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अंबर पांडे के अब तक तीन कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं- कोलाहल की कविताएँ, गरुड़ और अन्य शोकगीत तथा रुक्मिणी हरण।
उनका उपन्यास 'मतलब हिंदू' भारत में हिंदू अस्मिता के गठन की प्रक्रिया को गल्प रूप में खोजती अंबर के उपन्यासों की त्रयी की पहली कड़ी है, जो वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित है। श्रीरामकृष्ण परमहंस की पत्नी शारदा के जीवन पर आधारित उनका उपन्यास भी शीघ्र प्रकाश्य है।
अंबर कई भारतीय और यूरोपीय भाषाओं जैसे गुजराती, मराठी, हिंदी, उर्दू, फ्रेंच और जर्मन जानते है। भाषा के प्रति उनका प्रेम उनके द्वारा प्रकाशित अनुवाद के अनेक कार्यों में भी प्रकट होता है। इसमें रिल्के, पॉल सेलाँ, इंगबॉर्ग बाख़मन, इव्स बॉनफॉय, उमाकांत जोशी, विंदा करंदीकर और अरुण कोलाटकर की रचनाओं का हिंदी में अनुवाद शामिल है।
पुरस्कार/ सम्मान- उनके पहले कविता संग्रह के लिए, उन्होंने प्रतिष्ठित शब्द सम्मान 2019, हेमंत स्मृति कविता सम्मान 2021 और 2022 में कृति सम्मान प्राप्त है।