मुंबई: महाराष्ट्र नगर निगम में बीजेपी के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन बड़ी जीत की ओर है। इसमें मुंबई, पुणे, पिंपरी-चिंचवाड़, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, ठाणे और नवी मुंबई सहित 29 में से ज्यादातर नगर निगमों में उसे भारी बढ़त मिली है। भाजपा के लिए सबसे बड़ी जीत बृह्न्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी की रही है। यहां भाजपा और शिवसेना (शिंदे) का गठबंधन अपने दम पर बहुमत हासिल करता नजर आ रहा है। बीएमसी लंबे समय से ठाकरे परिवार के लिए उनकी राजनीतिक जमीन रही है। इस बार ये जमीन भी खिसकती नजर आ रही है।
शुक्रवार शाम 5:45 बजे तक के रुझानों के अनुसार राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन महाराष्ट्र की 2,869 सीटों में से 1,600 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रहा था। दूसरे शब्दों में कहें तो 29 नगर निगमों में से कम से कम 19 पर यह गठबंधन जीत की ओर है। इन सभी नगर निगमों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पार्टी ने इस तरह 2017 के 15 नगर निगमों में जीत के अपने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। साथ ही भाजपा ठाणे, चंद्रपुर, मालेगांव, अहिल्यानगर, वसई-विरार, भिवंडी, परभणी, लातूर, पनवेल और अमरावती सहित 10 नगर निगमों में दूसरे या तीसरे स्थान पर है।
नगर निगम चुनाव के लिए मतदान 15 जनवरी को हुए थे। इसके बाद शुक्रवार सुबह 10 से मतों की गिनती जारी है। इस चुनाव में 893 वार्डों में कुल 15,931 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन नगर निगमों की कुल 2869 सीटें हैं। इनमें से 68 उम्मीदवार निर्विरोध जीत हासिल कर चुके हैं।
बीएमसी पर महायुति की जीत
बीएमसी की 227 सीटों में बहुमत का आंकड़ा 114 का है। भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन ने इसे पार कर लिया है। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बीएमसी चुनावों के रुझानों का मतलब यह भी है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) 25 सालों में पहली बार इस नगर निकाय की सत्ता में नहीं होगी। ये भी गौर करने वाली बात है कि शिवसेना के दो गुटों में बंटने के बाद यह पहला बीएमसी चुनाव था। ऐसे में एक तरह से बाला साहेब ठाकरे की असली विरासत को साबित करने का भी मौका उद्धव ठाकरे के पास था।
उद्धव ने बीएमसी चुनाव के लिए 20 साल बाग अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। इस दौरान मराठी मानुस का मुद्दा दोनों भाईयों ने जमकर उछाला। हालांकि, ये कामयाब नहीं रहा।
बालासाहेब ठाकरे के समय से यानी 1995 से बीएमसी पर शिवसेना का कब्जा रहा। 2005 में राज ठाकरे के अलग होने और 2012 में बालासाहेब के निधन के बाद भी यह कब्जा कायम रहा। 2017 में शिवसेना की जीत हुई थी। हालांकि, इसके बाद पार्टी में दो फाड़ ने उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ा दी। बंटवारे ने पार्टी के कैडर को बांटा और अब बीएमसी भी ठाकरे परिवार के हाथ से बाहर जा चुकी है। पिछले 28 सालों से मुंबई में ठाकरे की शिवसेना का ही मेयर रहा है। अब पहली बार भाजपा से कोई इस पद पर बैठ सकता है।
संजय राउत बोले- अभी नतीजे फाइनल नहीं हैं
भाजपा में जहां जीत का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा है कि नतीजों पर अभी प्रतिक्रिया देने का समय नहीं आया है। पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने कहा कि मुंबई में जिस तरह से वोटों की गिनती चल रही है, उसे देखते हुए फाइनल नतीजे आधी रात तक नहीं आएंगे। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम चुनाव के जो आंकड़े जारी हो रहे हैं, वे गलत हैं और लगभग 100 वार्डों में तो वोटों की गिनती शुरू भी नहीं हुई है।
संजय राउत ने कहा कि वे ये मान रहे हैं कि मुकाबला कांटे का है लेकिन यह सच नहीं है कि शिवसेना (यूबीटी) बहुत पीछे है। उन्होंने कहा कि जो आंकड़े आप अभी देख रहे हैं, वे बदल जाएंगे। शायद यह मैच ड्रॉ पर खत्म हो सकता है।
दूसरी ओर भाजपा में जीत का जश्न मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि राज्य के लोगों ने एनडीए के सुशासन के एजेंडे को आशीर्वाद दिया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग नगर निगम चुनावों के नतीजे बताते हैं कि महाराष्ट्र के लोगों के साथ एनडीए का रिश्ता और मजबूत हुआ है। पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘हमारा ट्रैक रिकॉर्ड और विकास का विजन लोगों को पसंद आया है। पूरे महाराष्ट्र के लोगों का मैं आभारी हूं। यह वोट प्रगति को गति देने और राज्य की शानदार संस्कृति का जश्न मनाने के लिए है।’
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस भी मुंबई स्थित बीजेपी ऑफिस पहुंचे, जहां उनका पार्टी नेताओं ने माला पहनाकर स्वागत किया। फड़नवीस ने जीत के लिए महाराष्ट्र की जनता का आभार जताया।

