वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच-1बी वीजा (H-1B Visa) से जुड़े कड़े प्रतिबंधों के खिलाफ एक डेमोक्रेटिक सांसद ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पेश किया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ट्रंप प्रशासन की उस विवादास्पद घोषणा को निरस्त करना है, जिसमें एच-1बी वीजा पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को रखने वाले नियोक्ताओं के लिए सख्त वेतन शर्तें और भारी शुल्क लागू किए गए थे।
दरअसल राष्ट्रपति ट्रंप ने सितंबर 2025 में एक कार्यकारी आदेश के जरिए एच-1बी वीजा धारकों के लिए न्यूनतम वेतन के स्तर को अत्यधिक बढ़ा दिया था। साथ ही, इन पेशेवरों को काम पर रखने वाले नियोक्ताओं पर 1 लाख डॉलर (करीब 84 लाख रुपये) का भारी-भरकम शुल्क लगा दिया था।
डेमोक्रेटिक सांसद बोनी वॉटसन कोलमैन द्वारा पेश किए गए इस नए विधेयक में मांग की गई है कि- नियोक्ताओं पर लगाए गए 1 लाख डॉलर के अतिरिक्त शुल्क को तुरंत खत्म किया जाए। अनिवार्य किए गए अव्यावहारिक वेतन स्तरों को वापस लिया जाए और उच्च-कौशल वाले पेशेवरों के लिए भर्ती प्रक्रिया को फिर से सरल बनाया जाए।
विधेयक पेश करते हुए कोलमैन ने ट्रंप की नीतियों को ‘अल्पदृष्टि वाली घोषणा’ करार दिया। उन्होंने कहा, “ट्रंप के इन फैसलों ने उन अमेरिकी विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और शोध संस्थानों के लिए दीवारें खड़ी कर दी हैं जो वैश्विक प्रतिभाओं पर निर्भर हैं। एच-1बी प्रोग्राम अमेरिकी टैलेंट की जगह नहीं लेता, बल्कि यह वैश्विक प्रतिभा और अमेरिकी विकास के बीच एक पुल का काम करता है।”
सांसद कोलमैन ने विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने चेतावनी दी कि नर्सिंग डिग्री के लिए संघीय छात्र ऋण पर सीमाओं और H-1B प्रतिबंधों के कारण अमेरिका में स्वास्थ्य कर्मियों (नर्सों) का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। महंगे शुल्क के कारण टेक और इंजीनियरिंग फर्में अब नए नवाचार करने में हिचकिचा रही हैं।
भारत के लिए क्यों है यह खबर बेहद अहम?
गौरतलब है कि एच-1बी वीजा धारकों में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। तकनीकी क्षेत्र (IT) में काम करने वाले अधिकांश विदेशी पेशेवर भारत से ही आते हैं। ट्रंप के 1 लाख डॉलर के शुल्क वाले फैसले से भारतीय इंजीनियरों और टेक फर्मों पर सबसे अधिक वित्तीय बोझ पड़ा है। ऐसे में इस विधेयक का पारित होना भारतीय आईटी सेक्टर और अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
इस विधेयक को कई दिग्गज डेमोक्रेटिक सांसदों का समर्थन मिला है, जिनमें न्यूयॉर्क की यवेट डी. क्लार्क और मैसाचुसेट्स के सेठ मोल्टन प्रमुख रूप से शामिल हैं। हालांकि, रिपब्लिकन बहुमत वाली संसद में इस विधेयक को पारित कराना एक बड़ी चुनौती होगी।
समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

