Friday, March 20, 2026
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घरेलू हिंसा को इस देश की सरकार ने दी कानूनी मान्यता, बस एक शर्त- हड्डी न टूटे

तालिबान के इस कानून में कहा गया है कि महिला से अपेक्षा की जाती है कि वह पूरी तरह से ढकी हुई अवस्था में जज को अपने घाव दिखाए। उसके पति या किसी पुरुष अभिभावक का अदालत में उसके साथ उपस्थित होना भी अनिवार्य है।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान ने एक नया कानून लागू किया है, जो घरेलू हिंसा को कानूनी मान्यता देता है। इसके तहत पतियों को अपनी पत्नियों और बच्चों को शारीरिक रूप से दंडित करने की अनुमति है, बशर्ते इससे ‘हड्डियां न टूटें या खुले घाव’ न बने।

तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने इस पर हस्ताक्षर किया है। इसमें अपराधी के ‘स्वतंत्र’ या ‘दास’ होने के आधार पर अलग-अलग सजाओं का प्रावधान है। नए कानून के अनुसार यदि कोई पति ‘अत्यधिक बल’ का प्रयोग कर घरेलू हिंसा में पत्नी की हड्डियां तोड़ता है या चोटें पहुंचाता है, तो उसे केवल 15 दिन की जेल हो सकती है।

महिला को साबित करना होगा ‘घरेलू हिंसा’ का आरोप

इसके अलावा, पुरुष को तभी दोषी ठहराया जाएगा जब महिला अदालत में दुर्व्यवहार को सफलतापूर्वक साबित कर सके।कानून में कहा गया है कि महिला से अपेक्षा की जाती है कि वह पूरी तरह से ढकी हुई अवस्था में जज को अपने घाव दिखाए। उसके पति या किसी पुरुष अभिभावक का अदालत में उसके साथ उपस्थित होना भी अनिवार्य है। इसके अलावा, यदि कोई विवाहित महिला अपने पति की अनुमति के बिना अपने रिश्तेदारों से मिलने जाती है, तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती है।

इसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 9 अफगान समाज को चार श्रेणियों में विभाजित करता है- धार्मिक विद्वान (उलेमा), अभिजात वर्ग (अशरफ), मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग। इस व्यवस्था के तहत, एक ही अपराध के लिए दंड अब मुख्य रूप से अपराध की प्रकृति या गंभीरता के आधार पर नहीं, बल्कि आरोपी की सामाजिक स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

कानून के अनुसार, यदि कोई इस्लामी धार्मिक विद्वान अपराध करता है, तो उसे केवल सलाह दी जाएगी। यदि अपराधी अभिजात वर्ग से संबंधित है, तो उसे अदालत में पेश होने के लिए समन भेजा जाएगा और दी जाएगी। तथाकथित मध्यम वर्ग के लोगों के लिए, उसी अपराध के लिए कारावास की सजा है। वहीं, निम्न वर्ग के व्यक्तियों के लिए सजा कारावास और शारीरिक दंड दोनों तक बढ़ जाएंगे।

नए कानून पर चर्च करना भी अपराध!

इसके अलावा गंभीर अपराधों के लिए शारीरिक दंड इस्लामी धर्मगुरुओं द्वारा निर्धारित किए जाएंगे। नए 90 पन्नों वाले दंड संहित में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन (EVAW) संबंधी 2009 के कानून को निरस्त कर दिया गया है, जिसे पिछली अमेरिकी समर्थित सरकार ने लागू किया था।

‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट के अनुसार मानवाधिकार समूहों का कहना है कि लोग इस संहिता के विरुद्ध बोलने से डर रहे हैं, यहाँ तक कि नाम न छापने की शर्त पर भी, क्योंकि तालिबान ने एक नया फरमान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि नई संहिता पर चर्चा करना ही अपराध है।

वहीं, निर्वासन में कार्यरत अफ गान मानवाधिकार संगठन ‘रावदारी’ ने एक बयान में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों से इस नए कानून के कार्यान्वयन को तत्काल रोकने के लिए ‘सभी कानूनी साधनों का उपयोग करने’ का आह्वान किया है।

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विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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