वाशिंगटनः पूर्व अमेरिकी कांग्रेसी और अर्थशास्त्री डॉ. डेव ब्रैट ने H-1b वीजा में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। ब्रैट ने दावा किया कि एक भारतीय वाणिज्य दूतावास (कांसुलेट) जिले – चेन्नई में इस वीजा श्रेणी के लिए वार्षिक वैधानिक सीमा से दोगुने से भी ज्यादा आवेदन आए हैं।
उन्होंने यह टिप्पणी स्टीव बैनन के वार रूम पॉडकास्ट के दौरान की। उनकी टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन कुशल-श्रमिक वीजा की जांच बढ़ा रहा है।
ब्रैट ने क्या दावा किया?
ब्रैट ने तर्क दिया कि यह कार्यक्रम “औद्योगिक पैमाने पर धोखाधड़ी द्वारा कब्जा कर लिया गया है।” उन्होंने भारत से आवेदकों की अनुपातहीन हिस्सेदारी की ओर इशारा किया।
उन्होंने इस दौरान बातचीत में कहा कि 71 फीसदी एच-1 बी वीजा भारत से आते हैं और केवल 12 फीसदी चीन से। यह आपको बहुत कुछ बताता है। उन्होंने आगे कहा “केवल 85,000 एच-1बी वीजा की सीमा है फिर भी भारत के एक जिले, मद्रास (चेन्नई) को 2,20,000 वीजा मिले। यह कांग्रेस द्वारा निर्धारित सीमा से ढाई गुना ज़्यादा है। यही घोटाला है।”
रिपोर्टों के मुताबिक, चेन्नई स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास ने 2024 में लगभग 2,20,000 एच-1 बी वीजा और 1,40,000 एच-4 आश्रित वीजा संसाधित किए। यह वाणिज्या दूतावास तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना के आवेदकों को सेवाएं प्रदान करता है। इससे यह विश्व स्तर पर सबसे व्यस्त एच-1बी प्रसंस्करण केंद्रों में से एक बन गया है।
ब्रैट ने इस मुद्दे को अमेरिका में रोजगार से भी जोड़ा और दावा किया कि इस कार्यक्रम का दुरुपयोग अमेरिकी कामगारों के लिए खतरा पैदा करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि “जब मैं एच-1बी वीजा की बात करता हूं तो आपको अपने चचेरे भाइयों, मौसियों, चाचाओं, दादा-दादी के बारे में सोचना चाहिए। इनमें से कोई आकर दावा करता है कि वे कुशल हैं लेकिन वे कुशल नहीं हैं यही धोखाधड़ी है।”
ब्रैट ने कहा “उन्होंने आपके परिवार की नौकरी और आपका बंधक छीन लिया।”
वीजा धोखाधड़ी का लगाया आरोप
इससे पहले अमेरिकी विदेश सेवा के अधिकारी महवश सिद्दीकी ने भी ऐसे ही आरोप लगाए हैं। सिद्दीकी ने करीब दो दशक पहले चेन्नई के वाणिज्यिक दूतावास में सेवा की थी।
सिद्दीकी ने एच-1 बी कार्यक्रम में व्यापक और व्यवस्थित धोखाधड़ी का आरोप लगाया और दावा किया कि भारतीय आवेदकों को जारी किए अधिकांश कार्य वीजा धोखाधड़ी से प्राप्त किए गए थे।
सिद्दीकी ने 2005 से 2007 के बीच इस पद पर कार्य किया। उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े एच-1बी वीजा प्रोसेसिंग केंद्रों में से एक में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने दावा किया कि अकेले 2024 में मिशन ने आश्रित परिवार के सदस्यों के लिए 2,20,000 एच-1बी वीजा और 1,40,0000 एच-4 वीजा जारी किए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीयों को जारी किए गए 80-90 फीसदी वीजा, मुख्य रूप से एच-1बी में फर्जी दस्तावेज शामिल थे। इनमें फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र या ऐसे आवेदक शामिल थे जो उच्च कुशल रोजगार की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते थे।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि एक भारतीय-अमेरिकी के रूप में मुझे यह कहना बुरा लग रहा है लेकिन भारत में धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी सामान्य बात है।
सिद्दीकी ने आगे कहा कि कुछ आवेदकों ने अमेरिकी अधिकारियों के साक्षात्कार से भी बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी वास्तविक आवेदकों के स्थान पर प्रॉक्सी उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हो गए।

