नई दिल्ली: राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को 2021-22 के दिल्ली शराब नीति मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। सीबीआई द्वारा जांच किए गए इस मामले में विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि मामले में दोनों की कथित भूमिका साबित नहीं हो सकी। साथ ही कोर्ट ने अन्य 21 आरोपियों को भी बरी किया।
पीठ ने कहा कि लगाए आरोप न्यायिक जांच में खरे नहीं उतरे और मनीष सिसोदिया की ओर से कोई आपराधिक इरादा नहीं पाया गया। इसमें आगे कहा गया कि कॉन्सपिरेसी थ्योरी ‘एक संवैधानिक अधिकार के सामने टिक नहीं सकता।’ इससे पहले अदालत ने सीबीआई, केजरीवाल और सिसोदिया समेत 21 अन्य आरोपियों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद 12 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए सीबीआई की चार्जसीट पर सवाल उठाए और कहा कि इसमें कई कमियां हैं, जिनका किसी गवाह या बयान से कोई सबूत नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं पाया, क्योंकि सीबीआई ने महज अनुमान के आधार पर साजिश की कहानी गढ़ने की कोशिश की। चार्जशीट में ‘साउथ लॉबी’ शब्द के इस्तेमाल पर भी अदालत ने आपत्ति जताई।
फैसले के बाद इमोशनल हुए केजरीवाल
राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में बरी किए जाने के बाद केजरीवाल भावुक नजर आए। कोर्ट के फैसले के बाद पत्रकारों से बात करते हुए केजरीवाल ने कहा, ‘मैं भ्रष्ट नहीं हूं। कोर्ट ने कहा है कि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार हैं।’ उन्होंने कहा कि इस फैसले ने उन्हें और पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया दोनों को निर्दोष साबित किया है।
केजरीवाल ने कहा, ‘आम आदमी पार्टी को खत्म करने के लिए पार्टी के पांच बड़े नेताओं को जेल में डाला गया। यहां तक कि सिटिंग सीएम को उसके घर के घसीटकर जेल में डाला गया और छह महीने जेल में रखा गया। हमारे डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को लगभग दो साल जेल में रखा गया। पूरा का पूरा फर्जी केस था। हमारे ऊपर कीचड़ फेंका गया।’
इसके बाद रोते हुए केजरीवाल ने कहा, ‘ये केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है। मैंने केवल अपनी जिंदगी में ईमानदारी कमाई है और आज ये साबित हो गया। मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं कि सत्ता के लिए इस तरह देश से खिलवाड़ मत कीजिए।’
वहीं केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘इस दुनिया में भले ही कोई कितना भी ताकतवर हो जाए वो शिव शक्ति से ऊपर नहीं जा सकता। सच हमेशा जीतता है।’
क्या है शराब नीति केस से जुड़ा पूरा मामला, कब क्या हुआ?
यह मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी (शराब) नीति से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। दिल्ली के मुख्य सचिव रहे नरेश कुमार की रिपोर्ट के बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। बाद में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज करते हुए जांच शुरू की थी।
मामले में CBI ने 2022 में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद कई पूरक चार्जशीट दायर की गईं। एजेंसी का आरोप है कि अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति को अपने पक्ष में प्रभावित करने के लिए ‘साउथ लॉबी’ द्वारा 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
दिल्ली की तब की केजरीवाल सरकार नई शराब नीति 2021-22 में लेकर आई थी। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद इसे कुछ ही महीने में वापस ले लिया गया था।
26 फरवरी 2023 को सीबीआई ने इस मामले में मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया। 21 मार्च 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लंबी पूछताछ के बाद अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 26 जून को सीबीआई ने उन्हें जेल से ही हिरासत में ले लिया था।
मामले में कुल 23 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जिनमें केजरीवाल, सिसोदिया, के. कविता, कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण रामचंद्र पिल्लई, मूथा गौतम, समीर महेंद्रू, अमनदीप सिंह ढल, अर्जुन पांडेय, बुच्चिबाबू गोरंटला, राकेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, चनप्रीत सिंह रायट, अरविंद कुमार सिंह, दुर्गेश पाठक, अमित अरोड़ा, विनोद चौहान, आशीष माथुर और पी. सरथ चंद्र रेड्डी शामिल हैं।
बहस के दौरान CBI ने कहा कि आपराधिक साजिश के अपराध को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए और साक्ष्यों की की जांच ट्रायल के दौरान की जानी चाहिए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल डी. पी. सिंह और अधिवक्ता मनु मिश्रा ने एजेंसी की ओर से दलील दी कि सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है।
वहीं, केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को कथित साजिश से जोड़ने वाला कोई आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल को नामित करने वाली चौथी पूरक चार्जशीट पहले लगाए गए आरोपों को ही दोहराती है और केजरीवाल मुख्यमंत्री के रूप में अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे।
हरिहरन ने आगे कहा कि प्रारंभिक चार्जशीट और पहले की तीन पूरक चार्जशीट में केजरीवाल का नाम नहीं था, और उनका नाम केवल चौथी पूरक चार्जशीट में सामने आया। बचाव पक्ष ने आगे की जांच के आधार और एप्रूवर (सरकारी गवाह) राघव मंगुटा सहित विभिन्न बयानों के बतौर साक्ष्य महत्व पर भी सवाल उठाए।
गौरतलब है कि राघव मंगुटा आंध्र प्रदेश के कारोबारी परिवार से आते हैं। जांच के दौरान ईडी ने राघव मंगुटा को गिरफ्तार किया। बाद में उन्होंने ‘एप्रूवर’ (सरकारी गवाह) बनने का फैसला किया।हालांकि बचाव पक्ष का कहना रहा है कि बयान दबाव में दिए गए।

