Friday, March 20, 2026
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर किया, ब्रिटिश नागरिकता को लेकर है मामला

लोकसभा नेता प्रतिपक्ष RAHUL GANDHI के खिलाफ ब्रिटिश नागरिकता मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिकायत रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।

लखनऊः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में रायबरेली कोर्ट में लंबित शिकायत को लखनऊ स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। रायबरेली कोर्ट में लंबित इस शिकायत में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ उनकी कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर आपराधिक मामला दर्ज कराने की मांग की गई थी।

जस्टिस बृज राज सिंह ने मामले को लखनऊ स्थानांतरित कर दिया है। इसको लेकर शिकायतकर्ता ने कहा था कि रायबरेली में राहुल गांधी के समर्थक उन्हें रायबरेली की अदालत में बहस नहीं करने दे रहे थे।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने इस आरोप को भी ध्यान में रखा कि रायबरेली में जहां से राहुल गांधी सांसद हैं। वहां सुनवाई के दौरान भीड़ और वकीलों द्वारा हंगामा किया जा रहा था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि “आवेदक ने आरोप लगाए हैं कि विपक्षी पार्टी संख्या -4 रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद हैं, इसलिए उपरोक्त तथ्यों के आलोक में वे प्रार्थना करते हैं कि मामले को किसी अन्य जिले में स्थानांतरित किया जाए। उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए मैं पाता हूं कि निष्पक्षतापूर्वक आवेदन को रायबरेली जिले से लखनऊ स्थानांतरित किया जाना उचित है।”

इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि शिकायत रायबरेली के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-IV (एमपी/एमएलए कोर्ट) से लखनऊ स्थित एमपी/एमएलए कोर्ट के मामलों को देखने वाली अदालत में स्थानांतरित किया जाए।

आदेश पारित करने से पहले अदालत ने राहुल गांधी को कोई नोटिस जारी नहीं किया क्योंकि शिकायतकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि नेता प्रतिपक्ष अभी तक पीड़ित नहीं हैं और क्योंकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत दायर आवेदन पर FIR दर्ज करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है।

एस विग्नेश शिशिर ने दायर की याचिका

इलाहाबाद हाई कोर्ट में यह शिकायत एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर की गई थी। इसमें गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) , ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, पासपोर्ट एक्ट और फॉरेनर्स एक्ट की कई धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी। उन्होंने शिकायत में दावा किया कि राहुल गांधी ब्रिटिश स्थित कंपनी बैकॉप्स लिमिटेड के निदेशक थे और उन्होंने कंपनी के रिकॉर्ड में स्वयं अपनी राष्ट्रीयता ब्रिटिश घोषित की थी।

जब पुलिस ने यह शिकायत दर्ज नहीं की तो शिशिर ने ट्रायल कोर्ट का रुख किया। शिकायतकर्ता ने इससे पहले गृह मंत्रालय से राहुल गांधी की नागरिकता रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया था कि उन्होंने (राहुल गांधी) पहले ही ब्रिटिश की नागरिकता हासिल कर ली है।

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इसी साल अगस्त में हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि शिशिर को उनकी सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) का एक निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) प्रदान किया जाए। हाई कोर्ट में आज हुई सुनवाई के दौरान एस विग्नेश शिशिर उपस्थित हुए।

वहीं, सरकार की तरफ से वकील वीके सिंह और राव नरेंद्र सिंह उपस्थित हुए।

अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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