नई दिल्लीः केंद्र सरकार सोमवार को संसद में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश करेगी। पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया जा रहा यह विधेयक सरकार के विधायी एजेंडे का हिस्सा है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सदन में यह विधेयक पेश करेंगे। प्रस्तावित विधेयक के जरिए ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन किया जाएगा। सरकार इस संबंध में पहले ही अधिसूचना जारी कर चुकी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को प्रस्तावित संशोधन विधेयक और इससे जुड़े प्रावधानों को मंजूरी दी थी। इनमें पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था और दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान शामिल है। प्रस्तावित कानून पर संसद में इसी सप्ताह चर्चा होने की संभावना है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी सांसदों से विधेयक पर होने वाली चर्चा में भाग लेने की अपील की है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में किरेन रिजिजू ने कहा कि युवा पीढ़ी की बात सुनने और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों के बाद वह सभी सांसदों से अपील करते हैं कि वे सोमवार को ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक’ पर चर्चा में हिस्सा लें।
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक में क्या-क्या प्रस्तावित है?
प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करना तथा छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों को और सख्त बनाना है। इसके तहत पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा दोषियों की संपत्ति जब्त करने और ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए भी प्रावधान प्रस्तावित हैं।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, फास्ट-ट्रैक अदालतों में परीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई पूरी कर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया को कम करना और दोषियों को जल्द सजा दिलाना है।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा के बाद की गई है, जिसमें उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ कड़े प्रावधानों वाला व्यापक कानून संसद में लाने की बात कही थी।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा था कि केंद्र सरकार ने पेपर लीक के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कठोर दंड का प्रावधान करने वाला व्यापक विधेयक तैयार किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा था, “कल कैबिनेट में पेपर लीक के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जाएगी!”
सरकार ने कहा, छात्रों के हितों की रक्षा प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने कहा था कि पेपर लीक की घटनाओं के कारण छात्रों और उनके परिवारों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया था कि पिछले ढाई महीनों में केंद्र सरकार ने कई कार्रवाई करते हुए ऐसे अपराधों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।
छात्रों के हितों की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि करीब 22 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा बिना किसी देरी के आयोजित कराने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। वहीं, दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से चलाया जा रहा प्रदर्शन भी समाप्त हो चुका है और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन भी तोड़ दिया है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि सोमवार को संसद की कार्यवाही अपेक्षाकृत सुचारू रहेगी और पेपर लीक के खिलाफ प्रस्तावित विधेयक पर विस्तार से चर्चा हो सकेगी।

