1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहे नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के साथ देश में कई बड़े और नियामकीय बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो सीधे आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करेंगे। आयकर नियमों में सुधार, बैंकिंग सेवाओं में बदलाव, रेलवे नियमों में सख्ती जैसे बदलाव होने जा रहे हैं।
इसके साथ ही नए आयकर अधिनियम, 2025 के लागू होने से टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है, वहीं लेबर लॉ और सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव का असर नौकरीपेशा वर्ग पर साफ दिखेगा। कई बदलावों का आपकी जेब पर सीधा असर दिखेगा। नीचे सभी जरूरी बदलावों को विस्तार से समझाया गया है:
1. आयकर और PAN नियम: नया सिस्टम, आसान लेकिन सख्त ट्रैकिंग
नए फॉर्म लागू हुएः नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू हो गया है, जिसने 1961 के पुराने कानून की जगह ले ली है। इसमें सेक्शन 819 से घटाकर 536 कर दिए गए हैं, जबकि टैक्स नियम और फॉर्म की संख्या भी काफी कम कर दी गई है, जिससे सिस्टम को सरल बनाया जा सके। अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह केवल ‘टैक्स ईयर’ होगा। इसके साथ ही पुराने टैक्स फॉर्म्स की जगह नए फॉर्म लागू हुए हैं, जैसे फॉर्म 16 अब फॉर्म 130, फॉर्म 16A अब फॉर्म 131, फॉर्म 12BB अब फॉर्म 124, फॉर्म 26AS अब फॉर्म 168 हो गया है।
New Income Tax Rule: 1 अप्रैल से नया नियम, क्या बदला नए आयकर सिस्टम में…बड़ी बातें जो जानना जरूरी है
HRA के कड़े नियम: मकान किराया भत्ता यानी HRA को लेकर नियम सख्त कर दिए गए हैं। अगर कोई व्यक्ति साल में 1 लाख रुपये से अधिक किराया देता है, तो उसे मकान मालिक का पैन देना अनिवार्य होगा। हालांकि, अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे को मेट्रो सिटी की श्रेणी में शामिल करने से वहां रहने वालों को 50% एचआरए छूट का लाभ मिलेगा।
PAN कार्ड में बदलाव: पैन से जुड़े नियमों में भी बदलाव हुए हैं। पैन को आधार से लिंक करना जरूरी होगा, वरना वह निष्क्रिय हो सकता है और टैक्स रिफंड में दिक्कत आ सकती है। नए PAN के लिए आधार को उम्र प्रमाण के तौर पर मान्य नहीं किया जाएगा। साथ ही अब PAN में नाम आधार के अनुसार ही मान्य होगा।
उच्च मूल्य के लेनदेन पर निगरानी बढ़ाई गई है। साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश जमा या निकासी पर पैन देना जरूरी होगा और 20 लाख रुपये से अधिक के लेनदेन पर पैन वेरिफिकेशन भी अनिवार्य होगा। होटल और रेस्टोरेंट में पैन देने की सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक की जा सकती है, जबकि प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख करने का प्रस्ताव है। बीमा पॉलिसी में भी पैन देना अनिवार्य किए जाने की तैयारी है, चाहे प्रीमियम कम ही क्यों न हो।
2. बैंकिंग और ATM नियम: ट्रांजेक्शन महंगे और सीमित
ATM और UPI विड्रॉल: बैंकिंग सेक्टर में भी कई बदलाव किए गए हैं। HDFC बैंक अब ATM से UPI के जरिए पैसे निकालने को भी फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट में शामिल करेगा। इसके बाद हर ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये का चार्ज लगेगा। पंजाब नेशनल बैंक ने कुछ डेबिट कार्डों की दैनिक निकासी सीमा घटाकर 50 हजार से 75 हजार रुपये कर दी है।
बंधन बैंक ने भी ट्रांजेक्शन नियमों में बदलाव किया है। मेट्रो शहरों में ग्राहकों को महीने में 3 फ्री ट्रांजेक्शन मिलेंगे, जबकि नॉन-मेट्रो में यह सीमा 5 होगी। इसके बाद हर ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये का चार्ज लगेगा। अगर खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण ट्रांजेक्शन फेल होता है, तो 25 रुपये की पेनल्टी देनी होगी।
3. परिवहन और यात्रा: टोल और रेलवे नियम सख्त
फास्टैग (FASTag) अनिवार्य: परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव टोल भुगतान को लेकर हुआ है। अब देशभर के सभी टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया है और केवल FASTag या UPI के जरिए ही भुगतान करना होगा। NHAI ने FASTag के सालाना पास की फीस 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी है।
टोल दरों में वृद्धि: टोल दरों में भी बढ़ोतरी हुई है, खासकर उत्तर प्रदेश से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर 5 से 45 रुपये तक का इजाफा किया गया है।
रेलवे टिकट कैंसिलेशन: रेलवे टिकट कैंसिलेशन नियमों को भी सख्त किया गया है। अब ट्रेन छूटने के 8 घंटे के भीतर टिकट कैंसिल करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। 24 से 72 घंटे के बीच कैंसिल करने पर 25% किराया कटेगा, जबकि 8 से 24 घंटे के बीच कैंसिल करने पर 50% किराया काटा जाएगा। 72 घंटे से पहले कैंसिल करने पर अधिकतम रिफंड मिलेगा, लेकिन फ्लैट चार्ज लागू होगा।
4. सैलरी और लेबर लॉ: इन-हैंड सैलरी घट सकती है
नया लेबर कोड: नए लेबर कोड लागू होने की स्थिति में कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव होगा। अब बेसिक सैलरी कुल वेतन का कम से कम 50% होना जरूरी होगा, जिससे पीएफ में योगदान बढ़ेगा और इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है। हालांकि इससे भविष्य में मिलने वाली ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट बेनिफिट्स बढ़ेंगे।
छुट्टियों के नियम: छुट्टी से जुड़े नियम भी आसान किए गए हैं। अब 240 दिन काम करने के बजाय 180 दिन काम करने पर ही कर्मचारी लीव के हकदार हो जाएंगे। इसके अलावा कर्मचारियों को पेंशन स्कीम में एक बार बदलाव करने का विकल्प भी मिल सकता है।
5. प्रॉपर्टी और रजिस्ट्रेशन: सख्त जांच और अतिरिक्त शुल्क
रजिस्ट्री पर एक्स्ट्रा चार्ज: उत्तर प्रदेश में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के नियमों को सख्त किया गया है। अब प्रॉपर्टी बेचने वाले के मालिकाना हक की जांच खतौनी से क्रॉस-चेक की जाएगी ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके। नगर निगम क्षेत्रों में प्रॉपर्टी खरीदने पर 2% अतिरिक्त विकास शुल्क देना होगा।
रजिस्ट्री प्रक्रिया को भी समयबद्ध किया गया है। अब एक तय एक घंटे के स्लॉट में ही रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा, अन्यथा नया स्लॉट बुक करना पड़ेगा।
6. कृषि: गेहूं MSP बढ़ी
गेहूं की MSP: कृषि क्षेत्र में सरकार ने किसानों को राहत दी है। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2585 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पिछले साल से 160 रुपये ज्यादा है। इसके अलावा किसानों को 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त खर्च के रूप में मिलेंगे, जिससे कुल भुगतान 2605 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगा।
7. निवेश और अन्य वित्तीय बदलाव
निवेश से जुड़े नियमों में भी बदलाव हुआ है। अब RBI के अलावा कहीं और से खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। गिफ्ट वाउचर की टैक्स-फ्री लिमिट 5000 रुपये से बढ़ाकर 15000 रुपये कर दी गई है।
मील वाउचर की सीमा भी 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दी गई है जिससे सालाना बड़ा टैक्स फायदा हो सकता है। वहीं, कंपनी की कार और लग्जरी सुविधाओं पर टैक्स बढ़ेगा।
इसके अलावा इंटरेस्ट-फ्री लोन की टैक्स-फ्री सीमा को 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलेगी।
8. अन्य महत्वपूर्ण अपडेट
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख नॉन-ऑडिट मामलों में बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव भी संभव है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर के महंगा होने की आशंका है। अगर दाम बढ़ते हैं तो इससे होटलों का खाना महंगा हो सकता है। वहीं हवाई ईंधन महंगा होता है तो फ्लाइट टिकट के भी दाम बढ़ सकते हैं। 1 अप्रैल से कमर्शियल और पैसेंजर गाड़ियों के दाम 2 प्रतिशत से 3 प्रतिशत बढ़ सकते हैं।

