Friday, March 20, 2026
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अहमदाबाद विमान हादसा: अब तक 11 शवों की डीएनए से हुई पहचान, पीड़ितों के परिजनों को शव सौंपने का कार्य शुरू

 अहमदाबाद में गुरुवार को हुए भीषण एयर इंडिया विमान हादसे में मृत पाए गए 11 यात्रियों की डीएनए रिपोर्ट उनके परिजनों से मेल खा गई है। इसकी पुष्टि बीजे मेडिकल कॉलेज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार की।

हादसे के बाद शवों की स्थिति अत्यंत जली और क्षतिग्रस्त होने के कारण पहचान का एकमात्र विश्वसनीय जरिया डीएनए परीक्षण ही रह गया है। इस प्रक्रिया को बेहद सावधानी से अंजाम दिया जा रहा है क्योंकि इसके कानूनी और चिकित्सीय पहलू बेहद महत्वपूर्ण हैं।

बीजे मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रजनीश पटेल ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, “हम इस प्रक्रिया में कोई जल्दबाज़ी नहीं कर सकते। हर एक केस की बारीकी से जांच जरूरी है।”

18 जिलों के निवासी और विदेशी नागरिक भी मृतकों में शामिल

राज्य के राजस्व सचिव आलोक पांडेय ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता में बताया कि मृतकों में गुजरात के 33 में से 18 जिलों के निवासी शामिल हैं, साथ ही अन्य राज्यों और 11 विदेशी नागरिकों के परिजनों से भी संपर्क किया गया है। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवारों को इस गहन मानसिक आघात से उबरने में सहायता देने के लिए प्रशिक्षित काउंसलरों की व्यवस्था की गई है, जो उन्हें परामर्श और मनोवैज्ञानिक समर्थन देंगे।

राजस्व सचिव ने कहा, “गुजरात के सभी जिलों के फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अलावा केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए विशेषज्ञ 24 घंटे डीएनए सैंपल मिलान पर काम कर रहे हैं। जैसे ही परिणाम आते हैं, उन्हें सिविल अस्पताल भेजा जाता है, ताकि परिजन अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार कर सकें।”

पोस्टमार्टम रूम की जिम्मेदारी संभाल रहे पुलिस निरीक्षक चिराग गोसाई ने बताया कि शुक्रवार तक लगभग 220 मृतकों के परिजनों ने डीएनए सैंपल देने के लिए पुलिस से संपर्क किया था। सभी सैंपल बीजे मेडिकल कॉलेज भेजे गए हैं।

दीव के 15 यात्रियों में से 14 की मौत

एयर इंडिया विमान हादसे में दीव के 15 लोग सवार थे, जिनमें से 14 की मौत हो गई, जबकि एकमात्र जीवित व्यक्ति भी दीव से ही है। यह जानकारी दमण और दीव से सांसद उमेश पटेल ने दी। 

पटेल ने कहा, “जब मैंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की, तो उन्होंने बताया कि सभी के डीएनए सैंपल लिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक शव उन्हें सौंपे नहीं गए हैं। हादसे को तीन दिन हो चुके हैं और परिजन गहरे दुख व चिंता में हैं।”

उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से बात कर यह जानने की कोशिश की कि पहचान और शव सौंपने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने मुझे बताया कि सभी डीएनए जांचें पूरी हो चुकी हैं। आज पांच शव परिजनों को सौंपे जाएंगे, और शेष रिपोर्ट जैसे ही आएंगी, बाकी शव भी सौंप दिए जाएंगे। उमेश पटेल ने परिजनों को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन देते हुए कहा, “मैंने परिवारों से वादा किया है कि अपने सामर्थ्य के अनुसार जो भी मदद बन सकेगी, वह जरूर करूंगा।”

मृतकों के शव सौंपने की प्रक्रिया शुरू

इससे पहले, प्रशासन ने पुष्टि की थी कि जिन 8 शवों की पहचान बिना डीएनए जांच के संभव हो सकी, उन्हें पहले ही उनके परिजनों को सौंपा जा चुका है। शहर के सिविल अस्पताल में पीड़ितों के परिजनों की सहायता के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने शनिवार को बताया कि मृतकों के पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, और राज्य सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए हरसंभव सहायता सुनिश्चित की है। 

हमदाबाद सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद अस्पताल में 250 से अधिक डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाला। घायलों को तत्काल उपचार मिला और कई लोगों की जान बचाई जा सकी।

डॉ. जोशी के मुताबिक, डीएनए रिपोर्ट मिलने के बाद परिजनों को पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर सूचना दी जाएगी। इसके अलावा अस्पताल प्रशासन ने 10 विशेष हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं: 9429915911, 9429916096, 9429916118, 9429916378, 9429916608, 9429916622, 9429916682, 9429916758, 9429916771, 9429916875

डॉ. जोशी ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही अस्पताल में 250 से अधिक डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वयंसेवकों की टीम ने तत्परता से मोर्चा संभाला। घायल यात्रियों को तत्काल इलाज मुहैया कराया गया, जिससे कई जिंदगियों को बचाया जा सका। स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार के मार्गदर्शन में कार्य करते हुए घायलों का समय पर उपचार सुनिश्चित किया गया। साथ ही, मृतकों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल मिलान का कार्य फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से किया जा रहा है।

शव प्राप्त करने के लिए जरूरी दस्तावेज:

मृतक के निकटतम परिजन का सरकारी पहचान पत्र (मूल)

मृतक का आधार कार्ड/पासपोर्ट/वोटर आईडी (मूल या प्रति)

परिजनों के बीच रिश्ते का प्रमाण, जैसे जन्म प्रमाण पत्र या विवाह प्रमाण पत्र

डीएनए पंजीकरण में उपयोग किया गया मोबाइल नंबर

अगर कोई अन्य व्यक्ति शव लेने आता है, तो प्राधिकरण पत्र (Authorization Letter) अनिवार्य होगा।

अंतिम व्यवस्था:

शव सड़क मार्ग से ले जाने के लिए सरकार द्वारा निशुल्क एंबुलेंस सेवा

हवाई मार्ग से शव ले जाने के लिए एयर इंडिया से पूर्व समन्वय आवश्यक

अस्पताल द्वारा शव के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की पूरी फाइल दी जाएगी

डीएनए सैंपलिंग क्या है और कैसे होती है पहचान?

अहमदाबाद विमान दुर्घटना के पीड़ितों की पहचान में डीएनए टेस्टिंग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस संदर्भ में सर गंगा राम अस्पताल के मेडिकल जेनेटिक्स और जीनोमिक्स विभाग की अध्यक्ष, डॉ. रत्ना दूआ पुरी ने डीएनए सैंपलिंग की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “डीएनए हमारे शरीर की अनुवांशिक संरचना की मूल इकाई है। यह दो सर्पिल धारियों वाला अणु होता है, जो चार अक्षरों-  A (एडेनिन), T (थायमिन), G (ग्वानिन), और C (साइटोसिन)- से बना होता है। इन अक्षरों के विभिन्न संयोजन मिलकर जीन बनाते हैं। हमारे शरीर में लगभग 20,000 जीन होते हैं, जो 23 जोड़ी क्रोमोसोम्स पर स्थित रहते हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “क्रोमोसोम्स वास्तव में डीएनए की कुंडलित रेखाएं होती हैं। डीएनए की मदद से हम इन सभी जीनों की जांच कर सकते हैं। डीएनए को किसी भी जीवित कोशिका से निकाला जा सकता है, लेकिन इसका सबसे सामान्य और सुलभ स्रोत रक्त होता है।” इस वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए ही हादसे में बुरी तरह क्षतिग्रस्त या जले हुए शवों की पहचान परिजनों के डीएनए मिलान के जरिए की जा रही है।

कैसे हुआ हादसा

गंभीर त्रासदी उस वक्त घटी जब फ्लाइट AI171 ने सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही पलों बाद अचानक नियंत्रण खो दिया। विमान मेघानीनगर स्थित बी. जे. मेडिकल कॉलेज परिसर के भीतर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और भयंकर आग की चपेट में आ गया।

केंद्र सरकार ने इस भयावह हादसे के कारणों की जांच के लिए गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बहु-अनुशासनात्मक समिति का गठन किया है, जो तकनीकी खामियों और लापरवाहियों की जांच करेगी।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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