बेंगलुरु: कर्नाटक में एक बार फिर बाइक टैक्सी की सर्विस शुरू हो जाएगी। कर्नाटक हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पूरे राज्य में इसे चलाने की इजाजत दे दी। इस तरह कोर्ट ने उस पिछले आदेश को रद्द कर दिया जिसने रैपिडो, ओला और उबर जैसे प्लेटफॉर्म के ऑपरेशन को प्रभावी ढंग से रोक दिया था।
चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस सीएम जोशी की डिवीजन बेंच ने उबर इंडिया, रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज (रैपिडो), एएनआई टेक्नोलॉजीज (ओला), बाइक टैक्सी ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन और कई अलग-अलग बाइक टैक्सी मालिकों द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए इसे मंजूरी दी।
कोर्ट ने ट्रांसपोर्ट अधिकारियों को मोटरसाइकिलों को ट्रांसपोर्ट वाहनों के तौर पर रजिस्टर करने और उन्हें मोटर वाहन अधिनियम के तहत कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट देने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा, ‘टैक्सी मालिक गाड़ी को ट्रांसपोर्ट व्हीकल के तौर पर रजिस्टर करने के लिए आवेदन फाइल कर सकते हैं। हम राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि वे गाड़ियों के मालिकों की ट्रांसपोर्ट व्हीकल के तौर पर रजिस्ट्रेशन की ऐसे आवेदन पर विचार करें और उन्हें कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के तौर पर चलाने की इजाजत दें। हालांकि संबंधित अधिकारी जरूरी पहलुओं की जांच करने के लिए आजाद हैं, लेकिन इस आधार पर मना नहीं किया जाएगा कि मोटरसाइकिल को ट्रांसपोर्ट व्हीकल या कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के तौर पर नहीं चलाया जा सकता। रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ऐसी शर्तें लगा सकती है जो उसे जरूरी लगें।’
याचिका में 2 अप्रैल, 2025 के सिंगल जज बेंच के एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने एग्रीगेटर्स को बाइक टैक्सी सेवाएं चलाने से रोक दिया था। सिंगल बेंच ने कहा था कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 93 और राज्य के नियमों के तहत गाइडलाइंस की गैरमौजूदगी में रैपिडो, ओला और उबर जैसे प्लेटफॉर्म बाइक टैक्सी एग्रीगेटर के तौर पर काम नहीं कर सकते। इसने सरकार को मोटरसाइकिलों को ट्रांसपोर्ट वाहनों के तौर पर रजिस्टर करने या कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट जारी करने का निर्देश देने से भी इनकार कर दिया था।
इस फैसले को रद्द करते हुए डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को कहा कि जब मोटर वाहन अधिनियम दोपहिया वाहनों को कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के तौर पर चलाने की अनुमति देता है, तो अधिकारी रजिस्ट्रेशन या परमिट देने से इनकार नहीं कर सकते। बेंच ने कर्नाटक सरकार को मौजूदा नियमों के तहत ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी एग्रीगेटर्स को लाइसेंस जारी करते समय अतिरिक्त शर्तें लगाने की भी छूट दी है।
सिंगल जज ने पहले राज्य की इस दलील को मान लिया था कि कर्नाटक ऑन-डिमांड ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी एग्रीगेटर रूल्स-2016, केवल चार-पहिया टैक्सी सेवाओं पर लागू होते हैं, बाइक टैक्सियों पर नहीं। इसी के आधार पर कोर्ट ने एग्रीगेटरों को छह हफ्ते के अंदर बाइक टैक्सी सेवाएं बंद करने का निर्देश दिया था। इसे बाद में बढ़ाकर 15 जून, 2025 कर दिया गया था।
अपनी अपील में, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि जब केंद्रीय कानून साफ तौर पर मोटरसाइकिलों को कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के तौर पर चलाने की इजाजत देता है, तो राज्य ‘पॉलिसी फैसले की आड़ में’ रजिस्ट्रेशन या परमिट देने से इनकार नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 में कर्नाटक की इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी स्कीम को वापस लेना किसी स्टडी-आधारित आकलन के बजाय राजनीतिक दबाव और कानून-व्यवस्था की चिंताओं के कारण हुआ था।
राज्य सरकार ने कहा कि उसने ऑटो और टैक्सी यूनियनों के विरोध, कानून-व्यवस्था की समस्याओं, सफेद नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के गलत इस्तेमाल और महिला यात्रियों की सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए बाइक टैक्सियों को अनुमति न देने का जानबूझकर नीतिगत फैसला लिया था।
अगस्त 2025 में, डिवीजन बेंच ने मौखिक रूप से अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जब तक अपीलें पेंडिंग हैं, तब तक व्यक्तिगत बाइक टैक्सी ड्राइवरों के खिलाफ कोई जबरदस्ती कार्रवाई न करें या उन्हें परेशान न करें।
बहरहाल, इस फैसले से बेंगलुरु में हजारों ड्राइवरों सहित एग्रीगेटर्स को राहत मिलने की उम्मीद है। बाइक टैक्सी प्लेटफॉर्म का कहना है कि वे बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आजीविका में मदद करते हैं और शहरी मोबिलिटी में अहम भूमिका निभाते हैं।

