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17 अप्रैल 1956 को आदिवासी क्षेत्र खरगोन में जनमे भालचन्द्र जोशी पेशे से इंजीनियर रहे और अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया है । आठवें दशक के उत्तरार्द्ध में कहानी लेखन की शुरुआत। जीवन का एक लंबा हिस्सा आदिवासियों के बीच बिताया है। आदिवासी जीवन पद्धति तथा कला का विशेष अध्ययन। निमाड़ की लोक कलाओं और लोक कथाओं पर काम। चित्रकला में सक्रिय रूचि। देश के प्रमुख अखबारों के लिए समसामयिक विषयों पर लेखन। कुछ समय तक लघु पत्रिका ‘यथार्थ’ का संपादन। इसके अतिरिक्त ‘कथादेश’ , 'पाखी' और आज की जनधारा के अनेक महत्वपूर्ण विशेषांक तथा विभिन्न विषयों पर केंद्रित सात पुस्तकों का का संपादन । टेलीविजन के लिए क्लासिक सीरीज में फिल्म लेखन। नौ कहानी संग्रह , दो उपन्यास और तीन आलोचना पुस्तकें प्रकाशित । उपन्यास 'प्रार्थना में पहाड़' का मराठी और कन्नड़ में अनुवाद। 'जस का फुल' उपन्यास का कन्नड़ में अनुवाद । अनेक कहानियों का भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अंग्रेजी में अनुवाद हुआ है । मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन का ‘वागीश्वरी पुरस्कार’। इंडिपेंडेंट मीडिया इनिशिएटिव सोसायटी दिल्ली का शब्द-साधक जनप्रिय लेखक सम्मान, म.प्र. अभिनव कला परिषद भोपाल द्वारा अभिनव शब्द-शिल्पी सम्मान, स्पंदन कृति सम्मान, शैलेश मटियानी कथा पुरस्कार , डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी आलोचना सम्मान , शमशेर सम्मान और वर्ष 2025 का कथाक्रम सम्मान । संप्रति -रायपुर के दैनिक समाचार पत्र 'आज की जनधारा' के सलाहकार संपादक।