ढाका: दिवंगत खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) गुरुवार को हुए संसदीय चुनाव में निर्णायक और बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि 60 वर्षीय रहमान के बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बांग्लादेश में 2024 में उग्र छात्र आंदोलन और शेख हसीना का तख्तापलट होने के बाद यह पहला चुनाव है।
बांग्लादेश के अखबार डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग (ईसी) और पार्टी सूत्रों से प्राप्त अनौपचारिक परिणामों के मुताबिक तारिक रहमान ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं। रहमान ब्रिटेन में 17 वर्षों के स्व-निर्वासन के बाद हाल में देश लौटे थे।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार सुबह तक तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी और उसके सहयोगी दल 299 सीटों पर हुए चुनाव में से 212 सीटों पर आगे चल रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन 70 सीटों पर आगे है।
वोटों की गिनती गुरुवार शाम से जारी है। इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अमेरिका ने भी रहमान को उनकी ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने पर मैं तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूँ। यह जीत बांग्लादेश की जनता के आपके नेतृत्व पर विश्वास को दर्शाती है। भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के प्रति अपना समर्थन जारी रखेगा। मैं आपके साथ मिलकर हमारे बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हूँ।’
बांग्लादेश में अमेरिकी राजदूत ब्रेंट टी क्रिस्टेंसन ने लिखा, ‘सफल चुनाव के लिए बांग्लादेश की जनता को, बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी और तारिक रहमान को उनकी ऐतिहासिक जीत पर बधाई। संयुक्त राज्य अमेरिका हमारे दोनों देशों के लिए समृद्धि और सुरक्षा के साझा लक्ष्यों को साकार करने के लिए आपके साथ काम करने के लिए तत्पर है।’
बीएनपी 300 में से 292 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। साथ ही उसने बाकी सीटें छोटे सहयोगी दलों के साथ साझा की हैं। बीएनपी के सामने जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन था। चुनाव 299 सीटों पर हुए हैं। शेरपुर-3 निर्वाचन क्षेत्र में एक उम्मीदवार की मृत्यु के कारण मतदान रद्द कर दिया गया था।
बीएनपी चुनाव समिति के प्रवक्ता महदी अमीन ने पत्रकारों को बताया कि पार्टी कम से कम दो-तिहाई सीटें जीतने की राह पर है और उन्होंने यह भी बताया कि तारिक रहमान ने जिन दोनों सीटों पर चुनाव लड़ा था, उन दोनों में जीत हासिल की है।
बीएनपी के वरिष्ठ नेता रुहुल कबीर रिजवी ने पार्टी के एक बयान में आंकड़े दिए बिना ‘बड़ी जीत’ का दावा किया और समर्थकों से शुक्रवार को सड़कों पर जश्न मनाने के बजाय नमाज में शुक्रिया कहने का आह्वान किया।
तारिक रहमान कौन हैं?
तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और तीन बार की प्रधानमंत्री खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं। वे हाल में लगभग 17 वर्षों के निर्वासन के बाद देश लौटे। इस दौरान हाल में उनकी मां का भी निधन हुआ। ऐसे में बीएनपी की कमान अब उनके हाथ में हैं और चुनाव में वे प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में उभरे।
खालिदा जिया के निधन के बाद रहमान को बीएनपी प्रमुख चुना गया था। इससे पहले वे बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे। खालिदा जिया के निधन के कुछ दिनों बाद, दिसंबर 2025 में रहमान ने औपचारिक रूप से बीएनपी अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया।
बताया जाता है कि 2001 से 2006 तक जब खालिदा जिया प्रधानमंत्री थीं, तब बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के दौरान वे सत्ता में अहम पकड़ रखते थे। उस समय रहमान ‘हवा भवन’ से काम करते थे, जो एक दो मंजिला इमारत थी जिसमें एक ‘विंड टनल’ थी, और जिसे ‘शैडो पीएमओ’ तक कहा जाता था।
साल 2006 से 2008 के बीच का समय बांग्लादेश अशांति से भरा रहा, जिसमें बीएनपी और शेख हसीना की अवामी लीग के बीच नवंबर 2006 के मध्य तक होने वाले चुनाव को लेकर विवाद शामिल था। इस अराजकता के चलते सैन्य ‘कार्यवाहक’ सरकार बनी, जिसने कथित तौर पर मौलिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और यहां तक कि जिया या हसीना के बिना एक वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था बनाने की कोशिश भी हुई। इसके बाद 2008 में चुनाव हुए, जिसमें अवामी लीग की जीत हुई।
रहमान को मई 2007 में कार्यवाहक सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था और विभिन्न आरोपों में 17 महीने तक हिरासत में रखा गया। उन्हें कई मामलों में दोषी ठहराया गया, जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग और हसीना की हत्या की कथित साजिश से जुड़ा एक मामला भी शामिल था। अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह में हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद इन फैसलों को पलट दिया गया। हिरासत में कथित यातना के बाद वे बाद में चिकित्सा उपचार के लिए लंदन चले गए थे।
भारत को लेकर तारिक रहमान ने क्या कहा था?
बहरहाल, नई सरकार के सामने सबसे बड़ी भू-राजनीतिक चुनौतियों में से एक भारत के साथ संबंधों के पुनर्निर्माण का होगा। शेख हसीना के शासनकाल में भारत बांग्लादेश का सबसे करीबी सहयोगी था, लेकिन उनकी सरकार गिरने के बाद संबंध बेहद खराब हो गए और हाल के महीनों में तो ये संबंध खुले तौर पर शत्रुतापूर्ण हो गए हैं।
‘द गार्जियन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, रहमान ने स्वीकार किया कि भारत के साथ रिश्तों में कुछ ‘समस्याएं’ हैं और उन्होंने कहा कि वे केवल ‘आपसी सम्मान और आपसी समझ’ का संबंध चाहते हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत और बांग्लादेश तब तक संबंधों को ठीक नहीं सकते हैं जब तक दिल्ली हसीना और उनके दल के सदस्यों को सुरक्षित पनाह दे रही है, तो रहमान ने कहा, ‘यह निर्भर करता है। यह उन पर भी निर्भर करता है।’

