लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में 15 जनवरी को अपने 70वें जन्म पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने बड़ा ऐलान किया। मायावती ने कहा कि बसपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अकेले उतरेगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन ने बार-बार पार्टी को ही नुकसान पहुंचाया है। जन्मदिन पर पत्रकारों से बात करते हुए मायावती ने ऊंची मानी जाने जातियों के समर्थन के लिए भी जोरदार अपील की। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को सम्मान चाहिए, बाटी चोखा नहीं।
‘ब्राह्मणों के सम्मान’ वाला मायावती का बयान हाल में यूपी में सत्ताधारी भाजपा द्वारा पार्टी के कई ब्राह्मण विधायकों और एमएलसी को जाति के आधार पर मीटिंग करने को लेकर चेतावनी देने की आई खबरों के कुछ दिनों बाद आया है। मायावती ने कहा कि पूर्व में सिर्फ बसपा सरकार ने ही ब्राह्मणों की सम्मान, प्रतिनिधित्व और रोजगार के साधनों की इच्छाओं को पूरा किया है।
भाजपा, सपा के बहकावे में न आएं ब्राह्मण: मायावती
लखनऊ में बसपा ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए मायावती ने कहा कि जब उनकी पार्टी सत्ता में आएगी, तो वह ब्राह्मणों, क्षत्रियों, जाटों और यादवों के हितों का ख्याल रखेगी। उन्होंने कहा कि न सिर्फ भाजपा के विधायक, बल्कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के विधायकों ने भी मौजूदा भाजपा सरकार के तहत ब्राह्मण समुदाय के साथ कथित उपेक्षा और ज्यादतियों पर चिंता जताई है।
मायावती ने आगे कहा कि उनकी पार्टी ने पिछले कई चुनावों में, दूसरे समुदायों की तरह, टिकट बंटवारे और सरकारी प्रतिनिधित्व में ब्राह्मणों की उचित भागीदारी सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि बसपा ने उनके साथ कभी कोई अन्याय या अत्याचार नहीं होने दिया है। मायावती ने कहा, ‘इसे देखते हुए, राज्य में ब्राह्मण समुदाय को भाजपा, कांग्रेस और सपा के बहकावे में नहीं आना चाहिए।’
हाल ही में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी समुदायों के कार्यकर्ताओं के लिए ‘बाटी-चोखा’ की दावत रखी थी। इस पर मायावती ने कहा कि ब्राह्मण समुदाय को किसी से ‘बाटी-चोखा’ की जरूरत नहीं है, और वे किसी की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।
मायावती ने कहा, ‘उन्हें (ब्राह्मणों को) हर स्तर पर इज्जत और सम्मान, सही प्रतिनिधित्व और रोजी-रोटी के साधन चाहिए। उनके खिलाफ कोई अत्याचार या ज्यादती नहीं होनी चाहिए। उनकी इच्छाएं अब तक सिर्फ बसपा सरकारों में ही पूरी हुई हैं, और सरकार बनने के बाद ये इच्छाएं फिर से पूरी होंगी।’
मायावती ने आगे कहा कि बसपा सरकार क्षत्रिय, वैश्य और जाट समुदायों के हितों, कल्याण और सुरक्षा की भी रक्षा करेगी।
सपा पर निशाना…
मायावती ने समाजवादी पार्टी की भी जमकर आलोचना की। सपा अभी पिछड़ा, दलित, और अल्पसंख्यक (खासकर मुसलमानों) पर फोकस करते हुए ‘पीडीए’ कैंपेन चला रही है। मायावती ने कहा कि सपा सरकार के दौरान, गुंडों, माफियाओं और भ्रष्ट लोगों ने उत्तर प्रदेश पर राज किया। उन्होंने कहा कि सपा शासन में यादव समुदाय को छोड़कर सभी समुदायों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जिसमें दलित सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
मायावती ने जून 1995 में गेस्ट हाउस कांड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब बसपा ने सपा के साथ गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का फैसला किया था, तो सपा के गुंडों ने लखनऊ के एक गेस्ट हाउस में उन पर हमला करने की कोशिश की थी।
उन्होंने कहा कि सपा शासन के दौरान ओबीसी के लिए तय आरक्षण का सबसे ज्यादा फायदा यादव समुदाय के लोगों को मिला। मायावती ने कहा कि बसपा सरकारों ने किसी भी समुदाय या धर्म के साथ भेदभाव नहीं किया।
मायावती ने मौजूदा भाजपा सरकार की भी आलोचना करते हुए कहा कि दलित और दूसरे हाशिये पर पड़े समूह बहुत निराश और दुखी हैं। मायावती ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था वैसी ही खराब हो गई है जैसी सपा सरकार के समय थी।
बसपा का अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों सहित देश भर में सभी चुनाव अकेले लड़ेगी और किसी भी दूसरी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। मायावती ने कहा कि भविष्य में अगर पार्टी को पूरा यकीन हो जाता है कि कोई गठबंधन साझेदार, खासकर ऊंची जातियों से, बसपा को वोट दिला सकता है, तो वे गठबंधन के तौर पर चुनाव लड़ने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस स्थिति के बनने में सालों लग सकते हैं।

