थे और ‘कैनम इंटरनेशनल’ नाम की कपड़ों की रीसाइक्लिंग कंपनी के अध्यक्ष थे।

माना जा रहा है कि यह एक टारगेटेड शूटिंग (सुनियोजित हमला) थी। जांच में सामने आया कि सहसी की कार में बैठते ही एक व्यक्ति ने उन पर फायरिंग की और फिर मौके से भाग निकला।

लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ने ली जिम्मेदारी

रिपोर्टों के अनुसार, इस लक्षित गोलीबारी की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट ने ली है। ढिल्लों के नाम से किए इस दावे का एक पोस्ट भी वायरल हो रहा है। लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े गोल्डी ढिल्लों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में दावा किया गया कि यह हत्या साहसी द्वारा फिरौती देने से इनकार करने की वजह से की गई।

ढिल्लों ने आरोप लगाया कि सहसी नशा तस्करी से जुड़े थे और उन्होंने गिरोह की ओर से मांगी गई रकम देने से इनकार कर उनका नंबर ब्लॉक कर दिया था।

वायरल हो रहे पोस्ट में लिखा गया, “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह। मैं गोल्डी ढिल्लों, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ, यह घोषणा करता हूं कि 27 अक्टूबर 2025 की सुबह 9:30 बजे एबॉट्सफोर्ड में दर्शन सिंह साहसी की हत्या की जिम्मेदारी मैं लेता हूं। यह व्यक्ति नशे (चिट्टा) का बड़ा कारोबार करता था। जब हमने उससे पैसे की मांग की, तो उसने हमारे साथ अहंकार और चुनौतीपूर्ण व्यवहार किया। हमारी कॉल्स और मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया और फिर हमें ब्लॉक कर दिया। इसी वजह से हमें यह कार्रवाई करनी पड़ी। अब आगे से अगर कोई भी व्यक्ति हमारे साथ धोखा या चालाकी करने की कोशिश करेगा, उसका भी यही अंजाम होगा।”

फायरिंग के बाद आसपास के स्कूलों में अस्थायी लॉकडाउन लगा दिया गया। एबॉट्सफोर्ड पुलिस की गश्ती टीम तुरंत मौके पर पहुंची और इलाके को सील कर दिया। पुलिस को सहसी अपनी कार में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले, जिन्हें मौके पर मृत घोषित कर दिया गया। बाद में इस मामले में हत्या की जांच शुरू की गई।

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि हमलावर पास की सड़क पर खड़ी कार में पहले से छिपा हुआ था। जैसे ही सहसी अपनी कार में बैठे, उस पर गोलियां चला दी गईं।

कौन थे दर्शन सिंह साहसी?

दर्शन सिंह साहसी मूल रूप से पंजाब के दोराहा के पास स्थित राजगढ़ गांव के एक ईंट भट्ठा मालिक थे। उन्होंने 1991 में कनाडा के वैंकूवर में बसने का फैसला किया। वह आगे चलकर एक कामयाब कारोबारी और समाजसेवी बने। वे कैनम इंटरनेशनल के प्रमुख थे, जिसे दुनिया की अग्रणी कपड़ा पुनर्चक्रण कंपनियों में से एक माना जाता है।

कनाडा जाने से पहले उनके गुजरात के कांडला में एक प्लांट और हरियाणा के पानीपत में एक रीसाइक्लिंग सुविधा थी।

दर्शन सिंह साहसी अपनी उदारता और सामुदायिक कार्यों के लिए जाने जाते थे। वे पंजाबी साहित्यिक और सांस्कृतिक हलकों से गहराई से जुड़े हुए थे। साल 2012 से वे लुधियाना की पंजाबी साहित्य अकादमी के संरक्षक रहे और पंजाबी भाषा व संस्कृति को बढ़ावा देने में उनका बड़ा योगदान माना जाता है।

कनाडा में ‘आतंकी संगठन’ घोषित है बिश्नोई गिरोह

गौरतलब है कि कनाडा सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह को ‘आतंकी इकाई’ घोषित कर चुका है। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इस गिरोह की संपत्तियां जब्त करने, फंडिंग रोकने और गिरोह के सदस्यों पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत कार्रवाई करने जैसी महत्वपूर्ण शक्तियाँ मिल गई हैं।

हालांकि बिश्नोई गिरोह को इससे ज्यादा फर्क पड़ता नहीं दिखा है। गिरोह ने आतंकी घोषित होने के बावजूद कनाडा में अपनी हिंसक गतिविधियां बंद नहीं कीं। उसने एक के बाद एक कई घटनाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

हाल ही में गिरोह के सदस्यों ने सरे शहर में तीन जगहों पर ड्राइव-बाय शूटिंग की थी। जिन परिसरों को निशाना बनाया गया, वे एक रेस्टोरेंट चेन के मालिक से जुड़े थे। गिरोह ने नवी तेसी नामक व्यक्ति से जुड़े प्रतिष्ठानों पर भी हमले किए।

गोल्डी ढिल्लों ने ली अन्य हमलों की जिम्मेदारी

गोल्डी ढिल्लों ने सोशल मीडिया पर लिखा, “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह। सभी भाइयों को सत श्री अकाल। मैं, गोल्डी ढिल्लों, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ, सरे और मैपल रिज में जी 76 की तीन लोकेशनों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी लेता हूं।”

ढिल्लों पर भारत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कई गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज कर रखे हैं, जिनमें फिरौती, टारगेट किलिंग और रंगदारी वसूली शामिल हैं। हाल ही में उसने कनाडा में कपिल शर्मा के कैफे पर हुई फायरिंग की भी जिम्मेदारी ली थी।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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