नई दिल्लीः भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए ‘शर्टलेस’ विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। शनिवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि इंडियन यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अपने प्रदर्शन का बचाव किया है।
भाजपा का विरोध मार्च
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने एक दिन पहले घोषणा की थी कि वे मान सिंह रोड गोलचक्कर से कांग्रेस मुख्यालय तक मार्च का नेतृत्व करेंगे और समिट स्थल पर हुई कथित “हंगामेबाजी” के खिलाफ आवाज उठाएंगे। शनिवार को भाजपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर जुटे।
प्रदर्शन स्थल पर मीडिया से बात करते हुए दिल्ली भाजपा मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता स्वेच्छा से बड़ी संख्या में यहां जुटे हैं। उन्होंने कहा कि देश को इस वैश्विक एआई समिट पर गर्व है और यह आयोजन भविष्य में देश को करोड़ों रुपए का लाभ और हजारों रोजगार देने वाला साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि समिट के दौरान विरोध प्रदर्शन कर राहुल गांधी ने अपनी राजनीतिक निराशा दिखाई है और देश इसे माफ नहीं करेगा।
वीरेंद्र सचदेवा ने इससे पहले दावा किया था कि समिट स्थल पर ‘शर्टलेस’ प्रदर्शन के आरोप में हिरासत में लिए गए 10 लोग वास्तविक कांग्रेस कार्यकर्ता नहीं, बल्कि किराए के उपद्रवी थे। उन्होंने कहा कि जब देश के युवा एआई समिट में नवाचार प्रदर्शित कर रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, तब इस तरह का व्यवधान दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली बातें करता रहा है।
इस विरोध प्रदर्शन में वीरेंद्र सचदेवा के साथ भाजपा सांसद मनोज तिवारी भी नजर आए। मनोज तिवारी राहुल गांधी के खिलाफ “देश के गद्दार” कह कर नारे लगा रहे थे। कर्नाटक में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी इस घटना की आलोचना करते हुए कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष को देश से माफी मांगनी चाहिए।
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उधर, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने विरोध प्रदर्शन को गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि जब भारत की धरती पर 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और दुनिया भर के प्रतिनिधि मौजूद थे और भारत एआई क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदर्शित कर रहा था, तब ऐसे प्रतिष्ठित आयोजन में इस तरह का व्यवहार देशहित में नहीं कहा जा सकता।
समिट के दौरान क्या हुआ?
विवाद की शुरुआत शुक्रवार को हुई थी जब यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा तोड़कर समिट स्थल के भीतर घुस गए। प्रदर्शनकारियों ने बेरोजगारी, महंगाई और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी शर्ट उतार दी और डिस्प्ले बोर्ड के सामने तस्वीरें खिंचवाईं। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर उन्हें हिरासत में लिया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण इस घटना ने व्यापक राजनीतिक तूल पकड़ लिया।
इस समिट में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विदेशी प्रतिनिधिमंडल शामिल थे, जिसके कारण मामले ने तेजी से तूल पकड़ लिया।
यूथ कांग्रेस ने बचाव में गांधी की शेयर की तस्वीर
उधर, राजनीतिक विवाद और भाजपा के प्रदर्शन के बीच इंडियन यूथ कांग्रेस ने घटना के एक दिन बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर महात्मा गांधी की तस्वीर पोस्ट कर अपने प्रदर्शन को सही ठहराने की कोशिश की।
संगठन ने पोस्ट करते हुए लिखा, हम गांधी के वंशज हैं। शर्टलेस ही सही। कल भी लड़ रहे थे, आगे भी लड़ते रहेंगे।” एक अन्य पोस्ट में यूथ कांग्रेस ने लिखा कि जब सत्ता सुनने से मना कर दे, तो युवा उठ खड़े होते हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने यूथ कांग्रेस के पोस्ट को रीट्वीट करते हुए चंद्रशेखर आजाद की तस्वीर साझा की। उन्होंने पोस्ट में लिखा, अगर चंद्रशेखर आजाद आज के युग में होते तो आईटी सेल और मीडिया का एक हिस्सा उन्हें आज राष्ट्र के लिए शर्मनाक करार कर देता।
एक और पोस्ट में संगठन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा, जब वे प्रोटेस्ट करते हैं, तो यह देशभक्ति है। जब हम प्रोटेस्ट करते हैं, तो यह ‘नेशनल शेम’ है?

