नई दिल्ली: चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाते हुए ऐतिहासिक यात्रा के बाद, नासा के आर्टेमिस II मिशन (Artemis II) पर सवार चारों अंतरिक्ष यात्री शनिवार सुबह (भारतीय समयानुसार) सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आए है। अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच सहित कनाडा के जेरेमी हैनसेन को लेकर ओरियन स्पेसक्राफ्ट शनिवार सुबह भारतीय समयानुसार 5:37 बजे दक्षिणी कैलिफोर्निया के तट से दूर प्रशांत महासागर में उतरा।
आर्टेमिस II मिशन क्यों खास रहा?
यह मिशन दुनिया भर में चर्चित रहा और इसलिए खास रहा क्योंकि ये चारों पांच दशकों से अधिक समय में चंद्रमा के निकट पहुंचने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री हैं। हालांकि वे चंद्रमा पर नहीं उतरे, लेकिन उनका अंतरिक्ष यान उन्हें अंतरिक्ष में उन सभी अपोलो मिशनों से कहीं अधिक दूर ले गया, जिन्होंने 1960 और 1970 के दशक में चंद्रमा पर लैंडिंग की थी।
यह स्पेसक्राफ्ट 10 दिनों की यात्रा के दौरान पृथ्वी से अधिकतम 4,06,778 किमी की दूरी तक पहुंचा, जो 1970 में अपोलो 13 मिशन द्वारा तय की गई दूरी से लगभग 6,606 किमी अधिक है।
वैसे अपनी 10 दिवसीय यात्रा के दौरान, आर्टेमिस II मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने लगभग 1.12 मिलियन किलोमीटर (11 लाख किमी से ज्यादा) की दूरी तय की। लेकिन ये किसी मानव मिशन द्वारा तय की गई सबसे अधिक दूरी नहीं है। अपोलो मिशनों में से आखिरी अपोलो 17 मिशन ने लगभग 23.8 लाख किलोमीटर की कुल दूरी तय की थी।
पृथ्वी से चंद्रमा की औसत दूरी लगभग 3,84,400 किलोमीटर है, इसलिए एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक की वापसी यात्रा कम से कम 7,68,800 किलोमीटर होगी। लेकिन अंतरिक्ष यानों के प्रक्षेप पथ जटिल और घुमावदार होते हैं, और चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी भी लगातार बदलती रहती है। क्योंकि दोनों ही दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं।
जब धरती के वायुमंडल में पहुंचा Artemis II
पृथ्वी के वायुमंडल में शनिवार को प्रवेश करते समय ओरियन अंतरिक्ष यान लगभग 11-12 किमी/सेकंड (लगभग 40,000-42,000 किमी प्रति घंटा) की गति से यात्रा कर रहा था। यह अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) या इसी तरह की अन्य पृथ्वी की निचली कक्षाओं से आने वाले अंतरिक्ष यानों की वायुमंडल में प्रवेश करते समय 26,000-28,000 किमी प्रति घंटा की गति से कहीं अधिक है।
इसकी वजह ये है कि चंद्रमा से आने वाले मिशन, जो पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी से आते हैं, वायुमंडल में प्रवेश करने से पहले पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में अधिक समय तक रहते हैं। इससे उनकी गति बढ़ जाती है। वहीं, अंतरिक्ष यात्री अक्सर जिस इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जाते हैं, वह पृथ्वी से लगभग 400 किमी ही दूर है।
इसलिए दूर से आने वाले स्पेसक्राफ्ट को लेकर सावधानी ज्यादा बरतनी होती है। अधिक गति का मतलब है अधिक ऊर्जा और ये कई बार खतरनाक साबित हो सकता है। चंद्रमा की कक्षा से आने वाले स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय अधिक भौतिक तनाव को सहन करने के लिए कहीं अधिक मजबूत होना जरूरी है।
आर्टेमिस II मिशन महत्वपूर्ण क्यों है?
यह मिशन अंतरिक्ष की गहराई से खोज में इंसानी मौजूदगी की वापसी की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। पृथ्वी पर लौटने से पहले नासा ने जानकारी दी थी कि लगभग 6 लाख 90 हजार मील की लंबी यात्रा पूरी करने के बाद यह दल पृथ्वी के करीब पहुंच रहा है।
यह मिशन दुनिया भर में चर्चा का विषय बना, क्योंकि पांच दशक से अधिक समय बाद इंसान ने पृथ्वी की निचली कक्षा से आगे गहरे अंतरिक्ष में कदम रखा है। नासा के अनुसार, इस यात्रा में अंतरिक्ष यात्री अब तक की सबसे अधिक दूरी तक गए, जो भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए रास्ता तैयार करेगी।
अधिकारियों ने बताया कि इस मिशन को विशेष रूप से इस तरह से डिजाइन किया गया था, ताकि गहरे अंतरिक्ष के वातावरण में स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान का कठोर परीक्षण किया जा सके, और वह भी तब जब उसमें अंतरिक्ष यात्री सवार हों। चंद्रमा के पास से गुजरना इस परीक्षण का अहम हिस्सा था, जिससे भविष्य के मिशनों की तैयारी को परखा जा सके।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)

