Friday, March 20, 2026
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Budget 2026-27: निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार पेश करने जा रहीं बजट, क्या हैं इस बजट की बड़ी उम्मीदें?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस साल के बजट का स्वरूप पिछले सात दशकों की तुलना में काफी अलग दिखने वाला है। आमतौर पर बजट भाषण का ‘पार्ट-ए’ (नीतिगत पहल और सेक्टर-वार योजनाएं) लंबा होता है, लेकिन इस बार ध्यान ‘पार्ट-बी’ पर शिफ्ट होने की संभावना है।

Budget 2026-27: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज रविवार सुबह 11 बजे वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह बजट कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। आजाद भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब बजट रविवार के दिन पेश किया जा रहा है। साथ ही, निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार बजट पेश कर एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का यह दूसरा पूर्ण बजट होगा।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस साल के बजट का स्वरूप पिछले सात दशकों की तुलना में काफी अलग दिखने वाला है। आमतौर पर बजट भाषण का ‘पार्ट-ए’ (नीतिगत पहल और सेक्टर-वार योजनाएं) लंबा होता है, लेकिन इस बार ध्यान ‘पार्ट-बी’ पर शिफ्ट होने की संभावना है। इसका मतलब है कि वित्त मंत्री का जोर कर, सरकारी आय-व्यय और वित्तीय रणनीति पर अधिक रहेगा।

क्या हैं इस बजट की बड़ी उम्मीदें?

1. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस साल बजट का मिजाज पिछले सात दशकों से अलग हो सकता है। आमतौर पर बजट का ‘पार्ट-ए’ (नीतिगत पहल और सेक्टर-वार योजनाएं) लंबा होता है, लेकिन इस बार ध्यान ‘पार्ट-बी’ पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। इसका अर्थ है कि वित्त मंत्री का पूरा फोकस कर प्रणाली (Taxation), सरकारी प्राप्तियों, खर्चों और भविष्य की राजकोषीय रणनीति पर रहेगा।

2. वित्त मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास की गति को बनाए रखते हुए राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की है। विशेषज्ञों की नजर इस ‘बारीक संतुलन’ पर टिकी है। कोविड काल में 9.2% तक पहुंचे राजकोषीय घाटे को सरकार ने वित्त वर्ष 2026 में 4.4% तक लाने का लक्ष्य रखा था, और अब उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 के लिए इसे 4.2% तक सीमित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही, सरकार अपने कुल कर्ज को जीडीपी के 49% से 51% के दायरे में लाने की कोशिश कर सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की साख मजबूत बनी रहे और ‘वित्तीय शुचिता’ का मार्ग प्रशस्त हो।

3. यह बजट गहरे वैश्विक तनाव के बीच आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ ने भारतीय निर्यातकों और वित्तीय बाजारों में भारी हलचल मचा दी है। विदेशी निवेशकों की निरंतर निकासी और रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर ने घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। ऐसी स्थिति में, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल जैसे निर्यात-उन्मुख उद्योगों के लिए आयात शुल्क में कटौती की प्रबल मांग की जा रही है, ताकि विनिर्माण लागत को कम कर भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

4. नौकरीपेशा और व्यक्तिगत निवेशकों के लिए इस बजट में कई राहत भरे ऐलान संभव हैं। नई टैक्स व्यवस्था के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख किए जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, निवेश के मोर्चे पर निवेशक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की सीमा बढ़ाने और धारा 87A के तहत मिलने वाले रिबेट के विस्तार की उम्मीद कर रहे हैं ताकि म्यूचुअल फंड जैसे साधनों पर टैक्स का बोझ कम हो सके। इसके अलावा, फिक्की जैसे संगठनों ने ‘सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स’ को खत्म करने और जटिल आयकर नियमों को सरल बनाने का सुझाव दिया है ताकि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिले।

5. अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार का पूंजीगत व्यय (Capex) पर जोर बरकरार रहने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय ने सीमाओं पर बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर सैन्य खर्च में 20% की बढ़ोतरी की मांग की है, जिसके लिए रक्षा उत्पादन में विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों को और सरल बनाया जा सकता है। साथ ही, बुनियादी ढांचे, बिजली और किफायती आवास जैसे क्षेत्रों के लिए बड़ा आवंटन जारी रहने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य पूंजीगत व्यय को जीडीपी के पिछले स्तर 3.1% से भी ऊपर ले जाने का हो सकता है ताकि बुनियादी ढांचे के विकास से रोजगार के नए अवसर पैदा हों।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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