गुवाहाटी/नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान से कुछ हफ्ते पहले राज्य में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कद्दावर नेता और डिब्रूगढ़ (पूर्व में नगाँव के सांसद रहे) लोकसभा क्षेत्र से मौजूदा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। बोरदोलोई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे अपने पत्र में पार्टी के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है।
‘अकेला महसूस कर रहा था‘
इस्तीफा देने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बोरदोलोई भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “आज मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक को छोड़ दिया है और मैं इससे खुश नहीं हूँ। मैंने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि असम कांग्रेस के भीतर मुझे लगातार अपमानित किया जा रहा था।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने भी उनके प्रति कोई सहानुभूति नहीं दिखाई, जिससे वे पार्टी के भीतर बिल्कुल अकेले पड़ गए थे। आजीवन कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद इस तरह का फैसला लेना उनके लिए कठिन लेकिन अनिवार्य था।
बोरदोलोई का जाना कांग्रेस के लिए इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि फरवरी में ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने अपने 32 साल के राजनीतिक करियर को विराम देते हुए इस्तीफा दे दिया था। बोरा के इस्तीफे के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ उनकी मुलाकात ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी थी। अब बोरदोलोई के इस्तीफे ने कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक कलह को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
भाजपा में शामिल होने की अटकलें
उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं कि वे जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बोरदोलोई के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिलहाल वे उनके संपर्क में नहीं हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि यदि बोरदोलोई ने केंद्रीय नेतृत्व या गृह मंत्री से बात की होगी तो उन्हें इसकी जानकारी मिलेगी। उन्होंने भविष्य में बोरदोलोई से संपर्क होने की संभावना से इनकार नहीं किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बोरदोलोई जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं, जिससे ऊपरी असम और डिब्रूगढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भाजपा और भी मजबूत हो जाएगी।
असम में 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल 2026 को एक चरण में मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। राज्य में मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा-नीत गठबंधन और कांग्रेस-नीत विपक्षी खेमे के बीच माना जा रहा है।
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 126 में से बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए सत्ता बरकरार रखी थी। उस समय भाजपा ने 60 और उसके सहयोगियों (एजीपी और यूपीपीएल) ने कुल 15 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस नीत विपक्ष लगभग 50 सीटों पर सिमट गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने राज्य की 14 में से 9 सीटें जीतकर अपना दबदबा साबित किया था। ऐसे में बोरदोलोई जैसे वरिष्ठ नेता का साथ छोड़ना कांग्रेस के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है।

