Saturday, November 29, 2025
Homeभारतअरुणाचल की प्रेमा थोंगडोक के साथ शंघाई एयरपोर्ट पर क्या-क्या हुआ, बताई...

अरुणाचल की प्रेमा थोंगडोक के साथ शंघाई एयरपोर्ट पर क्या-क्या हुआ, बताई पूरी कहानी; मामले में भारत का कड़ा रुख

प्रेमा वांगजोम थोंगडोक ने चीन में अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और सरकार से कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई की मांग की है। अरुणाचल प्रदेश की मूल निवासी और बीते 14 साल से ब्रिटेन में रह रही प्रेमा लंदन से जापान जा रही थीं, जिनकी ट्रांजिट शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर थी।

अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली प्रेमा वांगजोम थोंगडोक को शंघाई एयरपोर्ट पर 18 घंटे तक परेशान किया गया। प्रेमा लंदन से जापान जा रही थीं और शंघाई में उनकी 3 घंटे की ट्रांजिट थी। चीन के अधिकारियों ने उसका भारतीय पासपोर्ट यह कहकर अमान्य बता दिया कि जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश लिखे होने से यह पासपोर्ट वैध नहीं है। रिपोर्टों की मानें तो अधिकारियों ने प्रेमा से यहां तक कहा कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है।

घटना के बाद भारत ने चीन के सामने सख्त आपत्ति दर्ज कराई है। भारत के शंघाई स्थित वाणिज्य दूतावास और विदेश मंत्रालय ने इस मामले में चीन के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारतीय दूतावास ने इस मामले में प्रेमा की आगे की यात्रा के लिए मदद भी की।

प्रेमा ने चीन में अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और सरकार से कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई की मांग की है।

क्या हुआ शंघाई एयरपोर्ट पर?

35 वर्षीय प्रेमा थोंगडोक पिछले 14 साल से ब्रिटेन में रह रही हैं। वह अरुणाचल प्रदेश के वेस्ट कामेंग जिले के रूपा कस्बे की रहने वाली हैं और फिलहाल फाइनैंशल एडवाइजर के रूप में काम कर रही हैं। 21 नवंबर को वह लंदन से जापान जा रही थीं और शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर तीन घंटे का ट्रांजिट निर्धारित था। लेकिन सुरक्षा जांच के दौरान अधिकारियों ने उन्हें कतार से अलग कर लिया।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में प्रेमा ने बताया कि अधिकारी पासपोर्ट में दर्ज जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश को लेकर आपत्ति जता रहे थे। उन्होंने कहा कि “अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है, इसलिए यह भारतीय पासपोर्ट मान्य नहीं है।” जब उन्होंने नियमों की जानकारी मांगी तो कोई लिखित दस्तावेज नहीं दिखाया गया।

प्रेमा ने बताया कि अधिकारी उनका मजाक उड़ा रहा थे। पासपोर्ट रख लिया। खाने तक को नहीं दिया। एक अधिकारी ने उनसे यह तक कहा कि उन्हें चीनी पासपोर्ट लेना चाहिए। प्रेमा ने कहा कि 12 घंटे की यात्रा के बाद मुझे 18 घंटे एयरपोर्ट पर रोका गया, खाने का इंतजाम नहीं था। इंटरनेट और जानकारी तक पहुंच नहीं थी। जापान का वीजा होने के बावजूद मुझे आगे नहीं जाने दिया गया और कहा गया कि या तो यूके लौटो या भारत जाओ।

कई घंटे बाद उन्होंने फोन की मांग की और वकील से संपर्क करने की बात कही। इसके बाद वह भारतीय दूतावास से जुड़ पाईं। करीब एक घंटे में दूतावास के छह अधिकारी एयरपोर्ट पहुंचे, खाना दिया और बातचीत की कोशिश की। लेकिन चीनी अधिकारियों ने जापान जाने की मंजूरी नहीं दी। उन्हें ब्रिटेन या भारत लौटने का विकल्प दिया गया। यह भी कि वह सिर्फ चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस से ही टिकट बुक कर सकती हैं। कई घंटों के विवाद के बाद आखिरकार प्रेमा ने थाईलैंड होकर भारत आने का फैसला किया।

प्रेमा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “हम भारत का हिस्सा हैं, हम शुद्ध हिंदी बोलते हैं… हमें चीनी भाषा का ‘सी’ भी नहीं पता। हमें भारतीय होने पर गर्व है। पूर्वोत्तर भारत के लोगों को इस तरह की पहचान पर सवाल उठाकर परेशान नहीं किया जाना चाहिए। मैं चाहती हूं कि भारत सरकार इस मामले को चीन के सामने जोरदार तरीके से उठाए, क्योंकि एक आम नागरिक इसे खुद नहीं सुलझा सकता।”

सरकार से कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई की मांग

प्रेमा ने विदेश मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर मुआवजे की मांग भी की है और कहा है कि यह घटना मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाली रही। प्रेमा ने चीनी अधिकारियों द्वारा पासपोर्ट को अमान्य बताने को भारत की संप्रभुता के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि यह किसी भारतीय नागरिक के लिए बेहद अपमानजनक स्थिति है।

उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे को चीन के सामने मजबूती से उठाया जाए और मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान के लिए मुआवजा दिलाया जाए। प्रेमा ने कहा, “मैं 14 साल से यूके में हूं, लेकिन मैंने भारतीय पासपोर्ट नहीं छोड़ा क्योंकि मैं अपने देश से प्यार करती हूं। शायद अगर मेरे पास ब्रिटिश पासपोर्ट होता तो यह सब नहीं होता।”

थोंगडोक ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पहचान और सम्मान से जुड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर इस तरह की घटनाओं पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में पूर्वोत्तर के नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्राओं में और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

भारत ने कड़ा विरोध जताया

भारत ने इस घटना पर चीन के प्रति कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बीजिंग और दिल्ली में उसी दिन स्ट्रॉन्ग डिमार्श दिया गया। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यह मामला न केवल भारतीय नागरिक के साथ बदसलूकी है, बल्कि भारत की संप्रभुता को सीधी चुनौती भी है।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि यात्री को जिन आधारों पर रोका गया वह हास्यास्पद है। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां के निवासियों को भारतीय पासपोर्ट रखना और उसके साथ यात्रा करना पूर्ण अधिकार है। भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि चीनी अधिकारियों का व्यवहार शिकागो और मॉन्ट्रियल कन्वेंशन्स (अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों) के खिलाफ है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments