Friday, March 20, 2026
Homeभारतराम गोपाल मिश्रा हत्याकांड: मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा, 9...

राम गोपाल मिश्रा हत्याकांड: मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा, 9 को उम्रकैद; क्या हुआ था बहराइच में उस दिन

अन्य दोषियों में सरफराज के पिता अब्दुल हमीद, दो भाई- फहीम और तालिब, सैफ अली, जावेद खान, जीशान उर्फ ​​राजा उर्फ ​​साहिर, ननकू, मारूफ अली, शोएब खान, शामिल हैं।

लखनऊ: बहराइच की एक कोर्ट ने गुरुवार को पिछले साल दुर्गा पूजा के विसर्जन को लेकर हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान हुए सनसनीखेज राम गोपाल मिश्रा हत्याकांड में नौ दोषियों को उम्रकैद और मुख्य आरोपी सरफराज उर्फ ​​रिंकू को मौत की सजा सुनाई है। यह आदेश एडिशनल सेशंस जज (प्रथम) पवन कुमार शर्मा ने दिया।

अन्य दोषियों में सरफराज के पिता अब्दुल हमीद, दो भाई- फहीम और तालिब, सैफ अली, जावेद खान, जीशान उर्फ ​​राजा उर्फ ​​साहिर, ननकू, मारूफ अली, शोएब खान, शामिल हैं। सरफराज को छोड़कर बाकी सभी को BNS की धारा 103(2) (हत्या), 191(2) (दंगा), 191(3) (हथियारों के साथ दंगा), आर्म्स एक्ट और अन्य आरोपों के तहत उम्रकैद की सजा मिली। कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण अफजल, शकील और खुर्शीद को बरी कर दिया।

बहराइच के प्रथम अपर जिला जज पवन कुमार शर्मा की अदालत ने घटना के बाद 13 महीने और 26 दिन में ये पूरा ट्रायल पूरा किया। सजा सुनाए जाने के दौरान रामगोपाल की पत्नी और दोषियों के परिजन भी कोर्ट पहुंचे थे।

क्या हुआ था बहराइच में?

13 अक्टूबर, 2024 को बहराइच में उस समय सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया था, जब दुर्गा मूर्ति विसर्जन जुलूस में शामिल एक युवक राम गोपाल मिश्रा को गोली मार दी गई थी। पुलिस ने बताया कि राम गोपाल मिश्रा ने कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के एक घर की छत पर चढ़कर इस्लामिक हरे झंडे को उतारकर भगवा झंडे को फहराने की कोशिश की थी।

दरअसल, बहराइच से करीब 40 किमी दूर महराजगंज बाजार में शाम 6 बजे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस निकाला जा रहा था। इसी दौरान मुस्लिम समाज के लोगों ने डीजे बंद करने को कहा। इसी बात पर विवाद शुरू हुआ। पत्थरबाजी और आगजनी शुरू हुई। इसी दौरान रामगोपाल मिश्रा ने अब्दुल हमीद के घर की छत पर लगा झंडा उतार दिया और उसकी जगह भगवा झंडा फहराने की कोशिश की। तभी अब्दुल हमीद और उनके बेटे सरफराज और दूसरे आरोपियों ने रामगोपाल को घर के अंदर खींचकर बुरी तरह से पीटा। फिर गोली मार दी गई।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस घटना से बड़े पैमाने पर दहशत फैल गई, जरूरी सेवाएं बाधित हुईं और कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई। कोर्ट ने कहा कि मिश्रा की पत्नी, जिसकी शादी जून 2024 में ही हुई थी, ‘शादी के चार महीने के अंदर ही अपने पति को खो दिया।’ कोर्ट ने गोली मारने की घटना को परिवार के लिए जिंदगी भर की त्रासदी बताया।

कोर्ट ने कहा- ये क्रूर हत्या

कोर्ट ने अपने फैसले को लेकर कई गंभीर कारण बताए। कोर्ट ने कहा कि हत्या बहुत क्रूर, वहशी और समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाली थी। कोर्ट ने कहा कि यह काम दबदबा दिखाने के लिए किया गया था, जिसमें एक निहत्थे आदमी को निशाना बनाया गया था। कोर्ट ने सरफराज, जिसने गोली चलाई थी उसे समाज के लिए खतरा बताया, क्योंकि उसने बाद में पुलिस पर भी हमला किया था।

मामले में 13 अक्टूबर, 2024 को एक FIR दर्ज की गई थी। इसमें शुरू में छह लोगों को आरोपी बनाया गया था, और बाद में हत्या और दंगा करने के आरोप में सात और लोगों को जोड़ा गया। सभी 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट 1 जनवरी, 2025 को दायर की गई।

हत्या के एक दिन बाद बड़े पैमाने पर फैली हिंसा

हत्या के एक दिन बाद मिश्रा के अंतिम संस्कार के दौरान हिंसा भड़क गई थी। भीड़ ने गाड़ियों और एक ऑटोमोबाइल शोरूम में आग लगा दी और एक अस्पताल में तोड़फोड़ की। इसके बाद जिले में इंटरनेट सेवाएं बंद करनी पड़ी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ADG (कानून व्यवस्था) अमिताभ यश और तत्कालीन गृह सचिव संजीव गुप्ता को जिले में भेजा, जिसके बाद स्थिति कंट्रोल में आई।

घटना को लेकर दो पुलिस अधिकारियों – हरदी पुलिस स्टेशन के इंचार्ज एसके वर्मा और महाराजगंज चौकी के सब-इंस्पेक्टर शिव कुमार – को ड्यूटी में लापरवाही के लिए सस्पेंड कर दिया गया था। सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन ASP पवित्र मोहन त्रिपाठी को PAC का सपोर्ट होने के बावजूद स्थिति को कंट्रोल करने में नाकाम रहने के लिए सस्पेंड किया गया था। बाद में, इंटेलिजेंस नाकामी की रिपोर्ट के बाद महसी सर्किल ऑफिसर रूपेंद्र गौर को भी सस्पेंड कर दिया गया था।

कोर्ट ने कहा कि राम गोपाल मिश्रा की हत्या कोई आम मर्डर नहीं था, बल्कि इसमें बहुत ज्यादा क्रूरता थी। अभियोजन ने इसे ‘भयानक’ अपराध का एक उदाहरण बताया, जिसमें कहा गया कि मिश्रा पर आठ गोलियां चलाई गईं, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में 40 एंट्री घाव, दो एग्जिट घाव, जले हुए पैर की उंगलियां, जबरदस्ती निकाले गए नाखून, कुंद चीजों से लगी चोटें और ऊपरी शरीर ‘छलनी किया हुआ जैसा’ पाया गया।

सरकारी वकील ने कहा कि इस अपराध में साफ तौर पर गलत इरादा और गलत काम शामिल था, जिसे जान से मारने की नीयत से अंजाम दिया गया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि दोषियों ने दुर्गा विसर्जन जुलूस में हिस्सा ले रहे एक आदमी को निशाना बनाकर धार्मिक वर्चस्व दिखाने की कोशिश की।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि घटना का असर इतना ज्यादा रहा कि बहराइच एक महीने से ज्यादा समय तक अशांत रहा, बाजार और स्कूल बंद रहे। इंटरनेट सेवाएं तीन दिनों के लिए बंद कर दी गईं, और RAF, PAC, और आस-पास के जिलों से पुलिस यूनिट्स को तैनात करना पड़ा।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments