Friday, April 3, 2026
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खेती बाड़ी-कलम स्याहीः बंगाल के पहाड़ी इलाकों की राजनीति और ममता-अमित शाह के आरोप-प्रत्यारोप

इस बार दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की राजनीति में एक नई ताकत के रूप में अजय एडवर्ड उभरे हैं। उनकी पार्टी भारतीय गोरखा जनशक्ति मोर्चा (IGJF) की सबसे अधिक चर्चा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि आईजीजेएफ का स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतरना भाजपा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। गौरतलब है कि इन क्षेत्रों में गोरखा मतदाता ही जीत और हार का फैसला करते हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति को देखने के लिए दो अलग-अलग चश्मों की जरूरत पड़ती है, क्योंकि जब आप मैदानों से निकलकर पहाड़ों की तरफ जाएंगे तो लगेगा कि यहां का समीकरण तो कुछ और ही कहानी सुना रहा है। हम बात  कर रहे हैं दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियांग जैसे इलाकों की। भारतीय जनता पार्टी हो या फिर तृणमूल कांग्रेस, इस इलाके में आने के बाद सबकी जुबान पर पहाडों के भविष्य की ही बात आती है।

जहां एक ओर पश्चिम बंगाल की अधिकांश सीटों पर मुकाबला तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, वाम मोर्चा-एआईएसएफ गठबंधन और कांग्रेस के बीच सिमटा हुआ है। वहीं दार्जिलिंग की पहाड़ियों में प्रवेश करते ही चुनावी गणित साफ बदल जाती है। कुर्सियांग, कलिम्पोंग और दार्जिलिंग में चुनावी लड़ाई अब पंचकोणीय हो चुकी है।

इन क्षेत्रों में भाजपा को बिमल गुरुंग के गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) का साथ मिला है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने अनित थापा के भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (BGPM) पर भरोसा जताया है। इसके साथ ही वाम मोर्चा-एआईएसएफ गठबंधन और कांग्रेस भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

इस बार दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की राजनीति में एक नई ताकत के रूप में अजय एडवर्ड उभरे हैं। उनकी पार्टी भारतीय गोरखा जनशक्ति मोर्चा (IGJF) की सबसे अधिक चर्चा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि आईजीजेएफ का स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतरना भाजपा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। गौरतलब है कि इन क्षेत्रों में गोरखा मतदाता ही जीत और हार का फैसला करते हैं।

अजय ने अपनी पार्टी इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट (आईजीजेएफ) के बैनर तले पहाड़ की तीन सीटों समेत कुल सात सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।

साथ ही कुल 10 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। वह न केवल दार्जिलिंग पहाड़ बल्कि सिलीगुड़ी मैदानी क्षेत्र और डुवार्स में भी उम्मीदवार उतार रहे हैं। उनकी इन सीटों पर जीत हो या न हो लेकिन अन्य पार्टियों का खेल तो बिगाड़ ही सकते हैं।

अजय एडवर्ड खुद दार्जिलिंग विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

कर्सियांग से वंदना राई, कालिम्पोंग से ब्रेनन ब्रिटो लेप्चा, माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी से निमेश सुंदास और सिलीगुड़ी से कृष्णानंद सिंह जैसे उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है। उनका यह कदम दार्जिलिंग पहाड़ के साथ दोनों क्षेत्रों में गोरखा वोट बैंक को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है।

अजय ने पहले हामरो पार्टी बनाई थी, जो दार्जिलिंग नगरपालिका चुनाव में सफल रही। बाद में कुछ नेताओं के दलबदल से नगरपालिका की सत्ता चली गई। इसके बाद उन्होंने आइजीजेएफ का गठन किया।

इसका मुख्य एजेंडा अलग गोरखालैंड राज्य की मांग, क्षेत्रीय पहचान, पारदर्शिता और पहाड़ी विकास है। वह अगर जीत गए तो ठीक, लेकिन वोटकटवा की भूमिका तक रह गए तो भाजपा के साथ तृणमूल का भी खेल बिगाड़ सकते हैं। उनकी पार्टी कुछ प्रतिशत गोरखा वोट ले जाती है तो मुख्य दलों का समीकरण बिगड़ सकता है।

दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र और सिलीगुड़ी समतल में गोरखा समुदाय का वोट बैंक काफी महत्वपूर्ण है। सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में गोरखा, राजबंशी और अन्य समुदायों का मिश्रण है। आइजीजेएफ ने समतल क्षेत्रों में भी उम्मीदवार उतारकर गोरखा वोट को एकजुट करने की कोशिश की है।

इन इलाकों में घूमते हुए पता चलता है कि अगर आइजीजेएफ गोरखा वोट का एक हिस्सा काट लेती है तो दार्जिलिंग, कर्सियांग और कालिम्पोंग जैसी सीटों पर नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।

सिलीगुड़ी समतल में गोरखा वोट का प्रभाव सिलीगुड़ी सीट के अलावा माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी और फांसीदेवा जैसी सीटों पर भी दिखता है। डुवार्स में भी इनका कुछ सीटों पर प्रभाव है।

हालांकि, हर दल सार्वजनिक रूप से यही दावा कर रहा है कि आईजीजेएफ के आने से उनकी राह आसान हुई है। भाजपा का तर्क है कि एडवर्ड्स भाजपा विरोधी गोरखा वोटों में सेंध लगाएंगे, जबकि तृणमूल का मानना है कि वे भाजपा के कोर वोट बैंक को नुकसान पहुंचाएंगे।

वहीं इन सबके बीच गुरुवार को भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनका नामांकन इसलिए खास बन गया क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह खुद इसके लिए बंगाल पहुंचे थे। इस दौरान अमित शाह ने  कहा- मैं पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान 15 दिनों तक बंगाल में रहूंगा। मैं आपसे बात करूंगा। मैं आज विशेष रूप से शुभेंदु अधिकारी के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने आया हूं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को अलविदा कह दीजिए।

आरोप-प्रत्यारोपों के बीच ममता बनर्जी भी ग्राउंड में आवाज बुलंद कर रहीं हैं। दरअसल सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस इस बार अपने विरोधी दलों से ज्यादा चुनाव आयोग पर हमला बोल रही है। बीरभूम जिले के नानूर में एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को अलर्ट किया है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के अधिकारियों को ‘विशेष मिशन’ पर भेजा गया है. इसका उद्देश्य तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करना हो सकता है।

ममता बनर्जी ने पार्टी के प्रत्याशियों को आगाह किया है कि सब कुछ बदल दिया गया है। बंगाल में अब एक नयी व्यवस्था है। निर्वाचन आयोग ने जिन नये अधिकारियों की नियुक्ति की है, उन्हें कथित तौर पर आपके नामांकन पत्र खारिज करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। इसलिए, नामांकन दाखिल करते समय हर एक बारीकी का ध्यान रखें और पूरी सावधानी बरतें।

ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला तेज करते हुए कहा कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों का खुलेआम दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने बीरभूम की धरती से केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि एजेंसियां चुनाव नहीं जीत सकतीं, जीत जनता के आशीर्वाद से ही मिलती है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पिछले पांच दशकों में ज़्यादातर वही पार्टियां सत्ता में रही हैं, जिनके मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी केंद्र की सत्ता में रहते हैं। नतीजतन, केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव पश्चिम बंगाल की राजनीति की सच्चाई बन चुकी है। अब इस बार देखना है कि केंद्र की सत्ता बंगाल में अपना परचम लहरा पाती है या फिर इस बार भी चुकने वाली है।

गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा ने पत्रकारिता की पढ़ाई वाईएमसीए, दिल्ली से की. उसके पहले वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक कर चुके थे. आप CSDS के फेलोशिप प्रोग्राम के हिस्सा रह चुके हैं. पत्रकारिता के बाद करीब एक दशक तक विभिन्न टेलीविजन चैनलों और अखबारों में काम किया. पूर्णकालिक लेखन और जड़ों की ओर लौटने की जिद उनको वापस उनके गांव चनका ले आयी. वहां रह कर खेतीबाड़ी के साथ लेखन भी करते हैं. राजकमल प्रकाशन से उनकी लघु प्रेम कथाओं की किताब भी आ चुकी है.
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