Friday, March 20, 2026
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राज्य सभा में और बढ़ेगी भाजपा की ताकत! 37 सीटों के लिए चुनाव…क्या कहता है मौजूदा समीकरण

इस पूरे साल में कुल 71 राज्य सभा सीटों पर चुनाव होंगे, और एनडीए का लक्ष्य 40 से अधिक सीटें जीतने का है। 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 राज्य सभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं।

नई दिल्ली: राज्य सभा चुनाव की बढ़ती हलचल के बीच भाजपा के नतृत्व वाले एनडीए के लिए संकेत अच्छे हैं। अगले महीने यानी 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 राज्य सभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि NDA आने वाले दिनों में राज्य सभा में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। वहीं, विपक्ष के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उनका गठबंधन एकजुट रह पाएगा, क्योंकि महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में इन गठबंधन दलों में आपसी टकराव नजर आते रहे हैं।

मौजूदा समय में राज्य सभा के 245 सदस्यीय सदन में भाजपा के पास 103 सीटें हैं। राज्य सभा में भाजपा का यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, सहयोगी दलों को शामिल करने पर एनडीए सदस्यों की कुल संख्या लगभग 133 हो जाती है, जो 122 के बहुमत के आंकड़े से काफी ऊपर है।

माना जा रहा है कि राज्य सभा के लिए चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के आंतरिक अनुमान के अनुसार NDA कम से कम 21 सीटें जीत सकता है। इस पूरे साल में कुल 71 राज्य सभा सीटों पर चुनाव होंगे, और एनडीए का लक्ष्य 40 से अधिक सीटें जीतने का है।

महाराष्ट्र, बिहार जैसे राज्यों से एनडीए को बड़ा फायदा

सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में हालिया चुनाव में मिली बढ़त भाजपा के लिए निर्णायक भूमिका निभा सकती है। महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधान सभा में भाजपा के पास 131 विधायक हैं, जबकि बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में उसके पास 89 विधायक हैं। ये संख्या भाजपा और उसके सहयोगियों के लिए राज्य सभा में सीटों में बदलने में अहम भूमिका निभाएगी।

वैसे, महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर सीटों का बंटवारा बेहद अहम रहेगा। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुट के साथ चल रही बातचीत चुनाव के नतीजों को तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। वहीं, बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान का प्रभाव भी भाजपा के लिए गणित को प्रभावित कर सकता है।

दूसरी ओर बात विपक्ष की करें विपक्ष के लिए महाराष्ट्र एक बड़ी चुनौती होगा। शरद पवार, उनके एनसीपी गुट की फौजिया खान, शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी और कांग्रेस की रजनी पाटिल जैसे प्रमुख नेता राज्य सभा के लिए चुने जाने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, केवल एक उम्मीदवार की जीत ही लगभग तय मानी जा रही है और उस निश्चित सीट के लिए मुकाबला काफी कड़ा होगा।

शरद पवार ने पहले कहा था कि वे इस बार राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन अब खबरें हैं कि वे चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं।

इंडी गठबंधन के लिए दूसरी चुनौती बिहार में भी होगी। बिहार में भी मौजूदा समीकरण के लिहाज से फिलहाल केवल एक ही उम्मीदवार के जीतने की संभावना है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में विपक्ष के खराब प्रदर्शन के बाद उनके दो सीटें खोने की आशंका है।

भाजपा, विपक्ष को किन राज्यों में होगा बड़ा फायदा?

भाजपा को जिन राज्यों में स्पष्ट बढ़त की उम्मीद है, इनमें असम शामिल है, जहां तीन सीटें खाली हैं। इसके अलावा ओडिशा भी इस लिस्ट में है जहां चार सीटों पर चुनाव होंगे।

हरियाणा और छत्तीसगढ़ में भी पार्टी मजबूत स्थिति में है, जहां दो-दो सीटों पर चुनाव होना है। पश्चिम बंगाल में भाजपा के कम से कम एक सीट जीतने की उम्मीद है। दूसरी ओर विपक्ष को राहत तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से मिल सकती है। तमिलनाडु में उन्हें सबसे अधिक सीटें मिलने की उम्मीद है।

तमिलनाडु की छह में से चार सीटें डीएमके को मिलेंगी, जबकि पश्चिम बंगाल की पांच में से चार सीटें तृणमूल कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना है। कांग्रेस तेलंगाना की अपनी दोनों सीटें बरकरार रख सकती है, जबकि छत्तीसगढ़ और हरियाणा से एक-एक सीट और हिमाचल प्रदेश की एकमात्र सीट भी विपक्ष के पास ही रहने की उम्मीद है।

मौजूदा समय में 245 सदस्यीय राज्य सभा में विपक्ष के कुल 79 सांसद हैं। इनमें कांग्रेस के 27, तृणमूल कांग्रेस के 12, DMK के 10, RJD के 5, समाजवादी पार्टी और CPM के 4-4 सांसद शामिल हैं, जबकि बाकी अन्य विपक्षी दलों से हैं। मौजूदा स्थिति में विपक्ष के अधिकतम 14 उम्मीदवारों के जीतने की संभावना है।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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