पिछले हफ्ते इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में लगातार बढ़ती हिंसा और अस्थिरता के बीच भारत–बांग्लादेश संबंधों में भी तनाव बढ़ने लगे हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारतीय राजनयिक को तलब कर बांग्लादेशी दूतावासों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। अधिकारियों के मुताबिक यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब बांग्लादेश ने अपरिहार्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए नई दिल्ली समेत भारत के तीन शहरों में वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं।
इससे पहले भारत ने भी ढाका में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। भारत ने खास तौर पर हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की हत्या और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
पूर्व भारतीय राजनयिक अनिल त्रिगुणायत ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को बेहद नाजुक और खतरनाक बताया है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें एक हिंदू व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या का मामला शामिल है।
उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के लोगों के साथ खड़ा है और चाहता है कि देश में स्थिरता लौटे, लेकिन इसके साथ ही वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। त्रिगुणायत ने यह उम्मीद भी जताई कि फरवरी में प्रस्तावित चुनाव सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण का रास्ता खोलेंगे।
हिंदू युवक की हत्या पर दुनिया के कई देशों ने जताई चिंता
बांग्लादेश के मयमनसिंह में हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की हत्या ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा की है। अमेरिका के दो सांसदों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।
कांग्रेसमैन राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि अस्थिरता और हिंसा के माहौल में एक हिंदू व्यक्ति की लक्षित भीड़ हत्या बेहद भयावह है। वहीं न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली की सदस्य जेनिफर राजकुमार ने कहा कि दीपु को भीड़ ने पीटा, आग लगा दी और उसका शव सड़क पर छोड़ दिया गया। उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पिछले सप्ताह छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत के बाद हालात तेजी से बिगड़े। हादी पर ढाका में गोली चलाई गई थी। उनकी मौत के बाद देशभर में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। इस दौरान बांग्लादेश के प्रमुख मीडिया संस्थानों ‘द डेली स्टार’ और ‘प्रथम आलो’ के दफ्तरों पर हमले किए गए, आगजनी हुई और कई पत्रकार घंटों तक अंदर फंसे रहे।
इसी बीच मयमनसिंह में हिंदू गारमेंट वर्कर दीपु चंद्र दास की हत्या ने आग में घी डालने का काम किया। आरोप है कि कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने उन्हें फैक्ट्री से घसीटकर बाहर निकाला, फांसी दी और जला दिया। बाद में सामने आया कि ईशनिंदा के आरोप अस्पष्ट थे और इसके कोई ठोस सबूत नहीं मिले।
एनसीपी नेता, मीडिया संस्थानों पर हमला
हिंसा अभी थमी भी नहीं थी कि खुलना में नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के नेता मोहम्मद मोतालेब सिकदर को गोली मार दी गई। गोली उनके सिर को छूते हुए निकल गई। हमला सुबह करीब 11:45 बजे शहर के सोनाडांगा इलाके में हुआ। ढाका ट्रिब्यून ने हॉस्पिटल के सूत्रों के हवाले से बताया कि सिकदर को गंभीर हालत में खुलना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया।
सोनाडांगा मॉडल पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज (ओसी) (इन्वेस्टिगेशन) अनिमेष मंडल ने कहा कि सिकदर को बदमाशों ने गोली मारी थी और स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाकर हॉस्पिटल पहुंचाया। जानकारी मिलने के बाद में पुलिस मौके पर पहुंची। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
वहीं सोमवार को कट्टरपंथी उपद्रवियों ने मीडिया संस्थानों- द डेली स्टार और प्रोथोम अलो के दफ्तर पर हमला किया। इन कट्टरपंथियों ने हमला तब किया, जब दफ्तर के अंदर मीडिया हाउस के कर्मचारी मौजूद थे। इस मामले की जांच कर रही पुलिस ने अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया और 31 उपद्रवियों की पहचान कर ली है।
लगातार हो रहे हमलों के बीच कम से कम 20 नेताओं और मीडिया कर्मियों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इनमें ‘प्रथम आलो’, ‘द डेली स्टार’ और ‘ढाका ट्रिब्यून’ के वरिष्ठ संपादक भी शामिल हैं।
भारत में प्रदर्शन
दीपु चंद्र दास की हत्या के खिलाफ भारत में भी विरोध प्रदर्शन हुए। सोमवार को कोलकाता में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर और त्रिपुरा में सहायक उच्चायोग के बाह प्रदर्शनकारियों ( टिपरा मोथा पार्टी समेत कई संगठनों ने) ने प्रदर्शन किया और आगे आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी और कांग्रेस के नेताओं ने एक सुर में इस हिंसा की निंदा करते हुए कोलकाता स्थित बांग्लादेश उप उच्चायोग के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध मार्च में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में हिंदू साधु-संत भी शामिल हुए, जिन्होंने पड़ोसी देश में बिगड़ते हालातों पर अपनी गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की।
जैसे ही यह विरोध मार्च बांग्लादेश उप उच्चायोग की ओर बढ़ने लगा, कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को बीच रास्ते में ही बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई, क्योंकि प्रदर्शनकारी उच्चायोग के कार्यालय तक पहुँचने की जिद पर अड़े थे। पुलिस द्वारा रोके जाने से प्रदर्शनकारी और भी उग्र हो गए, जिससे स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।
अपने गुस्से का इजहार करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस का पुतला फूंका और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नेताओं ने मांग की कि बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं की जान-माल की सुरक्षा तुरंत सुनिश्चित की जाए और वहां हो रही हिंसा को रोका जाए। इस प्रदर्शन के चलते कोलकाता के मध्य हिस्से में घंटों तक यातायात बाधित रहा और सुरक्षा की दृष्टि से पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
वहीं पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में हिंदू जागरण मंच और विश्व हिंदू परिषद ने संयुक्त रूप से 22 दिसंबर को बांग्लादेश वीजा आवेदन केंद्र के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ नारेबाजी की और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इस दौरान वीएचपी के उत्तर बंगाल क्षेत्र के अध्यक्ष लक्ष्मण बंसल ने कहा कि दीपु चंद्र दास की हत्या ने पूरे हिंदू समाज को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने सवाल उठाया, “जहां-जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं, वहां उन पर हमले क्यों हो रहे हैं?”
लक्ष्मण बंसल ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेश वीजा आवेदन केंद्र के अधिकारियों से केंद्र को बंद रखने का आग्रह भी किया गया।
दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग की बढ़ाई गई सुरक्षा
इन्हीं विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा चिंताओं के बाद बांग्लादेश ने नई दिल्ली, त्रिपुरा और सिलीगुड़ी में वीजा सेवाएं निलंबित कर दीं। इस बीच दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था, जिसके मद्देनजर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर रहीं।
भारत सरकार ने मयमनसिंह की घटना की कड़ी निंदा करते हुए बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब कर सुरक्षा हालात पर जवाब मांगा गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी बांग्लादेश में जारी हिंसा और हिंदू युवक की हत्या पर चिंता जताई है। उनके प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी देश में अल्पसंख्यकों को सुरक्षित महसूस करना चाहिए और मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं।

