वॉशिंगटन/तेहरानः पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के बीच संभावित 45 दिन के संघर्षविराम को लेकर बातचीत चल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्तावित सीजफायर को युद्ध खत्म करने की दिशा में अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के मध्यस्थों के जरिए ये बातचीत आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बीच बैकचैनल स्तर पर भी संपर्क बना हुआ है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अगले 48 घंटों में किसी ठोस समझौते की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यस्थ दो चरणों वाले समझौते की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं। पहला चरण संभावित 45 दिन का सीजफायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत होगी। दूसरा चरण युद्ध खत्म करने पर एक समझौता होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर बातचीत के लिए और समय की जरूरत हुई, तो सीजफायर को बढ़ाया जा सकता है।
ट्रंप की ईरान को नई डेडलाइन
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है। रविवार को उन्होंने अपने ही तय अल्टीमेटम की समय-सीमा 24 घंटे बढ़ाते हुए नई डेडलाइन मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) तय की। यह समय भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे होगा।
इससे कुछ घंटे पहले उन्होंने एक और पोस्ट में ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए साफ किया कि ऐसा हमला अभूतपूर्व होगा।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “ईरान में मंगलवार का दिन ‘पावर प्लांट’ और ‘ब्रिज डे’ के रूप में जाना जाएगा, जो अपनी तरह का अनोखा होगा। मूर्ख लोगों, इस जलमार्ग (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को तुरंत खोलो, वरना नरक जैसी स्थिति झेलने के लिए तैयार रहो – बस देखते जाओ! खुदा की जय हो।”
ईरान ने क्या कहा?
ट्रंप के इस पोस्ट पर फिनलैंड स्थित ईरानी दूतावास ने तीखी प्रतिक्रिया दी। दूतावास ने कहा, “होर्मुज खुला है, लेकिन आपसी दुश्मनी बढ़ने पर वहां से गुजरना मुश्किल हो सकता है। ऐसे संवेदनशील मामलों पर सार्वजनिक बयान देने से पहले, नए बने मिलिट्री जनरलों के अपडेट्स पर भरोसा न करना और अलग-अलग अपडेट्स देना समझदारी हो सकती है। इसके अलावा, आपकी हाल की पोस्ट के लहजे और भाषा से लगता है कि इसे शायद नौसिखियों ने हैंडल किया होगा या जिन्हें सोशल मीडिया के सही तरीके और नैतिकता के बारे में पता नहीं है।”
बता दें कि, 28 फरवरी से अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी कर रखी है। यह रास्ता दुनिया के तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसके बंद होने से कई देशों में ईंधन संकट गहराने लगा है और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका असर अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी पड़ रहा है, खासकर मिड-टर्म चुनावों के मद्देनजर।
ट्रंप ने हाल के इंटरव्यू में भी अपने रुख को दोहराया। वॉल स्ट्रीट जर्नल से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका “मजबूत स्थिति” में है और अगर ईरान ने तय समय तक कदम नहीं उठाया, तो उसके पास न पावर प्लांट बचेंगे और न ही पुल। वहीं, फॉक्स न्यूज से उन्होंने कहा कि समझौते की “अच्छी संभावना” है और बातचीत जारी है।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर समझौता जल्द नहीं हुआ, तो वह “सब कुछ उड़ा देने” और तेल पर नियंत्रण लेने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
उधर, ईरान ने ट्रंप की इन धमकियों को सिरे से खारिज किया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की धमकियां “लापरवाह” हैं और इससे कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि असली समाधान ईरानी जनता के अधिकारों का सम्मान करने और इस खतरनाक टकराव को खत्म करने में है।

