Friday, March 20, 2026
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अंकिता भंडारी मर्डर केस: दुष्यंत गौतम को ‘VIP’ बताने पर हाई कोर्ट सख्त, कांग्रेस-AAP को 24 घंटे के भीतर सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश

जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि प्रतिवादी और उनके एजेंट भविष्य में दुष्यंत गौतम को इस मामले में कथित “वीवीआईपी” बताकर टारगेट करने वाला कोई भी कंटेंट न तो अपलोड करेंगे और न ही दोबारा साझा करेंगे।

नई दिल्लीः दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर अहम आदेश दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम की मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अन्य प्रतिवादियों को उनके खिलाफ अपलोड किए गए पोस्ट और वीडियो 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तय समय में कंटेंट नहीं हटाने की स्थिति में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को स्वयं कार्रवाई करनी होगी।

जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि प्रतिवादी और उनके एजेंट भविष्य में दुष्यंत गौतम को इस मामले में कथित “वीवीआईपी” बताकर टारगेट करने वाला कोई भी कंटेंट न तो अपलोड करेंगे और न ही दोबारा साझा करेंगे। कोर्ट ने चेताया कि आदेश का उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 4 मई को तय की गई है, जिसमें आदेश के पालन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

सुनवाई के दौरान क्या कुछ कहा गया?

सुनवाई के दौरान दुष्यंत गौतम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने दलील दी कि सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो और पोस्ट के जरिए उनके मुवक्किल की छवि को जानबूझकर खराब किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कथित दुष्प्रचार में कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट सक्रिय हैं, जिससे नुकसान और गंभीर हो गया है।

भाटिया ने अदालत को बताया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच और ट्रायल के दौरान कहीं भी दुष्यंत गौतम का नाम सामने नहीं आया। न तो किसी एफआईआर में, न चार्जशीट में और न ही किसी जांच रिपोर्ट में उनका उल्लेख है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर झूठा नैरेटिव बनाकर उन्हें इस हत्याकांड से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।

याचिका में क्या मांग की गई थी?

दुष्यंत गौतम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि सोशल मीडिया से वह सभी कंटेंट हटाए जाएं, जिनमें उन्हें अंकिता भंडारी मामले से जोड़ा जा रहा है। याचिका में कहा गया कि 24 दिसंबर 2025 को कुछ वीडियो और ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए, जो तेजी से वायरल हुए और जिनमें झूठे आरोप लगाकर उनका नाम उछाला गया।

याचिका में यह भी कहा गया कि जांच एजेंसियों और अदालतों ने इस मामले में कभी भी दुष्यंत गौतम को आरोपी या संदिग्ध नहीं माना। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा अभियान पूरी तरह फेक न्यूज है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना और उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि व्यक्तिगत प्रतिवादी या राजनीतिक दल 24 घंटे के भीतर कंटेंट नहीं हटाते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को स्वतः ही वह सामग्री हटानी होगी। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि भविष्य में ऐसा कोई कंटेंट दोबारा अपलोड होता है, तो प्लेटफॉर्म इसकी सूचना याचिकाकर्ता को देंगे, ताकि वह कानूनी कदम उठा सकें।

उत्तराखंड में पहले ही दर्ज हैं एफआईआर

इस बीच मामले में नाम जोड़े जाने को लेकर दुष्यंत गौतम ने टीवी अभिनेत्री उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। गौतम ने दोनों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने साजिश के तहत उन्हें बदनाम करने की कोशिश की और इस मामले को राजनीतिक रंग दिया।

दुष्यंत गौतम ने देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह को दी गई शिकायत में कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल और आम आदमी पार्टी का भी नाम लिया है। उनका दावा है कि उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर ने इन राजनीतिक दलों के साथ मिलकर उनकी और भाजपा की छवि खराब करने की साजिश रची।

उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के खिलाफ भाजपा नेताओं के सहयोगियों ने भी अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। बीते एक हफ्ते में पुलिस ने दोनों के घरों पर नोटिस चस्पा किए हैं, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि दोनों फिलहाल फरार हैं। वहीं, उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि पुलिस उन्हें जेल में डालकर “दुष्यंत गौतम और कुछ अन्य भाजपा नेताओं की संलिप्तता से जुड़े सबूत नष्ट करना चाहती है।”

क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड और माजूदा विवाद कैसे बढ़ा?

अंकिता भंडारी, जो उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी, 18 सितंबर 2022 को लापता हो गई थी। कुछ दिनों बाद उसका शव नहर से बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि उस पर रिसॉर्ट में मेहमानों को ‘विशेष सेवाएं’ देने का दबाव बनाया जा रहा था। इस मामले में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और सहायक मैनेजर को आरोपी बनाया गया। निचली अदालत ने तीनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

मौजूदा विवाद यह है कि कुछ दिन पहले उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर दावा किया कि ऋषिकेश के वनंतरा रिसॉर्ट में काम करने वाली किशोरी रिसेप्शनिस्ट से विशेष सेवाएं देने के लिए जिस वीआईपी मेहमान का दबाव बनाया गया था, वह दुष्यंत गौतम थे। सनावर ने पहले वीडियो में उस वीआईपी को गट्टू बताया और बाद में एक अन्य वीडियो में कहा कि सुरेश राठौर ने ही उसकी पहचान दुष्यंत गौतम के रूप में की थी।

हालांकि, पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने न सिर्फ यह दावा नकारा कि उर्मिला सनावर उनकी पत्नी हैं, बल्कि यह भी कहा कि उन्होंने कभी दुष्यंत गौतम को उस दिन रिसॉर्ट में मौजूद वीआईपी नहीं बताया, जिस दिन 18 सितंबर 2022 को अंकिता भंडारी की हत्या की गई थी।

इस पूरे मामले को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। दुष्यंत गौतम के खिलाफ कार्रवाई में कथित देरी से नाराज कुछ भाजपा कार्यकर्ता भी बीते एक हफ्ते से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हो गए हैं। वे गौतम की गिरफ्तारी और सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

इस बीच, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने अलग-अलग जगहों पर भाजपा और दुष्यंत गौतम के खिलाफ प्रदर्शन किए। ‘बीजेपी से यारी, उत्तराखंड से गद्दारी’ जैसे नारे लिखे पोस्टरों के साथ अल्मोड़ा, हरिद्वार सहित कई इलाकों में मंगलवार को विरोध प्रदर्शन देखने को मिले।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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