नई दिल्ली: भारत सरकार ने स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से सभी नए हैंडसेट में आधार ऐप इंस्टॉल करने को कहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने इस साल की शुरुआत में स्मार्टफोन निर्माताओं से संपर्क किया था और उनसे भारत में बेचे जाने वाले उपकरणों में आधार ऐप (Aadhar App) को पहले से इंस्टॉल करने का अनुरोध किया था।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माध्यम से गूगल, सैमसंग और एप्पल के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई थी। हालांकि, खबरों के अनुसार वे इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे है। यह घटनाक्रम हाल में संचार साथी ऐप के लिए इसी तरह के प्रस्ताव के विरोध के कुछ ही हफ्तों बाद सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने इसी साल जनवरी में निजी तौर पर फोन निर्माताओं को Aadhar App को पहले से इंस्टॉल करने का प्रस्ताव दिया था। अगर ऐसा होता है तो इससे यह सुनिश्चित हो जाएगा कि भारत में बेचे जाने वाले सभी स्मार्टफोन में आधार ऐप पहले से इंस्टॉल होगा, ठीक वैसे ही जैसे घड़ी या कैलकुलेटर जैसे ऐप पहले से इंस्टॉल होते हैं। आधार भारत सरकार की बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है, जिसमें लगभग 1.34 अरब नागरिक पंजीकृत हैं।
Aadhar App प्रीलोड का क्यों विरोध कर रही कंपनियां?
रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि टेक कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था- मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) ने कथित तौर पर सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। साथ ही गोपनीयता और परिचालन संबंधी जटिलताओं को लेकर चिंता भी जताई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सैमसंग और ऐप्पल जैसे स्मार्टफोन निर्माताओं ने संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा से जुड़े सरकारी ऐप्स के पहले से इंस्टॉल होने पर संभावित गोपनीयता जोखिमों की बात कही है।
इसके अलावा, MAIT ने लॉजिस्टिकल चैलेंज की भी जानकारी दी है। उनका कहना है कि किसी क्षेत्र से जुड़े विशेष ऐप को पहले से इंस्टॉल करने से स्मार्टफोन निर्माताओं को केवल भारत के लिए अलग उत्पादन लाइनें बनानी पड़ेंगी। इस कदम से कंपनियों की ग्लोबल स्पलाई चेन जटिल हो सकती हैं, जिससे लागत में भी वृद्धि होगी। खबरों के अनुसार, MAIT ने एक आंतरिक संचार में तर्क दिया है कि इस कदम से शायद ही कोई सार्थक फायदा मिले।
सरकार का क्या कहना है?
रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार का मानना है कि नए स्मार्टफ़ोन में आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करने से इसका व्यापक उपयोग सुनिश्चित होगा। इसे मैन्युअल रूप से डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं रह जाएगी। इससे इस सेवा तक पहुंच भी आसान होगी।
गौरतलब है कि UIDAI ने इसी साल जनवरी में नया आधार ऐप लॉन्च किया है। इसके जरिए यूजर अपनी व्यक्तिगत जानकारी आसानी से ऑनलाइन अपडेट कर सकते है। साथ ही दुरुपयोग से बचने के लिए बायोमेट्रिक डेटा को लॉक कर सकते हैं।
सरकार का तर्क है कि पहले से इंस्टॉल होने से नागरिकों को ऐप को अलग से डाउनलोड किए बिना आधार सुविधाओं का उपयोग करने की सुविधा मिलेगी, जिससे इसकी पहुंच बढ़ेगी।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां संचार साथी ऐप के जरिए सरकार ने फोन निर्माताओं को ऐप पहले से इंस्टॉल करने के लिए बाध्य करने की कोशिश की थी। वहीं, आधार ऐप को अनिवार्य करने का प्रस्ताव एक आदेश से ज्यादा एक अनुरोध के रूप में रखा गया था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आधार ऐप उन छह सरकारी ऐप्स में से एक है जिनका स्मार्टफोन निर्माताओं ने विरोध किया है। इनमें से एक ऐप सचेत (Sachet) भी है, जो आपदा को लेकर चेतावनी देने वाली सेवा है। खबरों के मुताबिक, एमएआईटी ने 10 मार्च, 2026 को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी रविंदर कुमार मीणा को लिखे पत्र में सचेत ऐप के पूर्व-इंस्टॉलेशन का विरोध किया है।
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